लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under परिचर्चा.


-संतोष कुमार त्रिपाठी- 

swami-vivekananda

      मैं विवेकानंद का पुनर्जन्म और इस जन्म में कल्कि अवतार हूँ। नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणियों का चंद्रमा नामक भारतीय और एंटी क्राइस्ट भी मै हूँ। अमेरिकन महिला भविष्यवक्ता   जीन डिक्सन द्वारा बोला गया गांधी जन्म भी मै हूँ। यह बात मैं वर्ष 1997 से ही , जब मै आईआईटी दिल्ली से यम टेक कर रहा था तभी से कहता आ रहा हूँ। मैंने ये बात पुनः ज़ोर देकर एनएचपीसी लिमिटेड फ़रीदाबाद में वर्ष 1999-2000 के दौरान कही जब मुझे कुछ और रहस्य प्रकट हुये। मेरा विश्वास तब और दृड़ हो गया जब वर्ष 2003 मे एक टीवी न्यूज़ ( जिसमे सत्य साई बाबा की विडियो क्लिप थी ) मे बाबा ने मेरी बात का समर्थन किया। उसी दिन एक अन्य टीवी न्यूज़ मे  लाल कृष्ण अडवानी जी ने कहा की “जिस  देश में ऐसे ऐसे लोग हों वो पीछे क्यों रहे ‘’। इसे अडवानी जी से कन्फ़र्म कर सकते हैं। मैं ये जानता हूँ की अडवानी जी का उक्त वक्तव्य मेरे लिए था ।

      मैं पुनः इस बात को कहना चाहता हूँ क्योंकि मेरी इस बात से जो नया आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वरीय संदेश दुनिया को मिलना है, उससे मैं दुनिया को वंचित नहीं कर सकता, क्योंकि इसमे भारत और सम्पूर्ण विश्व का हित है।

      इसकी शुरुआत वर्ष 1997 में आईआईटी दिल्ली मे यम टेक द्वितीय सेमेस्टर के दौरान हुई। मैंने कुछ तथ्य अनुभव किए और आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा मुझे कुछ रहस्य अनुभूतियाँ हुई। 1893 के शिकागो धर्म सम्मेलन की दैवीय योजना क्या थी इसकी रहस्य अनुभूति मुझे इस दौरान हुई। कुछ वैश्विक घटनाओं की समकालिकता ( जिसे भगवान ही संभव कर सकते हैं ) और कई शब्दों के दिव्य अर्थों से यह सिद्ध होता है की मैं विवेकानंद का पुनर्जन्म हूँ। उस समय मैं अपना यम टेक प्रोजेक्ट फ़ाईनाइट एलीमेंट एनालिसिस पर कर रहा था।  मैंने अनुभव किया की यदि हम शब्दों में फ़ाईनाइट एलीमेंट एनालिसिस करें ( अर्थात शब्दों का अर्थ लगाएं ) तो कुछ महत्वपूर्ण अर्थ मिलेंगे। मैं खुद आश्चर्यकित हुआ, जब ऐसा करते हुये मैंने अपने को विवेकानंद का पुनर्जन्म और कल्कि अवतार पाया…। शब्दों का फ़ाईनाइट एलीमेंट एनालिसिस करें (अर्थात शब्दों का अर्थ लगाएं ) यही इस पूरी बात का मूल थीम है। आईआईटी दिल्ली में मेरे द्वारा कही गयी बातों की पुष्टि, उस समय, वहाँ के विद्युत इंजीनिरिंग विभाग से संबद्ध लोगों से कर सकते हैं ।

      सर्वप्रथम मै कुछ  उल्लेखनीय पंक्तियां लिखना चाहूँगा जो की वस्तुतः मुझे यम.टेक के दिनों में आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा रहस्योद्घघाटित की गयी थी । ये पंक्तियां सामर्थ्य, प्रभाव और उद्देश्य में, आधुनिक युग के वेद मंत्र के सदृश्य हैं… 

