आर्यसमाज

“पराधीन भारत में अंग्रेजों की आर्यसमाजियों पर क्रूर दृष्टि के कुछ उदाहरण”

  मनमोहन कुमार आर्य,  पराधीन भारत में अंग्रेज पादरियों और अधिकारियों की आर्यसमाज के अनुयायियों

आर्यसमाज के सभी अनुयायियों को एक मन व हृदय वाला होकर पूरी निष्ठा से नियमों का पालन करना चाहिये

मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज संसार के सभी मनुष्यों को उनके कर्तव्यों का बोध कराने के

‘संसार में वेदों की प्रतिष्ठा ऋषि दयानन्द के अतिरिक्त अन्य कोई विद्वान कर नहीं पायाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय’

–मनमोहन कुमार आर्य,  गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गुरुकुल

“यदि स्वामी दयानन्द और स्वामी श्रद्धानन्द न होते तो स्वामी रामदेव भी न होते : स्वामी रामदेव”

  मनमोहन कुमार आर्य,  तीन दिवसीय गुरुकुल सम्मेलन, गुरुकुल कांगड़ी परिसर में 6 जुलाई, 2018

गुरुकुल को यदि स्कूल बनाते हैं तो आप बेईमानी करते हैं, उसका दुर्भाग्य करते हैं : डा. धर्मवीर”

  “गुरूकुल होता है आर्ष पाठविधि के होने से अन्यथा आप धोखाधड़ी करते हैं। गुरुकुल