स्वर्गलोक-भूलोक हो एकीभूत

जो गिरा हुआ है, उसे गिरने का क्या डर होगा
जो नतमस्तक है, उसे घमण्ड ने क्या छुआ होगा।
खुद मालिक उसे राह दिखायेे,जो नम्र हुआ होगा।
जिसने जीत लिया मन को,वह संतोशी रहा होगा।
जो शरण प्रभु की पा जाये,समर्पित वह रहा होगा।।
जो दिल का बोझ उठाये, वासनाओं में घिरा होगा।।
जो सत्य का साथ निभाये, वह इंसान खरा होगा।।
पीव मुश्किल हुआ जीना,पर सबको ही जीना होगा।।
स्वर्गलोक-भूलोक होवे एकीभूत,तैयारी ऐसी करना होगा।
समस्तजनों का सर्वस्य मिले,तब यह संकल्प करना होगा।।

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