  1. हम कलयुग में सतयुग लायेंगे; ऐसा दृण विश्वास हमारा है,
    हम विश्व बन्धुत्व अपनायेंगे; ऐसा दृण प्रेम हमारा है,
    हम अटल सत्य का ज्ञान करेंगे; ऐसा दृण संकल्प हमारा है,
    हम अचल शांति दे जायेंगे; ऐसा दृण उद्देश्य हमारा है I

 

  1. कलयुग को कैसे दूर करें, कल्कि को कैसे लायें ,
    ताकि कलयुग बीता हुआ कल हो जाये ,
    पेट कलयुग का प्रतीक है ,
    पेटपूजा अच्छाई के लिए करें ,
    और अंध – उपभोक्तावाद ( Blind Consumerism) बंद करें तो कलयुग दूर हो जाएगा …!!!

 

  1. If you are cat then I am rat;

If I am cat then you are rat;

You are cat you are rat;

I am cat I am rat;

Who will bell the cat?

The rat on which symbol of rational mind Ganesha Ji will ride .

 

अब मै विभिन्न शब्द और उनके दिव्य अर्थ लिखता हूँ : –

 

  1. शिकागो का अर्थ होता है कौआ देखो ( कागभुशुण्डी ) – कागभुशुण्डी जी, गरुड़ जी से कह रहे  हैं

 

गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही॥

अर्थात हे गरुड जी , सुमेरु पर्वत भी उसके लिए धूल के कण के समान हो जाता है, जिसे श्री रामचंद्रजी ने एक बार कृपा करके देख लिया ।

 

इसका पता अभी चल रहा है की विवेकानंद ने शिकागो का अर्थ नहीं बताया, क्योंकि इस दिव्य अर्थ को पुनर्जन्म को सिद्ध करने और कल्कि अवतार के रहस्यों को उजागर करने हेतु अभी इस चमत्कारिक तरीके से बताया जाना था।

विवेकानंद की सोच को निम्न चौपाई से भलीभाँति समझा जा सकता है

 

बचन सुनत कपि मन मुसुकाना। भइ सहाय सारद मैं जाना॥

यह वचन सुनते ही हनुमान्‌जी मन में मुस्कुराए (और मन ही मन बोले कि) मैं जान गया, सरस्वतीजी (इसे ऐसी बुद्धि देने में) सहायक हुई हैं

 

शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन के संदर्भ मे अब हम समझ सकते है की विवेकानंद अपने मन मे मुस्करा रहे थे की , विश्व धर्म सम्मेलन शिकागो शहर मे आयोजित होने जा रहा है जिसका हिन्दू धर्म मेँ इतना दिव्य अर्थ है , अतः यह निश्चित है की सरस्वती जी सहायता कर रही हैं ।

 

मैंने शिकागो का यह अर्थ, आईआईटी दिल्ली की बिल्डिंग की तुलना सुमेरु पर्वत से करते हुये 1997 मे बताया था और इसी आधार पर अपने को विवेकानंद का पुनर्जन्म घोषित किया था। वस्तुतः ये अर्थ मुझे आध्यात्मिक शक्तियों ने दिव्य तरीके से समझाया था। जैसा की सब समझते है की शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन मे कोई दिव्य ईश्वरीय योजना और इच्छा थी। उसी दिव्य ईश्वरीय योजना और इच्छा का रहस्योद्घघाटन यहाँ पर किया गया है …


  1. संतोष कुमार त्रिपाठी : संतोष Santosh, the son of Trinity (of Brahma, Vishnu & Mahesh), भगवान का सबसे सुंदर, वर्तमान समय मे परम आवश्यक और वर्तमान समय मे सबसे उपयुक्त नाम …

 

