आदमी के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जिस तरह भोजन और शिक्षा की ज़रूरत होती है ठीक उसी तरह खेल-कूद की भी आबश्यकता होती है| बरसो से चली आ रही इस परम्परा को 16 जून 1896 को ओलंपिक का नाम दिया गया जो एथेंस में आयोजित हुआ |ओलंपिक के नाम से मशहूर यह खेल हर 4 साल बाद आयोजित किया जाता है| इस खेल में मुख्य रूप से दौड , साइकल दौड, तैराकी ,कुश्ती , निशानेबाजी ,टेनिस आदि है|

1896 से खेले जाने बाले ओलंपिक में भारत 1990 से हिस्सा ले रहा है| भारत के खिलाडी अबतक (2008 ओलंपिक) 9 स्वर्ण, 4 रजत और 7 कांस्य समेत सिर्फ 20 पदक जीत पाया है| बीजिंग ओलंपिक 2008 में 1 स्वर्ण एवं 2 कांस्य समेत कुल 3 पदक जीता जो अबतक का सर्ब्श्रेठ प्रदर्शन है

अगर बात की जये चीन की तो (1984) से चीन लागातार ओलंपिक में हिस्सा ले रहा है| चीन ने वर्सिलेना ओलंपिक (1992) अटलांटा ओलंपिक (1996) मे चौथे स्थान , सिडनी ओलंपिक(2000) में तीसरे स्थान ,एथेंस ओलंपिक(2004) में दूसरे स्थान पर रहा |2008 बीजिंग ओलंपिक में तो अपना सारा पिछला रिकॉर्ड तोड़ अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन शीर्ष पर जा पंहुचा|चीन अकेले 51 स्वर्ण पदको के साथ कुल 100 पदक जीत कर शिखर पर पहूच गया| 2008 ओलंपिक खत्म होते- होते चीन ने तो अपना मुकाम हासिल कर लिया |जिसका इन्तजार चीन के लोगो को था |

क्या भारत भी हासिल करेगा यह मुकाम ? अगर करेगा, तो कब तक ? क्या हम सब भारतीय चमचमाती स्वर्ण पदक एक साथ देख पायेंगे, कई खिलाडियो के गले में ? आबादी के मामले में तो हम सिर्फ चीन से ही पीछे है फिर ओलंपिक में बहुतो से पीछे| आखिर क्यू ? क्या हमारे पास खिलाडी नहीं है या हम खेलना नहीं चहाते? खैर जो भी हो इस उमिद्द के साथ की शायद 30 बे ओलंपिक में 81 सदस्यी खिलाडी दल कुछ पदक जीत कर हमारे देश का नाम ओलंपिक के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में भारत का नाम दर्ज करें

इस उम्मीद के साथ सभी खिलडियो को मेरे तरफ से शुभकमानायें

अभिरंजन कुमार

1 thought on “ओलम्पिक, चीन और भारत

  1. तथ्य अगर पता नहीं हों तो कृपया ऐसे अधकचरे लेख प्रकाशित न करें ……………..!!!

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