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    Homeसाहित्‍यकविताअब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते

    अब राजनीति में नेता चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते

    —विनय कुमार विनायक
    अब राजनीति में नेता
    चोला नहीं अंतरात्मा बदल लेते
    कल तक जो भ्रष्टाचारी थे
    उन्हें महात्मा कहने पर बल देते
    स्वार्थ सिद्धि हेतु जनता से छल करते!

    भाई भतीजावाद के लिए जीते मरते
    अब राजनेता क्या क्या नहीं करते रहते?
    कुकर्म को सुकर्म, सुकर्म को कुकर्म कहते!

    ऐसे तो मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना होते
    राजनीति में राम में रावण होते, रावण में राम,
    दोनों एक ही झोली के चट्टे बट्टे लगते,
    रावण से राम निकलते, राम से रावण, पार्टी बदलते!

    जातिवादियों का क्या कहना
    हर हाल में देश काल के लिए वे काल होते,
    सारे तोते हरे हरे दिखते, लाल भी कमाल होते,
    वक्त बदल जाए तो भी क्या?
    चोर गुंडे भाई भाई अपनी माई के लाल लगते!

    राजनीति में तर्क वितर्क बहुत होते
    मगर राजनेता के चरित्र में कोई फर्क नहीं होते!

    दुर्योधन को सुयोधन कह लो,
    दुशासन को सुशासन, कुशासन कुछ भी कहो,
    राजनीति में अच्छे बुरे उपसर्गों का अर्थ व्यर्थ होते!

    सु उपसर्ग सुविधानुसार सूं-सूं करते,
    कु काली कोयल सा कुहू-कुहू कह कूकते,
    कु कुत्ते सा कभी कूं-कूं कभी भूं-भूं भौंकते,
    दु कभी जनता को दुआ देते, कभी दुरदुराते!

    नेता गिरगिट सा रंग बदलते टोह में रहते,
    अजगर सा नक्कारा होकर कोठीनुमा पेट भरते,
    जरदगव गिद्ध सा सामाजिक न्याय करते,
    रंगा सियार सा बदरंग होकर हुआ-हुआ करते!

    नेता योगरुढ़ को क्षण में तोड़ देते,
    मूढ़ की महिमा गायन करते नहीं थकते,
    गुड़ को मिठाई कहकर मुफ्त की रबड़ी बांट देते,
    जनता को जाहिल काहिल बनाने के लिए
    और वोट पाने के लिए कुछ कोर कसर नहीं छोड़ते!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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