राम ते अधिक राम के नामा ।  

भगवान का नाम भगवान से भी बड़ा है, क्योंकी भगवान ने अपने मनुष्य रूप मे केवल कुछ लोगों पर कृपा की है और मुक्ति दी है, परंतु भगवान के नाम से अनादिकाल से अनगिनत लोगों ने कृपा और मुक्ति पायी है ।

 

जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी॥

(शिवजी कहते हैं-) हे भवानी सुनो, जिनका नाम जपकर ज्ञानी (विवेकी) मनुष्य संसार (जन्म-मरण) के बंधन को काट डालते हैं ।

 

जासु नाम त्रय ताप नसावन। सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन॥

जिनका नाम तीनों तापों का नाश करने वाला है, वे ही प्रभु (भगवान्‌) मनुष्य रूप में प्रकट हुए हैं। हे रावण! हृदय में यह समझ लीजिए।

 

तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥

तब उन्होंने राम-नाम से अंकित अत्यंत सुंदर एवं मनोहर अँगूठी देखी।

 

चकित चितव मुदरी पहिचानी। हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥

अँगूठी को पहचानकर सीताजी आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगीं और हर्ष तथा विषाद से हृदय में अकुला उठीं ।

 

हिन्दू विचारधारा में , भगवान के सुंदर और दिव्य नाम के महत्व पर यहाँ और अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं है ।

 

  1. बड़े ( मेरा घर का नाम ) – जो बड़ा हो , भगवान के लिए सर्वथा उपयुक्त एक और नाम।

 सतीश कुमार त्रिपाठी ( मेरे जुड़वा भाई का नाम ) :

सतयुग के प्रतीक। सतयुग तभी आयेगा जब संतोष का पालन न केवल व्यक्तिगत तौर पर, बल्कि

सम्पूर्ण विश्व मे एक सार्वजनिक नीति के तहत सभी सरकारों द्वारा किया जाएगा। इसका ये मतलब कतई नहीं है की सभी विकाश कार्यों को रोक दें तथा धन और अर्थ – व्यवस्था के सिद्धांतों को तिलांजलि दे दें । लेकिन यदि हम सम्पूर्ण मानवता के लिए स्वर्णिम युग की अभिलाषा रखते हैं, तो केवल सार्थक और विचारपूर्ण विकाश कार्य ही करना चाहिए और अंध – उपभोक्तावाद को सरकारी नीति के तहत सम्पूर्ण विश्व मे बंद कर देना चाहिए ।

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाईं रिषि आसिष पाई

(समुद्र ने कहा)) हे नाथ! नील और नल दो वानर भाई हैं। उन्होंने लड़कपन में ऋषि से आशीर्वाद पाया था।

मेरा ननिहाल उड़ीशा राज्य के ऋषिगाँव नामक ग्राम में है ।

5.      देवगौड़ा – देवगौड़ा का अर्थ हिन्दी मे होता है, जिसने भगवान का कार्य बिगाड़ दिया हो । जिस समय मैंने यह अर्थ आईआईटी दिल्ली मे बताया था उस समय भारत के प्रधानमंत्री देवगौड़ा थे ।

6.      बाइबिल=बाइ + बिल   बाइबिल का अर्थ निकलता है जैसे चूहा किसी बिल को बाइ करके जा रहा हो । इसका अर्थ ये है की पश्चिम और क्रिश्चियानिटी विवेकशून्य हो रहे हैं , जो वर्तमान विश्व को विनाशकारी स्थिति मे ले जा रहा है …

7.      गुड फ्राइडे –  क्रिश्चियन्स के इस त्यौहार का अर्थ निकलता है की जैसे कोई चीज किसी अच्छे के लिए जल रही हो …

