• श्याम सुंदर भाटिया

नई शिक्षा नीति, एक्सेस-सब तक पहुंच, इक्विटी-भागीदारी, क्वालिटी-गुणवत्ता, अफ़ोर्डेबिलिटी- किफ़ायत और अकॉउंटेबिलिटी- जवाबदेही सरीखे इन पांच महत्वपूर्ण स्तम्भों पर टिकी है। 34 बरसों के बाद देश के शिक्षा बंदोबस्त में आमूल-चूल बदलाव हुए हैं। उच्च शिक्षा को नई ऊंचाई मिली है तो स्कूली शिक्षा की सूरत ही बदल गई है। एनईपी में हायर एजुकेशन को दुनिया के बाजार और जरुरतों के मुताबिक ढाला गया है। यदि यह कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए, हिंदुस्तान की एजुकेशन प्रणाली में नए युग का आगाज़ हुआ है। यूजी से लेकर शोधकर्ताओं को सिलेबस  में ऐसे फ्रेम किया गया है, किसी के हाथ भी खाली नहीं रहेंगे। नई शिक्षा नीति में युवाओं को उड़ने के लिए नए पंखों का पुख्ता बंदोबस्त है। नई शिक्षा नीति को लेकर मोदी सरकार 2015 से ही संजीदा रही है।  अब अंततः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसरो के पूर्व प्रमुख एवं पदमभूषण डॉ. के कस्तूरीरंजन की अगुआई में गठित कमेटी की रिपोर्ट पर अपनी मोहर लगा दी है। इस शिक्षा नीति के लिए कितने बड़े स्तर पर रायशुमारी की गई, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। कमेटी ने 2.5 लाख ग्राम पंचायतों 6,600 ब्लॉक्स और 676 जिलों के लोगों से सलाह ली गई। देश में मौजूदा शिक्षा नीति को 1986 में तैयार किया गया। 1992 में उसमें एक बार सुधार हुआ। नई नीति का मकसद समग्र शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके तहत 2035 तक उच्च शिक्षा में पंजीकरण 28.3% से बढ़ाकर 50% पहुँचाने का लक्ष्य है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी। वहीं स्कूल में बोर्ड परीक्षा साल में एक की जगह सेमेस्टर या दो बार हो सकती है। इसके लिए अलग नीति बनेगी।   

नई शिक्षा नीति की विशेषताएं ये हैं, अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। एमफिल कोर्सेज समाप्त होंगे। लीगल और मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का संचालन सिंगिल रेग्गुलेटर के जरिए होगा। पांचवीं तक पढ़ाई होम लैंग्वेज, मातृ भाषा या स्थानीय भाषा माध्यम से होगी। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम होंगे। कक्षा छह के बाद से ही वोकेशनल एजुकेशन की शुरुआत होगी। सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के लिए एक ही तरह के मापदंड होंगे। बोर्ड एग्जाम रटने पर पर नहीं, बल्कि ज्ञान के स्थान पर आधारित होंगे। 03 – 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा। कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस नीति की सबसे खास बात यह है, इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है। क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स प्रारम्भ होंगे। वर्चुअल लैब्स विकसित होंगी।   

अब चार साल का होगा डिग्री कोर्स

अब कॉलेजों में डिग्री चार बरस का होगा, लेकिन अभी तीन साल का है। नई शिक्षा नीति-एनईपी के मुताबिक तीन साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है, जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं करना है। हायर करने वाले छात्र-छात्राओं को साल साल की डिग्री करनी होगी। चार साल की डिग्री करने वाले विद्यार्थी अब एक साल में एमए कर लेंगे। एनईपी के तहत अब किसी भी स्टुडेंट का बच जाएगा। नई शिक्षा नीति में छात्रों की बल्ले-बल्ले है। छात्रों का अब एक बरस भी बर्बाद होने वाला नहीं है। यदि एक साल बाद किसी छात्र को वित्तीय/ शारीरिक/ पारिवारिक दुश्वारियां आती हैं तो उसे एक साल की पढ़ाई ले एवज में सर्टिफिकेट दो साल की पढ़ाई के एवज में डिप्लोमा मिलेगा। तीन साल मुकम्मल करने के बाद वह डिग्री पाने का पात्र को जाएगा। एनईपी के अनुसार एमफिल को बंद कर दिया जाएगा। विद्यार्थिओं को यूजी के बीच दूसरे कोर्स करने की सहूलियतों का भी प्रावधान है। एनईपी के अनुसार कोई छात्र अगर एक कोर्स के बीच में कोई दूसरा कोर्स करना चाहता है तो उसे पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक दिया जा सकता है।  

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन- एनआरएफ का होगा गठन

विधि और चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर पूरी उच्च शिक्षा के लिए एक ही नियामक होगा यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-यूजीसी, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद- एआईसीटीई, भारतीय वास्तुकला परिषद आदि के स्थान पर सिर्फ एक ही नियामक संस्था बनाई जाएगी। अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन- एनएसएफ की तर्ज पर देश में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन- एनआरएफ बनेगा। इसमें न केवल साइंस बल्कि सोशल साइंस भी शामिल होगी। एनआरएफ बड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंसिंग तो करेगा ही, साथ ही शिक्षा के अलावा रिसर्च में भी मील का पत्थर साबित होगा।  

नर्सरी से बाहरवीं तक के पाठ्यक्रम को चार हिस्सों में बांटा

बहुप्रतिक्षित नई शिक्षा नीति में 10+2 के स्थान पर 5+3+3 +4 सिस्टम लागू किया गया है। फाउंडेशन के पहले पांच साल में नर्सरी, केजी और अपर-केजी होंगे। इसमें तीन से आठ साल तक के बच्चे कवर होंगे। प्राथमिक में तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के छात्र शामिल  होंगे। इन बच्चों की आयु आठ से ग्यारह वर्ष होगी। माध्यमिक में छठी से आठवीं की कक्षाएं चलेंगी। माध्यमिक शिक्षा की यह खास बात होगी, कक्षा छह से ही कौशल विकास कोर्स कराया जाएगा। इसमें ग्यारह से चौदह वर्ष तक के छात्र शामिल होंगे।अंतिम वर्ग यानी सेकंडरी स्टेज में नौवीं से बाहरवीं तक पढ़ाई होगी। 14-18 साल के छात्र-छात्राओं का ध्यान बोर्ड की तैयारी पर फोकस होगा। नई शिक्षा नीति में 10वीं के बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, नई शिक्षा नीति से लाखों का जीवन बदल जाएगा। एक भारत, श्रेष्ठ भारत पहल के तहत इसमें संस्कृत समेत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री बोले, शिक्षा पर अब जीडीपी का 6% खर्च करने का लक्ष्य है जो अब तक 4.43% था। बोले, बोर्ड परीक्षा में एकबार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र और दो या उससे अधिक बार मौका मिलेगा। इसरो के पूर्व प्रमुख एवं पदमभूषण डॉ. के कस्तूरीरंजन कहते हैं, नई शिक्षा नीति से न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि रोजगार भी मिलेगा। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान-एनआईओएस के पूर्व शैक्षणिक निदेशक श्री कुलदीप अग्रवाल कहते हैं, पहली बार किसी शिक्षा नीति में भारत केंद्रित शिक्षा तंत्र की बात हुई है। एनसीईआईटी के पूर्व निदेशक एवं शिक्षाविद श्री जेएस राजपूत कहते हैं, इस नीति से बोर्ड परीक्षाओं के दबाव को कम करने का निर्णय पूरी से तरह क्रांतिकारी कदम है। 

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