लोकतन्त्र

अनावरण एक(गांधी) मूर्ति का (एक व्यंग्य)

नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़ ,मैली-कुचैली हो जाती है।समय-समय पर सीधी रखना एक बाध्यता हो जाती है,अन्यथा विरोधी दल ’टोपी-कोण” पर ही हंगामा शुरू कर सकते हैं

मतदाता और राजनेताओं के मध्य लोकतन्त्र

राजनीति का पहला सबक या कहें कि लोकतन्त्र की पहली परिभाषा यह कि ‘‘जनता का शासन, जनता के लिए, जनता के द्वारा” का कोई सैद्धान्तिक प्रभाव नहीं रह गया है। हो सकता है कि..