 इस संदर्भ मे विवेकानंद की सोच को निम्न चौपाई से भलीभाँति समझ सकते हैं

पावक जरत देखि हनुमंता। भयउ परम लघुरूप तुरंता॥

अग्नि को जलते हुए देखकर हनुमान्‌जी तुरंत ही बहुत छोटे रूप में हो गए

विवेकानंद के प्रसंग मे हम समझ सकते हैं की उन्होने गुड फ्राइडे का अर्थ नहीं बताया और अपने छोटे रूप में अर्थात मौन रहे। क्योंकि इसे अभी अन्य भविष्यवाणीयों के साथ जोड़कर , इस चमत्कारिक अंदाज मे बताया जाना था ।

  1. उड़ीशा उड़ीशा = उड़+ईशा अर्थात ईशा यहाँ  से  उड़ो . इसलिए मेरा ननिहाल उड़ीशा राज्य मे है ।
  2. नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयाँ नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयों में , एक भविष्यवाणी रोम के जलने की और एक अन्य भविष्यवाणी किसी एंटी क्राइस्ट के उदय की है । बाइबिल, गुड फ्राइडे और उड़ीशा के सटीक अर्थों के आधार पर मैं कहता हूँ की वैटिकन सिटी फ्राई हो रहा है अर्थात जल रहा है। स्पष्टतः नोस्त्रेदामस की रोम के जलने की भविष्यवाणी का निहितार्थ यही है।

इसे सुंदरकाण्ड की इस चौपाई से समझ सकते हैं …  

 

साधु अवग्या कर फल ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा॥

साधु की अवग्या का यह फल है कि नगर, अनाथ के नगर की तरह जल रहा है ।

 

विवेकानंद के प्रसंग मे हम समझ सकते हैं की “ पश्चिम ने साधु विवेकानंद की बात को पूर्णतया नहीं समझा और माना, अतः रोम या वैटिकन सिटी जल रहा है । अर्थात अभी दिये जा रहे इस ईश्वरीय संदेश से क्रिसचीयनों की आस्था क्रिश्चियानिटी से डगमगा रही है और वैटिकन सिटि इस दिव्य और चमत्कारिक संदेश की ज्वाला से जल रहा है । इन अर्थों से यह स्पष्ट है की नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयों का एंटी क्राइस्ट भी मैं हूँ । मेरे नाम में स्थित चन्द्र बिन्दु से स्पष्ट होता है की नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयों का चंद्रमा नामक भारतीय भी मैं हूँ । इसके अतिरिक्त मेरा संबंध तीन राज्यों उड़ीशा , उत्तर प्रदेश ( उत्तरों की भूमि ) और गुजरात ( = गुजर+रात अर्थात रात गुजर रही है )। इन तीन राज्यों से होते हुये भारत के नक्से पर अर्ध चन्द्र बनाया जा सकता है, इससे स्पष्ट होता है की वास्तव मे नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयों का चंद्रमा धरती पर आ चुका है ।

 

 यहाँ मैं पूर्णतः स्पष्ट कर देना चाहता हूँ की मै क्राइस्ट या क्रिसचीयनिटी के प्रति कोई द्वेष

अथवा घृणा भाव नहीं रखता। किसी भी अन्य बात से पूर्व, इससे क्राइस्ट के दैवत्व और भगवत इच्छा से ही क्रिसचीयनिटी की उत्पत्ति की पुष्टि होती है । यह केवल नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणीयों के निहितार्थ और ईश्वरीय इच्छा का द्योतक है ।

 

 हिलेरी – हिलेरी = हिले+री का अर्थ हुआ जो डर से काँप या हिल रही हो। हिलेरी क्लिंटन  उस समय अमेरिका की प्रथम महिला थीं, जब मैंने इसका अर्थ 1997 में आईआईटी दिल्ली में बताया था ।

इसे निम्न चौपाई से समझ सकते हैं।

दूतिन्ह सुन पुरबासिन्ह बानी, मंदोदरी अधिक अकुलानी

दूतियों से नगरवासियों के वचन सुनकर मंदोदरी बहुत ही व्याकुल हो गई ।

इस अर्थ के आधार मैंने ये सिद्ध किया की अमेरिका आधुनिक युग की लंका है ।

 

