वृद्धजनों को वृद्धापेंशन का इंतजार

सुविधाओं के साथ जागरुकता भी जरुरी है
साबरीन प्रवीन

योगिया(सीतामढ़ी)

बिहार
कुछ समय पहले आई खबर के अनुसार सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों के बैंक खातों को मार्च तक आधार से जोड़ना अनिवार्य है। केंद्र ने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिया है कि सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन धारकों के बैकं खाते को आधार से जोड़ा जाए। अगले वित्तीय वर्ष से आधार से जुड़े बैंक खाते में ही भुगतान किया जाएगा। डिजिटल भारत की ओर कदम बढ़ाने का ये एक और विकल्प हो सकता है लेकिन शिक्षा और जागरुकता के बिना इसे पूरा नही किया जा सकता।

आपको बता दे कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में साक्षरता दर 70.04 प्रतिशत है। ऐसी स्थिति में शिक्षा की अनुपस्थिति में आधार कार्ड से लेकर बैंक खाते के महत्व को समझना देश की एक बड़ी आबादी के लिए आसान नही है। शायद यही कारण है कि सरकारी स्तर पर हर प्रकार के विकल्प मौजुद होने के बाद भी समय अनुसार जनता उसका लाभ नही उठा पाती।

इस संदर्भ में विशेष रुप से बात अगर बिहार राज्य की करें तो हमे मालुम होगा कि इस समय बिहार में कुल साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत है और कुल 65 लाख समाजिक सुरक्षा पेंशनधारी हैं। इनमें वृद्धावस्था पेंशनधारकों की संख्या 45.30 लाख है।

परंतु वास्तविक स्थिति बताती है कि बिहार के कई जिलों में आज भी लोग सुरक्षा पेंशन का लाभ लेने से वंचित हैं। जिला सीतामढ़ी के पुपरी प्रखंड का कुशैल गांव ऐसे ही गांव की श्रेणी में आता हैं जहां कई वृद्ध जनों को वृद्धापेंशन नही मिल रहा। इस संबध में रीता देवी कहती हैं “बहुत दिन हो गए फॉर्म भरे हुए लेकिन अभी तक वृद्धा पेंशन नही मिला”। क्या आपका बैंक में खाता है ? पूछने पर रीता देवी ने बताया की “नही इतनी कमाई नही तो खाता खुलवा कर क्या करते”।

एक विकलांग युवक के अनुसार “मेरे माता-पिता बूढ़े हैं। बचपन में अचानक पोलियों हो गया तबसे मैं काफी मजबूर हो गया हुँ। अपने मां-बाप की एक ही संतान हूँ लेकिन खुद मजबूर हूँ। उपर से मां-बाबा को वृद्धा पेंशन नही मिलता तो और दिक्कत होती है। मैं किसी तरह छोटी मोटी मजदूरी करके कुछ कमाता हुँ और बाबा भी इस उम्र में कुछ मजदूरी करके थोड़ा बहुत कमा लेते हैं। बस घर चल जाता है। पहले पेंशन का पैसा मिलता था लेकिन पिछले 18 महिने से कोई पैसा नही मिला है। अभी भी कुछ लोगो का पैसा आता है और कुछ का नही। कार्यालय यहां से इतनी दूर है कि बार बार वहां का चक्कर लगाना आसान नही है”।

35 वर्षीय राम बत्ती देवी कहती है “ पति नही हैं दो साल पहले उनकी मृत्यु हो गई । वैसे ही घर चलाना मुश्किल हो गया है उपर से सास ससुर के पंशन के लिए फॉर्म भरवाया था लेकिन आज तक उनका पैसा नही आया। ब्लॉक में भी जाकर पता किया लेकिन कोई सही से कुछ बताता नही है”।

85 वर्षीय नपानी महतो ने कहा “ इतनी उम्र हो गई है कि कोई काम नही हो पाता। पहले तो वृद्धा पेंशन मिलता था लेकिन पिछले कई महिनो से पेंशन का पैसा नही मिला”।

वार्ड नंबर 15 के राम चंद्र  बताते हैं “मेरा बैंक में खाता है और फॉर्म भी गांव के एक बाबु से भरवाया था वो कुछ पढ़ा लिखा है न बिटिया। लेकिन आजतक कोई पैसा नही मिला। कहां जाए किससे पता करें कोई बताता नही”।

मामले की गहराई जानने के लिए जब गांव के मुखिया से संपर्क किया गया तो उन्होनें बताया “कितने लोग ऐसे हैं जिनका बैकं में खाता नही है। बहुत से लोगो का नाम बीपीएल सूची में नही है और कितनो ने फॉर्म सही से नही भरा इस कारण से कुछ लोगो का पैसा आता है और कुछ का नही। हां इधर कुछ महिनों से किसी दिक्कत के कारण पैसा नही आया है पर जल्दी आएगा हमने ब्लॉक में जाकर पता किया है”।

स्थिति साफ बता रही है कि लोगो के उत्थान के लिए सुविधा तो उपलब्ध है परंतु सरकार की लापरवाही से कहीं शिक्षा और जागरुकता की कमी के कारण लोग वृद्धा पेंशन का लाभ नही ले पा रहे हैं। आवश्यक है कि अन्य योजना बनाने से पहले एक ऐसी भी योजना बनाई जाए जो लोगो को उनके अधिकार के प्रति जागरुक और शिक्षित करें ताकि डिजिटल भारत को बनाने में ग्रामीण भारत भी अपना योगदान दे सके। (चरखा फीचर्स)

 

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