लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
नरेंद्र मोदी विश्व के पॉपुलर नेता :- विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं के लिए कराये गए एक सर्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रियता के मामले में टॉप टेन के अंदर रहे हैं। उन्हें इस सर्वे में सातवां स्थान दिया गया है, जबकि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को दुनियां का सबसे लोकप्रिय राजनेता चुना गया था। लोकप्रिय नेताओं का सर्वे कराने वाली एजेंसी इंटरनेशनल वर्ल्ड लीडर इन्डेक्स के लिए विन गेलप की ओर से किए गए इस सर्वे में दुनियां के 65 देशों के लोगों से रायशुमारी की गयी थी। इसमें 24 फीसदी लोगों ने मोदी के समर्थन में अपना मत दिया। सर्वे की मुख्य बातें यह रही कि मोदी लोकप्रियता के मानक में चीन के राष्ट्रपति से एक पायदान भले नीचे हों लेकिन पीएम मोदी की तुलना में चीन के राष्ट्रपति को 30 प्रतिशत प्रतिकूल वोट मिले हैं। सर्वे ओबामा को सबसे लोकप्रिय और प्रशंसनीय तथा नरेंद्र मोदीजी को विश्व का पॉपुलर नेता बताया है।
लोकतंत्र में विरोध का सबको हक :- भारत में बहुत से लोग है, जो कथित भांड पत्रकारों, और भ्रष्ट नेताओं की बातों में आकर नरेन्द्र मोदी का हर बात पर विरोध करते रहते हैं । अच्छा है, लोकतंत्र है तो विरोध करें या समर्थन, सबको अपना हक है। पर अच्छी बातों का समर्थन तो कभी नहीं देखा गया है। विरोध के तर्क भी निष्पक्ष नहीं पाये जाते हैं । इसमें तो मुझे कुछ न कुछ बेमानी दिखाई देती है। यह लोकतंत्र के लिए कत्तई उचित नहीं है, अपितु बहुत ही घातक है। ठीक है, विपक्ष के लोगों को विरोध करना चाहिए परन्तु उन्हें भारत की भोली भाली जनता को बरगलाना नहीं चाहिए।
समर्थन किसको :- मोदी का विरोध करके लोग समर्थन किसका कर रहे हैं ? क्या मुस्लिमों के वोटों के लिए पक्षपात करने वाले तथा दो महीनों तक अपने पार्टी की टी आर पी बढ़ाने वाले मुलायम सिंह जी का समर्थन कर रहे हैं ? या चारा घोटाले में सजा पाये लालू प्रसाद को वाजिब बता रहे हैं ? या दलितों को बरगला तथा भ्रमितकर उनका मसीहा बनने वाली भारत में अल्पसमय में सर्वाधिक बटोरने वाली बहन मायावती के झूठे फरेबों का समर्थन कर रहे हैं? या विदेशी मूल व संस्कारों को बढ़ाने वाली घोर हिन्दू विरोधी खानदान की बहू श्रीमती सोनियाजी व उनके बचकाना वयानदेने वाले सुपुत्र राहुलजी का समर्थन करते हैं?एक रेस्तरां बार में काम करने वाली और उसके बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल तो इनका हाल में ही राज बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर है क्या 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं ? बहुतसारे प्रश्न है जिनका उत्तर दिखाई नहीं पड़ रहा है।
अनाथ हुआ दिल्ली :- क्या 5 साल आप पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चूना लगाने वाला आम आदमी पार्टी मोदी जी का विकल्प बन सकता है? 5 दिन भी दिल्ली में केजरीवाल नहीं रहते। वाईफाई और सीसीटीवी, 150 कॉलेज व 500 स्कूल का वादा देने वाले ये कुकुरमुत्ता टाइप के नेता क्या नरेंद्र मोदी से बेहतर हैं ? एक भी सत्य न बोलनेवाले और हर किसी छोटी से बड़ी बात के लिए मोदीजी को दोषी ठहरानेवाले तथा दिल्ली को भगवान के भरोसे छोड़ पंजाब तथा गोवा आदि में दोनो हाथों में लड्डू थामने की कोशिस करनेवाले केजरीवालजी को आप समर्थन करते हैं? अरविंद केजरीवाल सहित सभी आप के नेता दोनों राज्यों में कमान संभाल हुए हैं। ऐसे में दिल्ली में केवल एक मंत्री ही सरकार की देखरेख के लिए बचा है। स्टार प्रचारक केजरीवाल जहां खुद गोवा में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा के साथ डटे हुए हैं। तो वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया पंजाब में चुनावी दंगल संभाल रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ही केवल दिल्ली में बचे हुए हैं।
मुस्लिमपरस्त बंगाल :- क्या तृणमूल कांग्रेस के सुप्रीमों ममता बनर्जी समर्थन करने लायक है ? ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर कदापि नहीं हो सकते है या इनका रिकॉर्ड बेहतर भी नहीं है। बंगाल में हिन्दुओं पर होने वाले जुल्म पर ममता की कोई हमदर्दी नहीं है अपितु वह भी मुलायम सिंह जी तरह पूरी तरह से मुस्लिम परस्त नेता हैं। क्या नरेन्द्र मोदी से बेहतर मुख्यमंत्री है ममता बनर्जी हैं ? वह कहीं से कुछ भी बेहतर नहीं दिखती है। कोलकाता में और गुजरात के किसी छोटे शहर भी जाकर एक नजर मार लीजिये। आप ममता को कहीं भी बेहतर नहीं पायेंगे।
यादव नेतागण :- लालूप्रसादजी और मुलायमसिंह जी दोनों के घर की ऐसी स्थिति थी कि एक के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे। जाति के नाम पर राजनीति चलाने वाले सभी यादव नेता, आज अरबपति है। प्रो0रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमते है। तो शिवपाल महँगी ऑडी में चलते हैं । प्रतीक यादव 5 करोड़ के लेम्बार्गिनी पर चलते हैं और कहते हैं कि ये मेरी व्यक्तिगत कमाई और हैसियत है। समाजवादी का ही यह प्रोडक्ट है। ये लोग नरेन्द्र मोदी से कैसे बेहतर हो सकते हैं ?
