बुराई को त्यागने का प्रतीक है होली

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रंगों का पर्व होली हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार है। यह मौज-मस्ती व मनोरंजन का त्योहार है। सभी हिंदू जन इसे बड़े ही उत्साह व सौहार्दपूर्वक मनाते हैं। यह त्योहार लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना उत्पन्न करता है।

होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व

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श्वेत रंग की कमी होती है, तो अशांति बढ़ती है, लाल रंग की कमी होने पर आलस्य और जड़ता पनपती है। पीले रंग की कमी होने पर ज्ञानतंतु निष्क्रिय बन जाते हैं। ज्योतिकेंद्र पर श्वेत रंग, दर्शन-केंद्र पर लाल रंग और ज्ञान-केंद्र पर पीले रंग का ध्यान करने से क्रमशः शांति, सक्रियता और ज्ञानतंतु की सक्रियता उपलब्ध होती है। होली के ध्यान में शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न रंगों का ध्यान कराया जाता है और इस तरह रंगों के ध्यान में गहराई से उतरकर हम विभिन्न रंगों से रंगे हुए लगने लगा।

होली के वासंती रंग में बाजार का कृतिम रंग न चढ़ाएं 

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अखिलेश आर्येन्दु हम यदि होली के विभिन्न संदर्भों की बात करें तो पाते हैं कि न जाने कितने संदर्भ, घटनाएं, प्रसंग, परंपराएं और सांस्कृतिक-तत्त्व किसी न किसी रूप में इस प्रेम और सदभावना के महापर्व से जुडे़ हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रतीक इस पर्व का प्रेम का वह छलकता अमृत-कलश है जिसमें हमारा अंतर-जगत्… Read more »

होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार

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मनमोहन कुमार आर्य भारत और भारत से इतर देशों में जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है। होली के अगले दिन लोग नाना रंगों को एक दूसरे के चेहरे पर लगाते हैं, मिठाई व पकवानों का वितरण आदि… Read more »

होली ने भरा विधवाओं के जीवन में रंग

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वृंदावन का गोपीनाथ मंदिर इक्कीस मार्च को नई परंपरा का गवाह बना…सदियों से जिंदगी के रंगों से दूर रही विधवाओं की जिंदगी तब रंगीन हो उठी…जब करीब पंद्रह कुंतल गुलाब की पंखुरियों और बारह कुंतल गुलाल मंदिर के सुविस्तारित प्रांगण में उड़ने-बिखरने लगे। सिर्फ सफेद साड़ी में लिपटी रहने वाली हजारों विधवाओं ने जमकर गुलाल… Read more »

भारतीय संस्कृति के उदार सामाजिक बुनावट की पहचान है होली

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एम. अफसर खां सागर सदियों पूराना होली का त्यौहार तन और मन पर पड़े तमाम तरह के बैर, द्वेष और अहंकार को सतरंगी रंगों में सराबोर करके मानव जीवन में उल्लास और उमंग के संचार का प्रतीक है। होली रंगों, गीतों और वसंत के स्वागत का त्यौहार है। होली के दिनों में हुड़दंग, हुल्लड़, रंग… Read more »

रंगों  और मस्ती का महापर्व – होली

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भारतीय संस्कृति में होली के पर्व का अद्वितीय स्थान है। यह पर्व उमंग, उल्लास, उत्साह और जोश तथा मस्ती का पर्व है। होली का पर्व देश व समाज में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला पर्व है। होली का पर्व जलवायु  परिवर्तन का भी संकेत देता है । होली का पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार … Read more »

खेलेंगे हम होली

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फिर से एक सांप्रदायिक त्यौहार मुँह बाये खड़ा है | समस्या ये है की इस बार पर्यावरण को क्या नुकसान होने वाला है … शायद पानी का | मीडिया आपको लगातार सूखे की तस्वीरे दिखायेगा | बताएगा कि महाराष्ट्र में किसान पानी की वजह से सुसाइड कर रहे हैं | हमको पानी बचाना है |… Read more »

सामुदायिक बहुलता का पर्व है होली

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प्रमोद भार्गव होली शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा त्यौहार है,जो सामुदायिक बहुलता की समरसता से जुड़ा है। इस पर्व में मेल-मिलाप का जो आत्मीय भाव अंतर्मन से उमड़ता है,वह सांप्रदायिक अतिवाद और जातीय जड़ता को भी ध्वस्त करता है। फलस्वरूप किसी भी जाति का व्यक्ति उच्च जाति के व्यक्ति के चेहरे पर पर गुलाल मल… Read more »

उमंग का पर्व है होली

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डॊ. सौरभ मालवीय होली हर्षोल्लास, उमंग और रंगों का पर्व है. यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इससे एक दिन पूर्व होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहा जाता है. दूसरे दिन रंग खेला जाता है, जिसे धुलेंडी, धुरखेल तथा धूलिवंदन कहा जाता है. लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते… Read more »