  1. मार्क टूली – जब मै आईआईटी दिल्ली के एक सेमिनार जिसमे बीबीसी के प्रसिद्ध संवाददाता मार्क टूली वक्ता थे को सुन रहा था , तो उन्होने कहा की हिन्दू माइथोलोजी बहुत महान है ।

मुझे बाद मे मार्क टूली शब्द का भी दिव्य अर्थ अनुभूत हुआ । मार्क टूली का अर्थ हुआ जिसने किसी चीज को अच्छे से मार्क किया अर्थात  समझा हो ।

 

  1. कल्कि – कल्कि = कल+ की , अर्थात जो कलयुग को  कल  की  , अर्थात बीता हुआ कल  कर दे…

कलयुग  आता  है तो कल्कि आता है और वह कलयुग को कल – की ( अर्थात बीता हुआ कल ) कर देता है।  इसीलिए आने वाले अवतार को पुराणो में कल्कि नाम दिया गया है।

 

  1. संजय रॉय- संजय रॉय से संजय रे’ज का आभास होता है । मैंने इस आधार पर कहा की प्रकाश की विद्युत चुंबकीय तरंगे ही कल्कि की तलवार है । उस समय मै , फ़ाईनाइट एलीमेंट एनालिसिस के उपयोग द्वारा विद्युत –चुंबकत्व पर यम टेक प्रोजेक्ट कर रहा था, और प्रोफेसर संजय रॉय मेरे गाइड थे ।

रामचरितमानस की एक अन्य चौपाई द्वारा भी हम समझ सकते है की, संतोष को वास्तव में तलवार धारी कल्कि अवतार मान सकते हैं

ईस भजन सारथी सुजाना, बिरति चर्म संतोष कृपाना।

 

  1. राधिका राधिका , मेरी पत्नी का नाम – बचपन मे पढ़ी गयी एक हास्य कविता और उसके दिव्य अर्थ से मुझे अनुभूति हुई की कल्कि का घोडा उसकी पत्नी है।

झाँसा दे जाती थी सबको ऐसी थी झाँसी की रानी, अकसर वह अशोक के होटल में खाया करती थी बिरयानी।

झाँसी की रानी – लक्ष्मीबाई – बाई लक्ष्मी , अर्थात लक्ष्मी द्वारा । इससे यह सिद्ध होता है की कल्कि का घोडा उसकी पत्नी है।

 

  1. हँड़िया, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश मेरी पत्नी का मूल स्थान । हँडिया का अर्थ मिट्टी का घड़ा होता है । सीता जी का भी जन्म मिट्टी के घड़े से हुआ था ।


16.  अश्वथामा – अश्वथामा चिरंजीवी हैं क्योंकि कल्कि को अश्वथामा = अश्व+थामा अर्थात घोड़े  पर आना है। इस अर्थ की अनुभूति मुझे एनएचपीसी लिमिटेड फ़रीदाबाद मे उस समय हुई जब मैंने पाया की मेरे एक सहकर्मी का नाम अश्वथामा है। इस आधार पर मैंने पुनः अपने को विवेकानंद का पुनर्जन्म बोलना शुरू कर दिया ।

 

  1. काबा काबा = का + बा अर्थात क्या है । मुस्लिमों के पवित्र स्थान का नाम एक प्रश्न पूछता है और इशारा भी करता है की वस्तुतः वहाँ एक शिवलिंग ही है ।

 

