हिंदी गजल -तेरे दिल को पहले ही निकल रख रक्खा है

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ख्याल तुम्हारा हर तरह से रख रक्खा है |
दिल भी तुम्हारा सभांल रख रक्खा है ||

हुआ नहीं मै कभी अलग तुमसे |
खुद को भी सभांल रख रक्खा है ||

नहीं किया शक कभी तुम पर मैंने |
अपने ऊपर ही शक रख रक्खा है ||

तेरे प्यार की निशानी में मिला जो था |
अभी तक रुमाल सभांल रख रक्खा है ||

तुझे मरने कभी न दूंगा आखरी बख्त तक |
तेरे दिल को पहले ही निकाल रख रक्खा है ||

तुझे ढूढने की जरूरत नहीं पड़ेगी मुझको |
तेरा पहले ही मैंने ख्याल रख रक्खा है ||

जबाब दे दिया है तेरे हर सवालों का मैंने |
दिल में अब नहीं कोई सवाल रख रक्खा है ||

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम (हरियाणा) 

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

2 COMMENTS

  1. प्रवक्ता के स्तर की गजल नही है । कृपया ध्यान रखें

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