लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

Posted On by &filed under विविधा.


डा. राधेश्याम द्विवेदी
गंगा व यमुना भारत की प्राणरेखा :-भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी गंगा भारत और बांग्लादेश में मिलाकर 2525 किमी. की दूरी तय करती हुई उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है। यह देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जन जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2071 कि.मी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100फीट (31मी.) की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में पवित्र मानी जाती है तथा इसकी उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है। भारतीय पुराण और साहित्य में अपने सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ वंदित गंगा नदी के प्रति विदेशी साहित्य में भी प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं। गंगा की प्रमुख सबसे बड़ी सहायक यमुना भी गंगा की भांति भारत की एक पवित्र नदी मानी गयी है। यह उत्तराखंड में हिमालय के उत्तरकाशी से 30 किमी उत्तर, गढ़वाल के यमुनोत्री नामक जगह से निकलती है और प्रयाग (इलाहाबाद) में गंगा से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में चम्बल, सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में दिल्ली और आगरा के अतिरिक्त इटावा, काल्पी, हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है। ब्रज की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है।
दोनों नदियों के स्वच्छता से सम्बन्धित आकड़े :-
गंगा नदी :- गंगा की कुल लंबाई 2525 किमी. है। इसका उद्गम गोमुख गंगोत्री ग्लेशियर है। इसका मुहाना बंगाल की खाड़ी में है। गंगा बेसिन का कैचमेंट एरिया रू 8,61,404 वर्ग किमी (भारत का 26.4 फीसद) है। जो पूरे देश की आबादी का 43 प्रतिशत है। इसका सफाई अभियान पिछले 30 वर्षों के दौरान चल रहा है। मोक्षदायिनी को निर्मल-अविरल बनाने के लिए दो चरणों में गंगा एक्शन प्लान (गैप) शुरू किया गय है। इसके अलावा तमाम सहकारी, सामाजिक प्रयासों के अलावा महत्वाकांक्षी एनजीआरबीए का गठन भी किया गया है। गंगा एक्शन प्लान – 1 में गंगा को स्वच्छ करने के लिए गंगा एक्शन प्लान पहली बार जून, 1985 में शुरू किया गया था। मार्च, 2000 में इसे बंद कर दिया गया था। इस प्लान पर कुल 451.70 करोड़ रकम खर्च की गई है। गंगा एक्शन प्लान 2 वर्ष 1993 से 2009 तक चलाया गया। इसमें गंगा की प्रमुख सहायक नदियों को भी शामिल किया गया। इसके अलावा इसके तहत 95 शहर और कस्बों पर फोकस रहा। इसमें कुल 838 करोड़ रुपए खर्चे किये गए। एनजीआरबीए फरवरी, 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन किया गया। इसके तहत कुल 835.34 करोड़ रकम खर्च की गई। 2008-09 में गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिला।
यमुना नदी :- कुल लंबाई रू 1,376 किमी है। इसका उद्गम उत्तराखंड का यमुनोत्री नामक स्थल है। यह गंगा में इलाहाबाद में संगम करती है। 1993 में जापान सरकार की मदद से यमुना एक्शन प्लान प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। जापान बैंक की ओर से 10.27 अरब रुपए निवेश की घोषणा हुई है। अब तक दो चरण पूरे हो चुके हैं। कुल 1,453.17 करोड़ खर्च हुए हैं। मई 2016 में मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार-2017 योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत पहले चरण के लिए 1,969 करोड़ रुपए आवंटित हुए थे।
जीवित व्यक्ति की तरह दोनों को कानूनी अधिकार:- भारतवर्ष में पहली बार दो प्रमुख पौराणिक नदी गंगा-यमुना को जीवित व्यक्ति की तरह कानूनी अधिकार प्रदान किया है। गंगा व यमुना की अविरलता को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यह एतिहासिक फैसला दिया है। हाई कोर्ट के जस्टिस श्री राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति श्री आलोक सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। फैसले के बाद अब इन दोनों नदियों को लीगल पर्सन जीवित व्यक्ति की तरह लीगल स्टेटस मिल गया है। आठ सप्ताह में गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है। यह भी कहा है कि यदि राज्य सरकार इसमें किसी तरह का असहयोग करती है तो केंद्र संविधान के अनुच्छेद-365 की शक्ति का प्रयोग करने को स्वतंत्र है। इसके तहत केंद्र राष्ट्रपति को राज्य में संवैधानिक तंत्र ध्वस्त होने का हवाला देकर संबंधित राज्य को दिशा-निर्देश दे सकता है और राज्य उस आदेश को मानने के लिए बाध्य है। राज्य के फेल होने की स्थिति में उस राज्य में राष्ट्रपति शासन तक लागू किया जा सकता है।