18.  अमेरीकन महिला भविष्यवक्ता जीन डिक्सन  की  भविष्यवाणी –  अमेरीकन महिला भविष्यवक्ता जीन डिक्सन ने भारत में गांधी जैसे एक व्यक्तित्व के जन्म की भविष्यवाणी की है – मै कहता हूँ की जीन डिक्सन की भविष्यवाणी का गांधी भी मै हूँ । जब मैं अपनी पहली नौकरी ज्वाइन करने के लिए वर्ष 1993 में ज्योति लिमिटेड, बड़ौदा  जा रहा था, तो मै फैज़ाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए गया। उसी समय एक साधू मेरे पास आए और पूछा क्या यहाँ से बरेली के लिए कोई ट्रेन जाती है। मैंने कहा की संभवतः जाती तो है पर आप रेलवे इन्क्वायरी से पूछ लें । फिर भी वो साधू मुझसे पूछता रहा और मैं नाराज भी हो गया । बाद मे मुझे उनकी सांकेतिक बातों के अर्थ की अनुभूति हुई । वे साधू कह रहे थे, बड़े ज्योति लिमिटेड ज्वाइन करने के लिए रेल से बड़ौदा जा रहे हैं। वो भी रेल जिसका नाम साबरमती एक्सप्रेस था ।

 दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।  

 

इसके अतिरिक्त मेरे जन्म के समय मेरे बड़े भाई ने टिप्पणी की थी कि मेरा सिर गांधी बाबा की तरह बड़ा है। अब आप समझ सकते है की अमेरीकन भविष्यवक्ता कहती हैं की  भारत में गांधी का जन्म हुआ है और मेरे बारे मे भारत मे कोई कहता है की , मेरा सिर गांधी जैसा है ।

 

  1. नरेंद्र मोदी – नरेंद्र मोदी का नाम विवेकानंद का पूर्व नाम है । मोदी का अर्थ मैन ऑफ डेवलपिंग इंडिया या मैन ऑफ डिवाइन इंडिया । लघु नाम नमो । और नरेंद्र मोदी गुजरात (गुजर+रात अर्थात रात गुजर रही है) से हैं। इससे सिद्ध है की नरेंद्र मोदी भी कल्कि अवतार की कार्ययोजना का हिस्सा हैं और उन हजारों विवेकानंद में से एक हैं, जिसकी बात कही गयी है।

वर्तमान युग के धर्मयुद्ध मे नरेंद्र मोदी की तुलना महाभारत के अर्जुन से कर सकते हैं , जैसा की मेरे ट्वीटर @Santosh_NHPC और फ़ेसबुक के बैनर से परिलक्षित होता है ।

 

20.          सत्य साई बाबा ने भी अपने चमत्कारिक अंदाज़ में मेरी बात का समर्थन किया था – वर्ष 2003 के अक्टूबर अथवा नवम्बर महीने ( सही तारीख मुझे याद नहीं परंतु यह बात 27 अक्टूबर 2003 और 15 नवम्बर 2003 के बीच की है) मे एक टीवी न्यूज़ तत्कालीन स्टार न्यूज़( अब एबीपी न्यूज़ ) पर आई थी । उस न्यूज़ मे जिसमे सत्य साई बाबा की विडियो क्लिप भी थी , जिसमें साई बाबा की एक महिला भक्त ने कहा की “It is absolutely fascinating to accept him as God “.  अर्थात  “ यह अत्यंत ही चित्ताकर्षक और मनोहारी होगा की उन्हे भगवान मान लिया जाए ”

उस महिला भक्त ने यह भी बोला था की वो पेशे से एक डॉक्टर हैं और साई बाबा उन्हे कभी कभी पशु- पक्षी के रूप में दर्शन देते हैं। वर्ष 2003 मे साई बाबा के बहुत से भक्त उन्हे भगवान मानते थे और इस बात को टीवी पर उनके लिए बोलने का कोई औचित्य ही नहीं था । टीवी न्यूज़ से स्पष्ट था की वह न्यूज़ मेरे लिए थी और साई बाबा द्वारा समर्थित थी । मैं वह न्यूज़ देख पाया ये खुद अपने आप मे साई बाबा का एक चमत्कार और कृपा थी, अन्यथा कोई कारण नहीं था की मै वह टीवी न्यूज़ देख पाता। मै वह टीवी न्यूज़ प्राप्त करना चाहता हूँ और आशा करता हूँ की ये साई बाबा संस्थान या कहीं अन्य उपलब्ध होगी ।

