लेखक परिचय

कुमार सुशांत

कुमार सुशांत

भागलपुर, बिहार से शिक्षा-दीक्षा, दिल्ली में MASSCO MEDIA INSTITUTE से जर्नलिज्म, CNEB न्यूज़ चैनल में बतौर पत्रकार करियर की शुरुआत, बाद में चौथी दुनिया (दिल्ली), कैनविज टाइम्स, श्री टाइम्स के उत्तर प्रदेश संस्करण में कार्य का अनुभव हासिल किया। वर्तमान में सिटी टाइम्स (दैनिक) के दिल्ली एडिशन में स्थानीय संपादक हैं और प्रवक्ता.कॉम में सलाहकार-सम्पादक हैं.

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बीते 11 मार्च को चुनाव परिणाम के साथ ही एक बार फिर राजनीति के ऐसे अजग-गजब रंग उभरने लगे जैसे वो सचमुच परिणाम से पहले एक अलग रंग की तरह चढ़ा और परिणाम के बाद उतर गया हो। होली के राजनीतिक रंग को और परवान चढ़ाने के लिए प्रवक्ता डॉट कॉम आपके सामने चुनावी रंग के एक दिन पहले से लेकर परिणाम के बाद तक के रंग की पांच परिस्थितियां प्रस्तुत कर रहा हैः

प्रवक्ता डॉट कॉम की संपादकीय टीम पांच राज्यों के चुनावी विश्लेषण पर चर्चा कर रहा है तो अचानक फोन बजती है और एक हमारे शुभचिंतक ये स्पष्ट करने की कोशिश करते हैं उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रशात किशोर एंड कंपनी ने कोई भूमिका नहीं निभाई, दरअसल वो तो पंजाब चुनाव में कांग्रेस के लिए वो भूमिका निभा रहे थे। ज़रा सोचिए। गलती उन महानुभाव की नहीं है, उन्हें जानकारी कहीं और से मिली। वो प्रवक्ता को जानकारी दे रहे थे। लेकिन सवाल है कि ऐसी जानकारी कोई तो फैला रहा होगा और उन तक दिया होगा कि ताकि प्रशात किशोर एंड कंपनी का अस्त होने से बचाया जा सके। चलिए प्रवक्ता डॉट कॉम होली की मस्ती के बीच प्रशांत किशोर एंड कंपनी को चुनाव का काम छोड़कर अब कुछ और काम करने की देता है सलाह और कहता है बुरा न मानो होली है।

खैर, दूसरा प्रकरण दिखा कि कई सारे ज्योतिषाचार्य जो सोशल मीडिया और टीवी न्यूज़ चैनलों पर अपने आप को भविष्यवक्ता के रूप में स्थापित किया करते थे। जो ये कहते दिखते थे कि समाजवादी-कांग्रेस की सरकार यूपी में बन रही है, उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बन रही है। 11 मार्च को चुनाव परिणाम के साथ ही उनके सोशल मीडिया वॉल से वो पोस्ट ही गायब दिखे। अब उनके पोस्ट पर केसरिया रंग चढ़े हुए थे। जय हो। चलिए प्रवक्ता डॉट कॉम होली की मस्ती के बीच ये घोषणा करता है कि जो भी उन पोस्ट का स्नैप ढूंढ़कर संग्रह लाएगा, उन्हें मिलेगा बंपर इनाम, क्योंकि बुरा न मानो होली है।

यही नहीं, जो बीबीसी (हिन्दी) जैसी प्रतिष्ठित वेबसाइट भाजपा पर विश्लेषण किया करती थी, वो आज चुनाव नतीजों के मायने को स्पष्ट कर रहे हैं। लेकिन हां वे राजदीप सारदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकार के कुतर्कों को भी प्रकाशित करने से बाज नहीं आ रहे, जो कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सपनों के सौदागर हैं, वे रोड शो भी करना जानते हैं और सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराकर चुनाव जीत जाते हैं। लेकिन वहीं राजदीप बाबू को एक न्यूज़-रूम में मिठाई खिलाते भी दिखाया गया और हंसी मज़ाक में कहा गया कि घर वापसी की खुशी में मुंह मिठा करा रहे हैं। और ये कोई और नहीं बल्कि उनके सामने काफी जूनियर रहे एक पत्रकार भाई ने ही मिठाई खिलाते कह दिया। ज्यादा कुछ इस पर नहीं कहना, जवाब मिठाई के साथ ही राजदीप को उनके काफी जूनियर ने दे दिया। चलिए राजदीप जी, कोई बात नहीं बुरा न मानो होली है।

यही नहीं, कई सारे पत्रकार बंधु, बौद्धिक लोग, श्रेष्ठ वक्तागण जो अपना ज्ञान फेसबुक-ट्विटर पर बहा रहे थे, चुनाव परिणाम के बाद ही ज्ञान कहां-कहां बहा था, वो उसे साफ करने में जुट गए, क्योंकि परिणाम के साथ ही उन पर न्यूटन का तीसरा नियम लग चुनाव था। बहरहाल, सबने अपने रंग को छुड़ाकर केसरिया रंग चढ़ाने का फैसला कर लिया। चलिए, बुरा न मानो होली है।

यही नहीं, दिल्ली के भाजपा केंद्रीय कार्यालय में भी जश्न मन रहे डांस के रंग में ऐसे-ऐसे लोग भी शामिल होने लगे जो भाजपा और प्रधानमंत्री को 10 तारीख की रात्रि तक कोसते दिखे और कहते दिखे कि 11 तारीख को देख लेना। यही नहीं, जो लोग यूपी, उत्तराखंड में कांग्रेस को जीता रहे थे, वे 11 को परिणाम के साथ ही बधाई देते भी दिखे। चलिए बुरा न मानो होली है।

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