महर्षि दयानन्द और आचार्य सायण के वेद भाष्य

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मनमोहन कुमार आर्य आर्य विद्वान श्री कृष्णकान्त वैदिक शास्त्री जी ने एक लिखा है जिसका शीर्षक है ‘‘क्या आचार्य सायण वेदों के विशुद्ध भाष्यकार थे?’’ लेखक ने अपने लेख में स्वीकार किया है कि आचार्य सायण का भाष्य पूर्ण विशुद्ध भाष्य नहीं है। श्री वैदिक जी के लेख पर एक टिप्पणीकार के अनुसार ‘‘सायण महोदय… Read more »

वेद की आज्ञा मनुर्भव और कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के आदर्श पालक महर्षि दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य वेद ईश्वरीय ज्ञान है। ईश्वर प्रदत्त ज्ञान होने के कारण वेद पूर्णतः तर्क व युक्ति संगत होने के साथ विज्ञान के अनुकूल भी हैं। वेदों में ‘मनुष्य को मनुष्य बनने’ की शिक्षा है। मनुष्य का अर्थ होता है मननशील होना। क्या हम मननशील हैं? मननशील मनुष्य मनन अर्थात् सत्य व असत्य का… Read more »

महर्षि दयानन्द सत्य के ग्रहण और असत्य के त्याग के आदर्श उदाहरण

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महर्षि दयानन्द जी अपने वैदिक सिद्धान्तों व विचारों के पक्के थे। यदि उनका कोई भक्त व अनुयायी उनके हित का कोई प्रस्ताव करता था जिससे उनके जीवन को हानि होने की आशंका होती थी तो वह अपने अनुयायियों द्वारा किसी स्थान विशेष की यात्रा न करने के सुझाव को स्वीकार नहीं करते थे। ऐसा ही जोधपुर में वैदिक धर्म के प्रचार के लिए जाते समय हुआ था।

यथार्थ वर्णव्यवस्था और दलितोद्धार में महर्षि दयानन्द का योगदान

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-मनमोहन कुमार आर्य इतिहास में महर्षि दयानन्द पहले व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जन्मना वर्ण-जाति व्यवस्था से ग्रस्त भारतीयों को वैदिक वर्णव्यवस्था के यथार्थ स्वरुप, जो गुण, कर्म व स्वभाव पर आधारित था व होता है, से परिचित कराया। महर्षि दयानन्द के विचारों को ‘‘सत्यार्थप्रकाश” ग्रन्थ के चौथे समुल्लास को पढ़कर… Read more »

जनवरी, 1877 का अंग्रेजों का दिल्ली दरबार और महर्षि दयानन्द

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-मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द के जीवन में दिल्ली दरबार की घटना का विशेष महत्व है। इस दिल्ली दरबार के अवसर पर महर्षि दयानन्द ने वहां अपना एक शिविर लगाया था और दरबार में पधारे कुछ विशेष व्यक्तियों को पत्र लिखकर अपने शिविर में आमंत्रित किया था जिससे देश व मनुष्योन्नति की योजना पर विचार… Read more »

सृष्टि उत्पत्ति विषयक वैदिक सिद्धान्त और महर्षि दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में महाभारत काल के बाद उत्पन्न मत-मतान्तरों के साहित्य में अनेक प्रकार की अवैज्ञानिक व अविश्वनीय विचार पायें जाते हैं। महर्षि दयानन्द इन सबमें अपवाद हैं। उनके जीवन में शिवरात्रि को घटी चूहे की घटना बताती है कि उन्होनें किशोरावस्था में ही जीवन की सभी बातों को… Read more »

महर्षि दयानन्द को राष्ट्रकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की भाव-भरित श्रद्धांजलि

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मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार की अपनी यात्राओं में बंगाल वा कोलकत्ता को भी सम्मिलित किया था। वह राष्ट्रकवि श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता श्री देवेन्द्रनाथ टैगोर व उनके परिवार से उनके निवास पर मिले थे। आपका जन्म कोलकत्ता में 7 मई सन् 1861 को हुआ तथा मृत्यु भी कोलकत्ता में ही… Read more »

क्या संसार महर्षि दयानन्द की मानव कल्याण  की यथार्थ भावनाओं को समझ सका?

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मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द (1825-1883) ने देश व समाज सहित विश्व की सर्वांगीण उन्नति का धार्मिक व सामाजिक कार्य किया है। क्या हमारे देश और संसार के लोग उनके कार्यों को यथार्थ रूप में जानते व समझते हैं? क्या उनके कार्यों से मनुष्यों को होने वाले लाभों की वास्तविक स्थिति का ज्ञान विश्व व… Read more »

महर्षि दयानन्द प्रथम धार्मिक महापुरुष

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ऋषि जन्मोत्सव (3 मार्च) एवं बोधोत्सव (7 मार्च) पर   ‘सभी धार्मिक मान्यताओं को सत्य की कसौटी पर कस कर उसका प्रचार करने वाले महर्षि दयानन्द प्रथम धार्मिक महापुरुष’ मनमोहन कुमार आर्य देश और संसार में प्रतिदिन लाखों लोग जन्म लेते हैं और अपनी आयु भोग कर काल के गाल में समा जाते हैं। सृष्टि… Read more »

महर्षि दयानन्द के मुम्बई में वर्ष १८८२ में दिए गए कुछ ऐतिहासिक व्याख्यान

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महर्षि दयानन्द (1825-1883) ने मुम्बई में जनवरी से जून, 1882 के अपने प्रवास में वहां की जनता को उपदेश दिये थे जो आर्यसमाज, काकड़वाड़ी, मुम्बई के मन्त्री द्वारा नोट कर उन्हें आर्यसमाज के कार्यवाही रजिस्टर में गुजराती भाषा में लिख कर सुरक्षित किया गया था। आज के लेख में महर्षि दयानन्द के उन 24 उपलब्ध… Read more »