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फिर निर्भयाः कानून बने तो ऐसा!

यदि इन अपराधियों के साथ वही बर्ताव किया जाए, जो इन्होंने उन युवतियों के साथ किया था याने उन्हें खुले आम फांसी दी जाए, उनके अंग भंग किए जाएं और उन्हें मरते हुए लाखों-करोड़ों लोगों को देखने-दिखाने दिया जाए तो भावी बलात्कारियों की हड्डियों में कंपकंपी दौड़ सकती है।