 

21.  लाल कृष्ण अडवानी जी का वक्तव्य – उसी दिन , लाल कृष्ण अडवानी जी का भी एक वक्तव्य टीवी पर आया था, जिसमें उन्होने कहा की “ जिस  देश में ऐसे – ऐसे लोग हों वो पीछे क्यों रहे… ‘’। इस बात की पुष्टि आडवाणी जी से ले सकते हैं । उक्त समाचार या तो आज तक या स्टार न्यूज़ पर आया था । मै ऐसा मानता और जानता हूँ की उक्त वक्तव्य मेरे लिए था । मै समझता हूँ की मेरी बातें किसी तरह से आडवाणी जी तक भी पहुंची होंगी , इसीलिए ऐसा वक्तव्य आया था । मै इन तथ्यों के साथ पुनः इस बात को बोल रहा हूँ जिससे दुनिया साई बाबा, राम कृष्ण परमहंस और विवेकानंद की महिमा से परिचित हो सके तथा इस दिव्य चमत्कार और उससे भी ज्यादा आवश्यक इस महत्वपूर्ण ईश्वरीय संदेश को प्राप्त कर सके , जिससे दुनिया का भला हो …


 

      विवेकानंद ने स्वंय अपने पुनरागमन की बात कही है और ऐसा भी कहा है की समय आने पर हजारों विवेकानंद खड़े होंगे । मै जो विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ वह परम दृश्यमान सत्यों पर आधारित है और इस विचार में हजारों विवेकानंदों को जागृत करने की पूर्ण क्षमता है। इस बात में वह पूर्ण शक्ति है, जो  धरती की रक्षा कर सके और सम्पूर्ण मानवता के लिए स्वर्णिम युग का सूत्रपात कर सके ।

वस्तुतः यह भगवान द्वारा मानव जाति और धरती की विनाश से रक्षा और  मानवता को दिव्यता की तरफ ले जाने का एक स्पष्ट प्रयास है। मैं ईश्वर के हाथों का एक यंत्र मात्र हूँ और आशा करता हूँ की, मैं जो कहना चाह रहा हूँ मानवता उसे समझ सकेगी और क्रमिक रूप से सम्पूर्ण मानवता के लिए स्वर्णिम युग के आविर्भाव के लक्ष्य में सहयोग करेगी ।

 

      मेरे जीवन मे ऐसी कई घटनाएँ है जब दिव्य संत मेरे पास प्रकट हुये और अत्यंत अर्थपूर्ण बातें कहीं । ये बातें मैं बता सकता हूँ , यदि कोई मुझसे बात करे , मेरी इन बातों पर विश्वास करे और इस लक्ष्य मे सहयोग करे । ऐसे और भी कई अनुभव हैं जो मेरी इस बात की महानता को और भी उत्कृष्ट बनाते हैं, जिन्हे मै उचित अवसर और मंच मिलने पर बोल सकता हूँ ।

 

      यदि हम उपरोक्त बातों को सही परिप्रेक्ष मे समझें तो विवेकानंद अभी भी बोलते हुये और ऐसा कहते हुये प्रतीत होंगे की “ ेरा प्यार वो है कि मर के भी तुमको जुदा अपनी बाहों से होने न देगा …

 

      ऐसा कहते हैं की कुछ ऐसा था जो विवेकानंद किसी को नहीं बताते थे । उपरोक्त में वही बात है जिसे अभी इस दिव्य और चमत्कारिक अंदाज़ में बताया जा रहा है ।

 