हाई कोर्ट ने सरकार को अदालत द्वारा पिछले साल दिसंबर में दिए गए आदेश के अनुसार अगले 8 सप्ताह के अंदर गंगा प्रबंधन बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए। अदालत ने नमामि गंगे मिशन के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश भी दिए हैं। उन्हें गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने और उनके संरक्षण के लिए एक मानवीय चेहरे की तरह कार्य करने को कहा गया है। न्यायालय ने देहरादून के डीएम को विकासनगर की शक्ति नहर से ढकरानी तक 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण से मुक्त करने का आदेश भी जारी किया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को डीएम को तय समय में आदेश का पालन न करने पर सीधे बर्खास्त करने को कहा है। न्यायालय ने आठ सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाने का आदेश भी दिया है। यह महत्वपूर्ण एवं दूरगामी आदेश हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम नामक व्यक्ति की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्री राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति श्री आलोक सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पूर्व सुनवाई में केंद्र सरकार को पांच दिसंबर तक गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाए जाने के निर्देश दिए गए थे। पिछले साल पांच दिसंबर को कोर्ट ने तीन माह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने व परिसंपत्तियों का बंटवारा करने के आदेश पारित किए थे। अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है। न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि गंगा व यमुना को जीवित मानव की तरह का संरक्षण देना होगा। उत्तराखंड हाईकोर्ट अविरलता के साथ ही गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि गंगा-यमुना को जीवित व्यक्ति की तरह अधिकार प्रदान कर दिए गए। हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी ने अदालत के फैसले की व्याख्या करते हुए बताया कि जिस तरह जीवित व्यक्ति को संविधान में सम्मान से जीने, स्वतंत्रता के अधिकार होते हैं, उसी तरह गंगा को भी दर्जा मिल गया। केंद्र सरकार की ओर से मामले में बहस में शामिल अधिवक्ता संजय भट्ट के अनुसार अदालत के फैसले के बाद अब गंगा को संवैधानिक व्यक्ति का दर्जा हासिल हो गया। अब गंगा के खिलाफ तथा गंगा की ओर से मुकदमे सिविल कोर्ट तथा अन्य अदालतों में दाखिल किए जा सकते हैं। उनके अनुसार गंगा में कूड़ा फेंकने तथा पानी कम होने, गंगा में अतिक्रमण होने पर मुकदमा होगा तो गंगा की ओर से मुख्य सचिव, महाधिवक्ता, महानिदेशक निर्मल गंगा वाद दायर करेंगे, जबकि यदि गंगा नदी के पानी से किसी का खेत बह गया या उसमें गंदगी आ गई तो संबंधित व्यक्ति गंगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकता है। अभी तक गंगा में प्रदूषण होने पर कोई व्यक्ति जनहित याचिका दायर करते थे।
न्यूजीलैंड की बांगक्यू नदी का हवाला दिया गया:-सोमवार 20 मार्च 2017 को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति श्री आलोक सिंह की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि न्यूजीलैंड में स्थित बांगक्यू नदी को जीवित मानव के समान अधिकार दिए गए हैं। इसलिए गंगा-यमुना को भी जीवित मानव की तरह अधिकार दिए जाने चाहिए। अदालत ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों नदियों को जीवित मानव की तरह अधिकार प्रदान करते हुए गंगा-यमुना की तरफ से नमामि गंगे अथॉरिटी, मुख्य सचिव, महाधिवक्ता को इस संबंध वाद दायर करने के लिए अधिकृत भी कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *