महर्षि दयानन्द

“समस्त पृथिवी पर एक दयानन्द ही पूर्ण ब्रह्मचारी, पूर्ण योगी और पूर्ण ऋषि थाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय”

  मनमोहन कुमार आर्य,  श्रीमद्दयानन्द ज्यातिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौन्धा-देहरादून के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दूसरे

वेद की आज्ञा मनुर्भव और कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के आदर्श पालक महर्षि दयानन्द

मनमोहन कुमार आर्य वेद ईश्वरीय ज्ञान है। ईश्वर प्रदत्त ज्ञान होने के कारण वेद पूर्णतः

महर्षि दयानन्द सत्य के ग्रहण और असत्य के त्याग के आदर्श उदाहरण

महर्षि दयानन्द जी अपने वैदिक सिद्धान्तों व विचारों के पक्के थे। यदि उनका कोई भक्त व अनुयायी उनके हित का कोई प्रस्ताव करता था जिससे उनके जीवन को हानि होने की आशंका होती थी तो वह अपने अनुयायियों द्वारा किसी स्थान विशेष की यात्रा न करने के सुझाव को स्वीकार नहीं करते थे। ऐसा ही जोधपुर में वैदिक धर्म के प्रचार के लिए जाते समय हुआ था।

महर्षि दयानन्द को राष्ट्रकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की भाव-भरित श्रद्धांजलि

मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार की अपनी यात्राओं में बंगाल वा कोलकत्ता