लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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रात भर तेरी याद आती रही

बेवज़ह क़रार दिलाती रही।

जैसे सहरा में चले बादे सबा

सफ़र में धूप काम आती रही।

दमकता रहा चाँद आसमां पे

चांदनी दर खटखटाती रही।

ऊंघता बिस्तर कुनमुनाता रहा

तेरी ख़ुश्बू नखरे दिखाती रही।

कितना मैं अधूरा रह गया था

इसकी भी याद दिलाती रही।

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