हिंदी गजल -तेरे दिल को पहले ही निकल रख रक्खा है

ख्याल तुम्हारा हर तरह से रख रक्खा है |
दिल भी तुम्हारा सभांल रख रक्खा है ||

हुआ नहीं मै कभी अलग तुमसे |
खुद को भी सभांल रख रक्खा है ||

नहीं किया शक कभी तुम पर मैंने |
अपने ऊपर ही शक रख रक्खा है ||

तेरे प्यार की निशानी में मिला जो था |
अभी तक रुमाल सभांल रख रक्खा है ||

तुझे मरने कभी न दूंगा आखरी बख्त तक |
तेरे दिल को पहले ही निकाल रख रक्खा है ||

तुझे ढूढने की जरूरत नहीं पड़ेगी मुझको |
तेरा पहले ही मैंने ख्याल रख रक्खा है ||

जबाब दे दिया है तेरे हर सवालों का मैंने |
दिल में अब नहीं कोई सवाल रख रक्खा है ||

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम (हरियाणा) 

2 thoughts on “हिंदी गजल -तेरे दिल को पहले ही निकल रख रक्खा है

  1. प्रवक्ता के स्तर की गजल नही है । कृपया ध्यान रखें

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