लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

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२००१ से २०११ के मध्य देश की जनसँख्या वृद्धि दर १७.६४% रही है.आशा करनी चाहिए कि २०११-२०२१ में ये वृद्धि दर घटकर लगभग १५% पर आ जाएगी और तदनुसार देश की जनसँख्या २०११ की १२१ करोड़ से बढ़कर लगभग १३९ करोड़ हो जाएगी तथा अगले दशक २०२१-२०३१ में ये वृद्धि दर और गिरकर लगभग १३% दशक की दर से २०२७ में १५० करोड़ हो जाएगी.जबकि सरकारी संस्थानों के अनुमानों में इसे २०५० में १५० करोड़ दिखाया जा रहा है. ये त्रुटिपूर्ण गणना ही सारे योजनागत विकास को असफल कर देते हैं.बेहतर हो कि सरकारी एजेंसियां अपने अनुमानों को वास्तविकता के धरातल पर रखकर योजनाएं बनायें.२०६८ तक ये जनसँख्या २०० करोड़ तक पहुँचने की पूरी संभावनाएं हैं.लेकिन इस बढ़ती हुई जनसँख्या की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप हमारा क्षेत्रफल बढ़ने वाला नहीं है.क्योंकि प्रकृति ने हमारे तीन ओर जल और एक ओर हिमालय पर्वत जैसी दीवार खड़ी की है.अतः हमें अपनी योजनाएं अपने वर्तमान क्षेत्रफल के आधार पर ही बनानी होंगी.आवासीय योजनाओं में वर्टिकल विकास को ही बढ़ावा देना होगा.इसके लिए हमारी नगर विकास की सारी योजनाओं का पुनरावलोकन करना होगा.वर्तमान में जो भू उपयोग १.५ FAR या २.५ FAR है उसे काफी ज्यादा बढ़ाना होगा.अधिकतमके स्थान पर न्यूनतम ऊंचाई निर्धारित करनी होगी.पार्किंग के लिए भूमिगत पार्किंग अनिवार्य करनी होगी.रूफटोप सौर ऊर्जा+सोलरविंडो+एक्सटीरियर पेंट ग्राफीन मॉडल जनित ऊर्जा की नीति लागू करनी होगी जिससे प्रत्येक आवासीय इकाई ऊर्जा के मामले में स्वावलम्बी बन जाये.और सौर ऊर्जा+अन्य वैकल्पिक ऊर्जा और ग्रीन ऊर्जा की नीति महत्वकांक्षी ढंग से अपनानी होगी.नगरों के विकास के लिए सिंगापुर जैसी आवासीय नीति का सहारा लेना होगा जहाँ कम भूक्षेत्र के बावजूद गगनचुम्बी आवासीय इमारतों के द्वारा भूमि का बेहतर प्रबंधन किया गया है.लेकिन बढ़ती जनसँख्या के मद्देनज़र कृषि भूमि के अधिग्रहण से बचना होगा.अन्यथा हमारी खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवीनतम वैज्ञानिक शोध का सहारा लेना होगा.ध्यान रखना होगा कि अभी भी हमारी कृषि उत्पादकता चीन और कुछ अन्य देशों की तुलना में काफी कम है.अतः उत्पादकता बढाकर हम खाद्य सुरक्षा को बरक़रार रख सकते है.इन बिन्दुओं को यदि गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले वर्षों में देश के समक्ष भारी समस्याएं उत्पन्न हो जाएँगी.

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