दौलत की देवी :- जब मायावती राजनीति करने निकली थी और कांशीराम की पिछलगू बनी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था। बादमें उनका सैंडल भी प्लेन से आने लगा है। उनके भाई के पास 497 कंपनिया है। वह खुद को दलित की बेटी तो कहती हैं परन्तु उन्हें तो दौलत की देवी का सम्मान देना अनुचित नहीं है। क्या मायावती नरेंद्र मोदी से बेहतर है ? आज हर बात में वह मोदी जी तथा आर एस एस को कोसती नजर आती हैं। जिस आर एस एस के स्वयंसेवक ब्रहमदत्त द्विवेदी ने उन्हें बचाने के लिए समाजवादियों के निशाने पर आकर स्वयं को कर्बानी दे दी थी। उस संघ को कोसने में बहनजी कोई कसर नहीं रखती हैं।
मोदी विरोधी सचेत रहें :- अरे मोदी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किनका करते हो? विना विकल्प व लक्ष्य के यह देश डूब जाएगा। जब ना राष्ट्र रहेगा ना ही इन नेताओं की राजनीति ही चल सकेगी। थोड़ा सोचो, देश को और कितने टुकड़े में देखना है ? एक एक करके इसके कई टुकड़े तो होते ही जा रहे है । अभी क्या मन नहीं भरा है ? और कितना देश को बर्बाद करवाना है ? आज भी देश में अनेक एसे क्षेत्र हैं जिसे मिनी पाकिस्तान कहना अनुचित नहीं होगा। काश्मीर तो अशान्त है ही, हैदराबाद कोलकाता तथा अवैसी के प्रभाव वाले कई अन्य क्षेत्र आज बड़े नाजुक दौर में गुजर रहे हैं ।
विपक्ष नापसन्द लायक ही :- मान लो की मैं मूर्ख हूँ और मुझे नहीं मालूम कि मैं मोदी जी को क्यों पसंद करता हूं। लेकिन मेरे पास कोंग्रेस , सपा ,बसपा , आप को नापसंद करने के बहुत कारण है। मुझे नहीं मालूम कि अच्छे दिन आएंगे कि नहीं, पर मोदी जी के अतरिक्त और कोई राजनेता दूर दूर तक दिखाई नहीं देता जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो। मुझे ये भी नहीं मालूम कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेगे या नहीं । लेकिन, इतना पूरा यकीन हैं, उनके खून का एक एक कतरा भारत माता को पुनः विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत रहेगा ।
मोदीजी से युवा पीढ़ी खुश :- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मोदी से देश के कुछ बुद्धिजीवी नाराज है। मुझे यकीन है, उनके आने के बाद युवा पीढ़ी बहुत खुश है। मुझे ज्ञात नहीं कि मोदी देश का कितना विकास कर पाएंगे, लेकिन मुझे यकीन है कि वह अपनी जिम्मेदारियां उठाने में कोई कसर बाकी नहीं लगायेंगे। मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी हैं या नहीं, यह मुझे मालूम नहीं। पर मुझे पक्का यकीन हैं उनके पास भारत के उज्जवल भविष्य की पूरी तैयारी है। मुझे नहीं पता कि नोटबंदी के कारण भविष्य में बीजेपी हारेगी या जीतेगी। पर एक देश का सजग नागरिक होने के कारण मुझे विश्वास है कि जैसा विगत 70 साल में नहीं हो पाया उससे अब अच्छा ही हो सकेगा। यह सब तभी होगा जब आम जनता मोदी जी में विश्वास करेगी और जब विपक्ष उन्हें कोसना बन्द कर काम करने देगी।

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