      पहली बार एक पुनर्जन्म और अवतार हुआ है, जिसे लिखित मे मनोवैज्ञानिक कार्ल गुस्ताव जंग के सिंक्रोनिसिटी ( Synchronicity ) की अवधारणा के आधार पर सिद्ध किया जा सकता है। उपरोक्त सिंक्रोनिसिटी की सबसे बड़ी घटना और उदाहरण है। यह भगवान के अस्तित्व और उनके दुनिया को सही दिशा देने के प्रयास का प्रमाण है । सिंक्रोनिसिटी की अवधारणा जंग द्वारा दिया गया अनुसंधान का एक स्थापित विषय है ।

      वे घटनाएँ जिनमे कोई  अर्थपूर्ण संयोग हो, परंतु कोई कार्य-कारण संबंध न हो उन्हे सिंक्रोनिसिटी कहते हैं । जंग ने सिंक्रोनिसिटी को बिना कार्य-कारण संबंध के घटनाओं के आपसी जुड़ाव और अर्थपूर्ण संयोग के रूप मे परिभाषित किया है। (स्रोत: विकीपीडिया )

 

      यह दुनिया के हित मे है की वह मुझे विवेकानंद का पुनर्जन्म ( जो की मैं हूँ … ) और कल्कि अवतार मान ले और मेरी इस बात को मूर्त रूप दे । जिससे यह बात अधिकाधिक लोगों तक पहुँच सके और वे इसे स्वीकार कर सकें , जिससे आध्यात्मिकता को बढ़ावा मिले । क्योंकि विभिन्न भविष्यवाणीयों के द्वारा प्रमाणित और धर्मसंगत आध्यात्मिकता से ही इस दुनिया को वर्तमान विनाशकारी परिस्थितियों से बचाया जा सकता है और  इसी से भारत और सम्पूर्ण विश्व के लिये स्वर्णिम युग का आविर्भाव हो सकता है …


      इस सिद्धांत के आधार पर हम समझ सकते हैं की साई बाबा , राम कृष्ण परमहंस और विवेकानंद आदि स्वयं में कल्कि अवतार हैं , अर्थात गीता मेँ कृष्ण भगवान के विश्व रूप की तरह , कल्कि अवतार के विश्व रूप के एक अंग के रूप में । वास्तव मे कल्कि अवतार के विश्व रूप में वे सभी सजीव अथवा निर्जीव चीजें सम्मिलित हैं जिनका वर्णन यहां किया गया है ।

      मै जो बोल रहा हूँ वह गहन आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है, जो निश्चित रूप से ध्यान

देने और मूल्यांकन करने योग्य है । इसे सभी लोगों के कल्याण के लिए , दुनिया के सामने लाना भी आवश्यक है।

      मै इसे लिख और संप्रेषित कर रहा हूँ , जिससे इस दिव्य चमत्कारिक घटना पर बृहद रूप से चर्चा हो , क्योंकि इसका सम्पूर्ण विश्व के लिए बहुत महत्व है और इसीलिए मैं इसे व्यक्तिगत नही रख सकता । मैं समझता हूँ की अब समय आ गया है की, मैं इसे प्रभावशाली तरीके से पुनः कहूँ और इस महान कार्य के लिए प्रयास करूँ …

 भगवान के तरीके अद्वितीय , असाधारण और मानव मस्तिष्क की समझ से परे हैं , केवल इस पर अपनी और सभी की भलाई के लिये विश्वास करने की जरूरत है ।  

2 Responses to “हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रकट होहिं मैं जाना”

  1. S K TRipathi

    विवेकानंद के कल्कि अवतार के रूप में पुनर्जन्म की, मानो न मानो मगर सच जैसी, सच्ची घटना पर उपरोक्त आलेख का नवीनतम संस्करण , जिसमें और स्पष्टता हेतु अनुभवों को भी लिखा गया है , हिन्दी और इंग्लिश में यहाँ उपलब्ध है http://www.slideshare.net/sktripathinhpc/reincarnation-of-vivekanand-and-kalki-avatar-with-experiences-in-english-50043501 & http://www.slideshare.net/sktripathinhpc/ss-50043594

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *