भारत की तस्वीर बदलते प्रधानमंत्री श्री मोदी

11 नवंबर 2017 से 18 फरवरी 2018 तक मुंबई में भारत के 20 लाख वर्षों के इतिहास से जुड़ी एक प्रदर्शनी लगी थी। इस प्रदर्शनी को उस समय इंडिया एंड वर्ल्डः ए हिस्ट्री इन नाइन स्टोरीज़ का नाम दिया गया था। इसमें 228 मूर्तियों, बर्तनों और तस्वीरों को इनके समय के अनुसार नौ वर्गों में बांटा गया था।
संग्रहालय के निदेशक सब्यसाची मुखर्जी के अनुसार”प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत और शेष विश्व के बीच संबंध खोजना और तुलना करना था।”
वास्तव में इस प्रकार की प्रदर्शनी इस देश के प्रत्येक शहर में लगाई जानी आवश्यक हैं। क्योंकि इस प्रकार की प्रदर्शनी से भारत के गौरवपूर्ण अतीत को वर्तमान पीढ़ी के अंतर्मन में उकेरने में हम सफल हो सकेंगे। साथ ही जो लोग इस विश्व का इतिहास पिछले 5000 वर्ष में जबरन समाविष्ट करने का प्रयास करते हैं उनकी इस मूर्खतापूर्ण अवधारणा से भी पर्दा उठ सकेगा।
अब समय आ गया है जब सारे संसार को विश्व गुरु रहे भारत के सच्चे इतिहास को समझना चाहिए। यह एक सुखद तथ्य है कि वर्तमान प्रधानमंत्री श्री मोदी कुछ नई परिभाषाएं गढ़ रहे हैं। कुछ नए मूल्यों का सृजन कर रहे हैं और कुछ ऐसी नई चीजों को हमारे सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं जो आज नहीं तो कल सुखद परिणाम देने वाली होंगी। वास्तव में आज के विश्व को यह बताना बहुत आवश्यक है कि जब से संसार में ईसाइयत और इस्लाम का पदार्पण हुआ तब से लड़ाई – झगड़े व उग्रवाद अधिक बढ़ा है। उससे पहले लाखों – करोड़ों वर्ष तक भारत की वैदिक संस्कृति के माध्यम से संसार में धर्म का साम्राज्य स्थापित रहा अर्थात नैतिकता और न्याय में विश्वास रखने वाले लोग सत्तासीन रहे । उन्होंने इन्हीं दोनों मूल्यों को अपनाकर संसार में सुव्यवस्था स्थापित रखी।
आज का विश्व भारत के इसी सनातन सत्य की ओर टकटकी लगाए देख रहा है । सारे विश्व में इस समय एक ऐसी जिज्ञासा का भाव है जो यह प्रकट करता है कि भारत को खोजना समय की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की कार्यशैली ने जिस तेजस्वी राष्ट्रवाद का निर्माण किया है उससे इस प्रकार के जिज्ञासा भाव में और भी अधिक वृद्धि हो गई है। भारत के प्रति जिज्ञासा को बढ़ाने में प्रधानमंत्री श्री मोदी का अपने सैनिकों के साथ दिवाली मनाने का कार्यक्रम भी विशेष रूचि पैदा करता है।
इस बार की दीपावली प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जैसलमेर की लोंगेवाला पोस्ट पर जाकर अपने सैनिकों के साथ मनाई है । जहां उन्होंने शत्रु को ललकारते हुए कहा है कि “अगर भारत को उकसाया गया, तो भारत इसका ‘प्रचंड जवाब’ देगा।”
प्रधानमंत्री ने साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीतियों में विश्वास रखने वाले चीन को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि “आज पूरा विश्व विस्तारवादी ताक़तों से परेशान है। ये एक तरह से मानसिक विकृति है और 18वीं शताब्दी की सोच को दर्शाती है।”
निश्चित रूप से प्रधानमंत्री की इस प्रकार की ओजस्विता तेजस्वी राष्ट्रवाद के निर्माण में सहायक होती है। जब प्रधानमन्त्री अपने सैनिकों के बीच ऐसी बातें कहकर देश की भावनाओं को प्रकट करते हैं तो निश्चय ही उसका सेना के मनोबल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आज हम यह देख भी रहे हैं कि हमारे सैनिकों का मनोबल इतना ऊंचा है कि चीन जैसा देश अब आगे बढ़ने या भारत के साथ कुछ भी करने से पहले एक बार नहीं सौ बार सोच रहा है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत के किसी भी शत्रु को यह स्पष्ट कर दिया है कि “भारत दूसरों की बात समझने और अपनी बात समझाने की नीति पर विश्वास करता है, लेकिन यदि उकसाया जाए तो ये देश प्रचंड जवाब देने में सक्षम है।”
प्रधानमंत्री श्री मोदी का इस प्रकार का संबोधन और उद्बोधन जहां देशवासियों में आत्मबल का संचार करने वाला है , वहीं शत्रु देशों को यह स्पष्ट करने में भी सक्षम है कि भारत इस समय किसी भी प्रकार के प्रमाद का प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं है। वह पूर्णतया सावधान है और शत्रु के प्रत्येक इरादे को कुचलने की क्षमता और सामर्थ्य रखता है। हाल में दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच विवाद सुलझाने को लेकर आठवें दौर की बातचीत हुई थी, जिसमें दोनों देशों के राजनयिकों ने भी भाग लिया था। ये बैठक किसी परिणाम के समाप्त हो गई । ऐसे में शत्रु देशों को कड़ा संदेश दिया जाना आवश्यक था।
हमारा संविधान हमारे देश को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है । ऐसे में अपने देश की सुरक्षा के प्रति पूर्णतया सावधान रहना और वैसा ही आचरण करना जिससे यह स्पष्ट हो सके कि भारत इस समय संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य है ,किसी भी प्रधानमंत्री के लिए बहुत आवश्यक है । तभी तो लोंगेवाला पोस्ट पर सैनिकों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि ‘दुनिया की कोई भी ताक़त देश के सैनिकों को सीमा की सुरक्षा करने से रोक नहीं सकती है।’
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर यह भी स्पष्ट कर दिया कि जो देश आतंकवाद को संरक्षण और प्रोत्साहन देते हैं उन्हें अब भारत उनके घर में जाकर मारने की स्थिति में है। स्पष्ट है कि श्री मोदी संसार के अन्य देशों को अपने इस वाक्य के माध्यम से यही संदेश देने का प्रयास कर रहे थे कि आतंक के आकाओं को जब तक उनके घर में जाकर नहीं मारा जाएगा तब तक विश्व इस्लामिक आतंकवाद से मुक्त नहीं हो सकेगा। निश्चय ही प्रधानमंत्री के इस साहसिक वक्तव्य से संसार के अन्य देशों को और नेताओं को प्रेरणा मिलेगी। आशा की जा सकती है कि वे भारत का अनुकरण करते हुए आतंकी संगठनों और आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों के साथ इसी प्रकार का बर्ताव करेंगे।
पाकिस्तान का नाम लिये बिना श्री मोदी ने कहा, “जब भी ज़रूरत पड़ी है भारत ने दुनिया को दिखाया है कि उसके पास ताक़त भी है और सही जवाब देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी। आज भारत आतंक के आक़ाओं को घर में घुसकर मारता है।आज दुनिया यह समझ रही है कि ये देश अपने हितों से किसी भी क़ीमत पर रत्ती भर समझौता करने वाला नहीं है।”
उन्होंने कहा, “कोरोना काल में वैक्सीन बनाने का प्रयास कर रहे वैज्ञानिकों के साथ ही मिसाइलें बनाने वाले वैज्ञानिकों ने देश का ध्यान खींचा है। इस दौरान निरंतर मिसाइलों के टेस्टिंग की ख़बरें आती रहीं. आप कल्पना कर सकते हैं कि बीते कुछ महीनों में ही देश की सामरिक ताक़त कितनी ज़्यादा बढ़ गई है।”
निश्चित रूप से इस समय भारत की परंपरागत तस्वीर बदल रही है बहुत तेजी से होते हुए परिवर्तनों के हम साक्षी बन रहे हैं। जिस बात के लिए देश के लोग बहुत देर से प्रतीक्षारत थे अब वह साकार होती दिखाई दे रही है अर्थात तेजस्वी राष्ट्रवाद का निर्माण। तेजस्वी राष्ट्रवाद के समर्थक सभी देशवासियों को प्रधानमंत्री की उस सोच के साथ अवश्य ही समन्वय स्थापित करना चाहिए जिससे भारत विश्व गुरु बने और नई ऊंचाइयों को प्राप्त हो। बड़ी तेजी से कुछ चीजें दफन हो रही हैं तो उतनी ही तेजी से कुछ नई चीजें निकल कर बाहर आ रही हैं नई चीजों का इसलिए समर्थन करना समय की आवश्यकता है कि उनसे भारत सम्मानित स्थान को प्राप्त होता जा रहा है।

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