२७ बार रक्तदान कर आदर्श उपस्थित करने वाले आदर्श व्यक्ति-“आर्यसमाज धामावाला- डा. विनीत कुमार”

मनमोहन कुमार आर्य,
आर्यसमाज धामावाला-देहरादून ऋषि दयानन्द के कर कमलों से स्थापित आर्यसमाज है। विश्व में किसी मुस्लिम बन्धु की उसके पूरे परिवार सहित पहली शुद्धि ऋषि दयानन्द जी ने इसी आर्यसमाज में की थी और उसका नाम अलखधारी रखा था। आर्यसमाज धामावाला से अतीत में अनेक प्रसिद्ध विद्वान व नेता जुड़े रहे हैं जिन्होंने आर्यसमाज की प्रशंसनीय सेवा की है। हमने समाज मन्दिर धामवाला में वेदों के विख्यात विद्वान पं. विश्वनाथ विद्यालंकार विद्यामार्तण्ड जी को देखा है। वह यदा कदा आर्यसमाज धामावाला देहरादून के सत्संगों में आया करते थे। उनके प्रवचनों को सुनने का भी हमें सौभाग्य मिला है। इन पंक्तियों को लिखते हुए हमें उनके कुछ शब्द याद आ रहे हैं। एक बार उन्होंने प्रवचन में कहा था कि मैं प्रातः दूध लेने जाता हूं। दूध की दुकान पर कई प्रकार का दूध मिलता है। उनकी प्रति लिटर दरें अलग अलग होती हैं। इसका अर्थ होता है कि सभी प्रकार के दूध शुद्धता में एक समान नहीं है। उन्होंने कहा था आज हमें स्वस्थ रहने के लिए दुग्धादि पदार्थों को बड़े सोच विचार कर लेना चाहिये और कम मात्रा में ही सही, शुद्ध पदार्थों का सेवन करना चाहिये। पं. विश्वनाथ विद्यालंकार जी ने 103 वर्ष की आयु प्राप्त की और देहरादून में ही उनका देहावसान हुआ था। उनकी पुत्री आज भी कांवली रोड, देहरादून उसी भवन में रहती हैं। हमें यहां कई बार पंडित जी से मिलकर उनके विचार सुनने का अवसर मिला है। एक बार पंडित जी के निवास पर हुए चतुर्वेद पारायण यज्ञ में भी हम सम्मिलित हुए थे जो उन्होंने आयु के 100 वर्ष पूरे होने पर पं. रुद्रदत्त शास्त्री जी के पौरोहित्य में कराया था। पं. विश्वनाथ जी ने उच्च कोटि के अनेक वैदिक ग्रन्थ लिखे हैं। हमारा सौभाग्य है कि प्रायः सभी ग्रन्थ हमारे पास हैं व हमें उन्हें पढ़ने का अवसर भी मिला है। आचार्य ब्रह्स्पति शास्त्री भी आर्यसमाज धामावाला देहरादून से जुड़े रहे। वह किसी गुरुकुल, शायद गुरुकुल वृन्दावन के कुलपति रहे। हमें उनके भी दर्शन करने व प्रवचन सुनने आदि का सौभाग्य मिला है। आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तर प्रदेश के यशस्वी प्रधान व मंत्री रहे श्री धर्मेन्द्र सिंह आर्य से भी हमारी काफी निकटता रही। देहरादून में रहते हुए हम तपोवन आश्रम के धर्माचार्य महात्मा दयानन्द वानप्रस्थी जी के भी प्रायः दर्शन किया करते थे और उनके उपदेशों का श्रवण किया करते थे। आर्यसमाज धामावाला देहरादून के सत्संगों में हमने स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती, स्वामी अमर स्वामी सरस्वती, स्वामी डा. सत्यप्रकाश जी, स्वामी मुनीश्वरानन्द सरस्वती, स्वामी सत्यपति जी, शास्त्रार्थ महारथी पं. ओम् प्रकाश शास्त्री – खतौली, डा. भवानीलाल भारतीय, पं. प्रकाशवीर शास्त्री, लाला राम गोपाल शालवाले, आर्यनेता श्री ओम्प्रकाश त्यागी आदि को सुनने का अवसर भी मिला है।

आज का लेख हम आर्यसमाज धामावाला के यशस्वी सदस्य डा. विनीत कुमार जी पर लिख रहे हैं। आपकी इस समय आयु 48 वर्ष है। आप देहरादून के विश्व प्रसिद्ध संस्थान, भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, के रसायन विभाग में विभागाध्यक्ष हैं। अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वाह के लिए आपने अनेक देशों की यात्रायें की हैं। आपने अनेक अवसरों पर रक्तदान भी किया करते हैं। अब तक आप कुल मिलाकर 27 बार रक्तदान कर चुके हैं। आपको स्वेच्छा से रक्तदान के लिए विश्व रक्त दान दिवस 14 जून, 2016 पर उत्तराखण्ड के ब्लड बैंक की ओर से सम्मानित भी किया गया है। आपने 27 बार रक्तदान कर कुल 9.450 लिटर रक्त का दान किया है। यह भी बता दें कि एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में 4.5 से 5.5 लिटर रक्त होता है। इस प्रकार आप अपने शरीर का दो स्वस्थ शरीरों जितना रक्त दान कर चुके हैं। हम व सभी आर्यसमाज के ऋषि भक्त लोग आपके इस परोपकार के कार्य के लिए आप पर गर्व करते हैं। आपने जो रक्त दान किया है उससे अनेक रोगियों के प्राणों की रक्षा हुई होगी, ऐसा हम अनुभव करते हैं।

डा. विनीत कुमार जी बहुत ही सज्जन प्रकृति के मितभाषी एवं विनम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप नियमित रुप से विगत कई दशकों से आर्यसमाज में आ रहे हैं। हमें नहीं पता कि आर्यसमाज के अधिकारियों को उनके व्यक्तित्व, सरल व्यवहार व उनके सरकारी पद आदि के बारे में कोई जानकारी है। आज हमें यह भी ज्ञात हुआ कि आपकी सुपुत्री ने आईसीएसई की कक्षा दस की परीक्षा में उत्तराखण्ड में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। यह समाचार भी आर्यसमाज के लिए गौरव की बात है।

डा. विनीत कुमार जी ने कुछ समय पूर्व हमें बताया था कि वह अग्निहोत्र यज्ञ पर विज्ञान की दृष्टि से एक पुस्तक लिखने का विचार कर रहे हैं। हमने भी इस कार्य में उन्हें अपने पास उपलब्ध पुस्तकें प्रदान कर सहयोग का वचन दिया है। अनेक वर्षो से डा. विनीत जी हमसे इमेल और व्हाट्सएप पर जुड़े हुए हैं। हम उन्हें नियमित रुप से लेख भेजते हैं और उसे वह पढ़ते भी हैं।

हमें डा. विनीत कुमार आर्यसमाज के गौरव प्रतीत होते हैं। हम उनकी ऋषि भक्ति और आर्यसमाज के प्रति निष्ठा व भावना को हृदय से नमन करते हैं। इस अवसर पर हम डा. विनीत कुमार जी को सुखी, स्वस्थ, सफल व कैरियर में और अधिक उन्नति के लिए शुभकामनायें देते हैं।

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