लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-
poem

भाजपा को देश की जनता ने,
बड़ी उम्मीदों से,
केंद्र की सत्ता दिलाई थी…
कांग्रेस के दस साल के शासन के बाद,
कुछ अच्छा होगा,
ऐसी आस लगाई थी।
पर हम और आप तो,
वहीं है… कुछ बिगड़ा ही है,
बना तो कुछ नहीं…
शायद शासक की भी ये सच,
जान चुके हैं।
सुनामी थी जो निकल गई,
दिल्ली वाले अब,
वोट नहीं देंगे…
इसलियें वो चुनाव में,
नहीं जाना चाहते,
उसी पैसे से कुछ घोड़े,
ख़रीद लें तो…
दिल्ली भी अपनी,
देश भी अपना
और जनता गई
भाड़ में!
पांच साल बाद मिलेंगे जनता से
तब तक, नमो नमो!

2 Responses to “उम्मीद से…”

  1. mahendra gupta

    बहुत बढ़िया , साठ साल मार खाली , अब छह महीने तो देख लो , पांच साल के लिए चुना है , तो धैर्य रख लीजिये क्यापता कुछ बदलाव आ ही जाये

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  2. dr.ashokkumartiwari@gmail.com

    बीते सोमवार को आवाज़ आपकी के कार्यक्रम “मशाल” में हम नवी मुंबई के रवि श्रीवास्तव से मिले. रवि श्रीवास्तव को HPCL में सीनियर मेनेजर के रूप में कार्यरत थे लेकिन उन्हें कंपनी से इस लिए निकाल दिया गया क्योकि उन्होंने HPCL और तेल क्षेत्र में बहुत सारी गड़बड़ियो को उजागर किया. मशाल की बातचीत में रवि श्रीवास्तव ने बहुत सारे घोटालो की जानकारी दी जिसकी वजह से देश में हजारो करोड़ रुपियो का भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने कहा की इस देश में मुकेश अम्बानी के इशारे पर मंत्री बदल दिए जाते है और उन लोगो को मंत्री बनाया जाता है जो रिलायंस को फ़ायदा पहुँचाते है. बातचीत की मुख्य अंश इस प्रकार है.

    पेट्रोल और डीजल मिलावटी होता है

    रवि श्रीवास्तव ने तेल कंपनियों पर बड़ा आरोप लगते हुए कहा की भारत भर के अधिकतर पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल मिलावटी होता है. तेल कंपनियो के अफसर और पंप मालिक सब्सिडी पर बेचे जाने वाले मिट्टी के तेल (केरोसिन) को डीजल में मिला कर बहुत बड़ा मुनाफा कमाते है. मिट्टी का तेल सरकार गरीबो को सब्सिडी पर 13 रुपये लीटर के हिसाब से देती है, जब की डीजल करीब 59 बिकता है. मिलावट के बाद 13 रुपये की चीज़ को 59 रुपये में बेचा जा रहा है और गरीबो का केरोसिन गरीबो को न मिल कर पंप मालिको को दिया जा रहा है. रवि श्रीवास्तव के मुताबिक ये करीब 15000 करोड़ का घोटाला है जिसमे तेल कंपनियों के अफसर, ट्रांसपोर्टर और पंप मालिक शामिल है. मिलावात्घोरी रोकने के लिए मालेगांव के SDM की हत्या का भी उन्होंने जिक्र किया और कहा की गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने वालो को ऐसे ही मारा जाता है.

    मार्कर घोटाला

    सब्सिडी पर मिलने वाले केरोसिन की काला बाजारी रोकने के लिए सरकार ने उसमे नीले रंग का मार्कर मिलाया ताकि इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो रहे केरोसिन और सब्सिडी से बांटे जाने वाले केरोसिन में अंतर हो और यदि टेस्टिंग के दौरान पेट्रोल पम्प पर ये इस मार्कर के निशान मिले तो पंप मालिक का लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा. जिस विदेशी कंपनी का मार्कर तेल कंपनियों ने खरीदा उस कंपनी को बहुत सारे देशो में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था. जो मार्कर काफी सस्ता खरीदा जा सकता था, उस मारकर को 13000 रुपये प्रति लीटर के दर से खरीदा गया. इस घोटाले के लिए तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवडा पूर्ण रूप से जिम्मेदार है.

    कैंसर फ़ैलाने वाले मार्कर को मिलाया गया:

    देश की जनता के स्वस्थ को दांव पर लगा कर तेल कंपनियों ने ऐसे मार्कर का इस्तेमाल किया गया जिससे कैंसर फैलता था. ऐसे मार्कर जिससे देश की जनता के स्वास्थ्य को खतरा था, उस मारकर को ढाई साल तक देश के वातावरण में फैलाया गया ताकि पैसा कमाया जा सके. ढाई साल बाद इस मार्कर को बंद कर दिया लेकिन आज तक सरकार नया मार्कर नहीं ला पायी.

    HPCL और ONGC के विलय को रुकवाया

    ONGC को निकम्मी कंपनी बताते हुए रवि श्रीवास्तव ने कहा की 1988 से लेकर आजतक ONGC ने अपना प्रोडक्शन आधा मिलियन टन भी नहीं बढाया. ONGC केवल इस कारण बड़ी हुई क्योकि डॉलर का रेट बढ़ा. HPCL जैसी कंपनी का उस कंपनी में विलय कराना चाहती थी जो बिलकुल निकम्मी थी. इस विलय से HPCL के कर्मचारियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास सरकार करना चाहती थी जिसमे वो विफल हो गयी.

    मुकेश अम्बानी ने देश को लूटा

    KG बेसिन जहाँ गैस का भण्डार है, उससे गैस निकलने का ठेका मुकेश अम्बानी की कंपनी को मिला. जो करार हुआ, उसके मुताबिक रिलायंस 2.8 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से गैस मुहैय्या करवाएगी. लेकिन कुछ दिनों बाद मुकेश अम्बानी ने कहा की खर्चा बढ़ने के कारण वो अब गैस 4.2 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से देंगे. इस बेईमानी को सही ठहराने के लिए सरकार ने एक षड़यंत्र रचा और इस मसले पर EGOM (मंत्री समूह) बना दिया और इस मंत्री समूह ने रेट बढ़ने की मंजूरी दे दी. इस मंजूरी के कारण मुकेश अम्बानी से 30000 करोड़ रुपये कमा लिए.

    इतना ही नहीं, 2014 से रेट और बढा कर 8.2 डॉलर प्रति यूनिट कर दिया गया. और इस रेट बढाने के लिए अम्बानी ने एक बड़ी पार्टी को 1000 करोड़ रुपये चुनाव लड़ने के लिए दिए. रिलायंस ने वादा किया था की वो KG बेसिन से 80 MMSD यूनिट निकाल कर देंगे, लेकिन रेट बढ़ाने के लिए और सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए रिलायंस ने प्रोडक्शन कम कर दिया और केवल 14 MMSD यूनिट निकला. तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने इस ब्लैकमेल के खिलाफ आवाज़ उठाई और रिलायंस पर 7000 करोड़ का जुरमाना लगा दिया, जिसकी वजह से उन्हें अपने पद से हटा दिया गया और नए पेट्रोलियम मंत्री ने इस जुर्माना को वापस ले लिया.

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