साक्षरता अभियान अंगिका में

—विनय कुमार विनायक
सुनॅ हे भइया! सुनॅ बहिनियाँ!
सुनॅ मजदूर किसानवाँना,
घर आंगन के स्वर्ग बनावैलॅ
तोहरॅ द्वार खड़ा छीं हम्मे याचक बनी
राष्ट्र निर्माता गुरु पाहुँनवांना!

भेजॅ तो आपनो मुनिया-सुगनवाँ
गुरुकुल-आश्रम आरु शिक्षा भवनवाँ में
अंधियारी कॅ कोहरा छांटी के लौटतौं
तोहरॅ ललनवां पहनी कॅ विद्या गहनवांना!

सुनॅ हे दशरथ! सुनॅ कौशल्या!
सुनॅ केकई! सुनॅ सुमित्रा बहिनियाँना
आपन देश बा में रामराज्य लावैलॅ
तोहरॅ द्वार खड़ा छीं हम्मे याचक बनी
विश्वामित्र रंग के गुरु पाहुँनवांना!

भेजॅ तों हमरो संग आपन संतनवां
गांव के विद्यापीठ-यज्ञ स्थलवां में
संकटा-ताड़का संहारी के लौटतौं
तोहरॅ ललनवां बनी कॅ राम-लक्ष्मणवांना!

सुनॅ ऋषि-मुनि पुत्तर! मांझी,महतो,मड़र जी!
सुनॅ संत संताल-पहाड़िया भैया!
गंगोता,कादर,मुसहर,मेहतर भाय जी!
मानव, मानव के एक बनावैलॅ
तोहरॅ द्वार खड़ा छीं हम्मे पंच बनी
सामाजिक न्यायॅ के साक्षरता मिशनवांना!

भेजॅ अर्जुन, करण, बनवासी एकलव्य के
बूढ़ा बरगद तरे विद्या निकेतनवां में
गारंटी छै करण के कानों कॅ कुंडल के
आरु एकलव्य कॅ अंगूठवा के
अर्जुन जैसन ड्रेस पहिनि कॅ
तीनों लगतैय एक मायी के बेटवाना!

सुनॅ मिसर जी,कुम्बर जी, सुनो बाबूभईय्या रायजी!
इंसान के खालिस इंसान बनावैलॅ
तोहरॅ द्वार पर खड़ा छीं हम्मे व्रतवीर बनी
राष्ट्रपिता गांधी के पूरा करै लेली सपनवांना!

भेजॅ तो हमरो संग अपनॅ करेजा के टुकड़ा
जनतंत्र के सरकारी स्कूल भवनवां में
जात-धरम के बंधन तोड़ी कॅ बनतै हर बचवा
आजाद, भगत, अशफ़ाकउल्ला, बिरसा जेन्हों महनवांना!

सुनॅ पातर जी,पाड़े जी,पंडी जी, याचक भाई!
हरवाहा, चरवाहा, बाल मजदूर, धनरोपनी माई!
हर बचवा के बचपन लौटावैलॅ!
बाल मजदूरी से बचाबैलॅ!
सभैकॅ शिक्षा अधिकार दिलावैलॅ!
तोहरॅ द्वार पर आईलो छीं हम्मे मास्टर बनी
संदीपनी गुरु नियर आश्रमुवां सें!

भेजॅ तों हमरो संग कमाउ बचवा कॅ काम छुड़ाय कॅ
गांव के पाठशाला आरू शिक्षा केंद्रवांमा
पेटभर भात,देहभर कपड़ा, बक्सा भरी किताब लैय
तोहरॅ मुन्ना-मुनिया भेद मिटैतौं जी
अमीरी गरीबी कॅ; बनीकॅ कृष्ण सुदमुवांना!
—विनय कुमार विनायक

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