लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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सवेरे जगा कर नींद से
अपने हाथो नाश्ता खिलाया होगा
छोड़ स्कूल के दरवाजे पिता ने
प्यार से हाथ हिलाया होगा

बेटा मेरा मेहफूज है वहां
माँ ने दिल को समझाया होगा
क्या बीती होगी उस माँ पर
जब फ़ोन स्कूल से आया होगा

भागते हूए स्कूल की तरफ
एक एक कदम ढ़गमागया होगा
क्या गुजरा होगा दिल पर पिता के
इस हाल में जब उसे पाया होगा

उस जानवर ने जब उसे दबोचा होगा
वो कितना छटपटाया होगा
नाम उसकी जबान पर
माँ बाप का आया होगा

उस मासूम को यू बेरहमी से मारते
क्या एक पल भी ना वो थरथराया होगा
कैसे ज़ियेंगे माँ बाप उसके
ये ख्याल भी ना दिल में आया होगा

बिखर गए होंगे वो बदकिसमत माँ बाप
जब उसे आखिरी बार सीने से लगाया होगा
लौटेगा नहीं कभी वापिस वो
कैसे खुद को समझाया होगा

RIP Pradhyuman😔🙏

#justiceforPradhyuman

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