लेखक परिचय

अरुण कान्त शुक्ला

अरुण कान्त शुक्ला

भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत्त। ट्रेड यूनियन में तीन दशक से अधिक कार्य करता रहा। अध्ययन व लेखन में रुचि। रायपुर से प्रकाशित स्थानीय दैनिक अख़बारों में नियमित लेखन। सामाजिक कार्यों में रुचि। सामाजिक एवं नागरिक संस्थाओं में कार्यरत। जागरण जंक्शन में दबंग आवाज़ के नाम से अपना स्वयं का ब्लॉग। कार्ल मार्क्स से प्रभावित। प्रिय कोट " नदी के बहाव के साथ तो शव भी दूर तक तेज़ी के साथ बह जाता है , इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि शव एक अच्छा तैराक है।"

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kedarईश्वर ने रजनीकान्त को बर्खास्त कर दिया है| अब रजनीकांत वो सारे कार्य नहीं कर पायेगा, जो ईश्वर भी नहीं कर पाता था| केदार बाबा से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बता गया है की ईश्वर से भी नहीं बन पाने वाले कार्यों को करने के लिए अब भगवान जपो आन्दोलन के प्रचारमंत्री और गुजरात में धर्मराज स्थापित करने वाले अलोकिक लोकतांत्रिक नेता सर्व शक्तिमान, सर्वज्ञानी और सर्वत्र उपस्थित नरेंद्र को रजनी कान्त के कार्यों का भार सौंपा गया है| विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कार्यभार संभालते ही अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए अपने कन्धों पर बिठाकर 15000 लोगों को केदारनाथ से बाहर निकाला| सभी जमीनी रास्ते बंद होने के कारण उन्हें हवाई मार्ग से ये कार्य करना पड़ा| बताया जाता है की उनके हाथ में एक दूरबीन थी, जिसका प्रयोग करते हुए उन्होंने केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया| विज्ञप्ति में बताया गया है कि जब ईश्वर को पता चला कि नरेन्द्र ने केवल गुजरातियों को बचाया है तो ईश्वर बहुत नाराज हुए और नरेंद्र को याद दिलाया की अब उनका स्तर राष्ट्रीय है और उन्हें संकीर्णवाद से बचना चाहिए| इस फटकार के बाद, नरेंद्र जी ने तुरंत केदारनाथ को बनाने की जिम्मेदारी खुद पर दिए जाने की मांग कर दी है|वे देश में घूम घूम कर मांग करने वाले हैं कि भारत पर शासन करने वाले अधर्मियों को हटाकर देश की बागडोर उन्हें सौंपी जाए ताकि वे देश में धर्म का शासन लागू कर सकें, जिससे ईश्वर कुपित होकर केदारनाथ जैसा तांडव पुनः न करे|

37 Responses to “रजनी कान्त बर्खास्त : रजनी कान्त का कार्यभार नरेंद्र को सौंपा गया”

  1. आर. सिंह

    आर.सिंह

    इंसान जी,पहले इंसान को समझिये. पता नहीं आप डलास गए हैं या नहीं,पर मैंने केवल वहां के मौसम के बारे में लिखा था, जो दिल्ली से बहुत मिलता जुलता था. वह मैदानी इलाका है अतः थोड़ी समानता तो हैं ही. रही बात कांग्रेस और कामनिस्ट समझे जाने की. तो जब मैं कांग्रेसियों की शिकायत करता हूँ ,तो वे मुझे बीजेपी वाले समझने लगते हैं.ऐसे यह सत्य भी है कि किसी पार्टी से मेरा थोडा नजदीकी नाता रहा है ,तो वह जनसंघ ही है, बादमें जनता पार्टी और फिर बीजेपी,पर न जन संघ आर्थिक विचारों में अपने अर्थवेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के पथ पर चला और न बीजेपी,जब कि गुरु गोलवलकर ने कहा था कि हमारे आर्थिक विचारों के बारे में आदि और अंत सब दीन दयाल उपाध्याय हैं. मेरी विचार धरा का सबसे महत्त्व पूर्ण अंग चरित्र निर्माण और आर्थिक .स्वाधीनता है. मैं गलत हो सकता हूँ,पर मेरी मान्यता है कि अगर कांग्रेस ने महात्मा गांधी के विचारों को अपनाया होता या बीजेपी पंडित उपाधाय के अनुसार चला होता ,तो भारत में न इतना भ्रष्टाचार होता और न इतनी आर्थिक असामनता आती. आज मैं आम आदमी पार्टी के साथ हूँ,तो केवल इसलिए कि वे भी स्वराज (अरविन्द केजरीवाल की पुस्तक ) की कसम खाते हैं. मेरे विचारानुसार इस पुस्तक में ऐसा कुछ भी नहीं है,जो उन दो मनीषियों के विचारों से भिन्न हो. बातें बहुत हैं.मैं अपनी जिंदगी में किस तरह रहा हूं,इसको समझना इतना आसान नहीं है और न इसके बारे में किसी प्रशंसा या आलोचना से मुझे कुछ अंतर पड़ता है. जिंदगी इतने तूफानों से गुजरी है की अब तूफानों से दो दो हाथ करने में मजा आता है. इसके वाद मैं अपनी तरफ से इस आलेख के सम्वन्ध में वाद विवाद बंद करता हूँ. ऐसे आगे आपकी जो मर्जी.

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    • इंसान

      मैंने देश विदेश का भ्रमण किया है और हां ग्रीष्मकाल में डैलस में भी रहा हूँ| वहां के सामान्य जीवन में सभी प्रकार की उपलब्धियों—वातानुकूल भवन, वाहन, इतियादी—के होते मौसम की समानता का कोई महत्त्व नहीं रह जाता बल्कि स्वतंत्र भारत में इन संसाधनों के अभाव के कारण पैंसठ बर्षों से भारतीय राजनीति के क्षितिज पर विराजमान सत्तारूढ़ी कांग्रेस द्वारा उत्पन्न नागरिकों के भेढ़-बकरियों समान निष्क्रिय आत्मसमर्पण के वातावरण में समस्त भारत में अनैतिकता और भ्रष्टाचार अवश्य दृष्टिगोचर होते है| आपकी “जिंदगी इतने तूफानों से गुजरी है” कि आप शारीरिक और मानसिक स्तर पर धीमे हो चुके हैं| इस कारण आप कांग्रेस के प्रतिद्वंदी नरेंद्र मोदी के विरोध में लिखे इस कुलेख को अनावश्यक तूल देकर अनजाने में स्वयं व दूसरों को कांग्रेस की गोद में बिठाने की चेष्ठा में लगे हुए हैं| काश, आपको औरों की टिप्पणियां पढते इतना ज्ञान हो पाता कि यह कटाक्ष नरेंद्र मोदी पर नहीं बल्कि आप जैसे लाखों करोड़ो भारतीयों पर है और आपको इसका तत्परता से विरोध करना चाहिए| आपकी तरह मैं स्वयं आम आदमी पार्टी की ओर झुका हूँ और अरविंद केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, व अन्य राष्ट्रवादी लोगों का सम्मान करता हूँ| मैं आज के भारतीय युवा को प्राय: सुझाव देता हूँ कि यदि वे देश में वर्तमान स्थिति से असंतुष्ट हैं तो किसी भी चुनिन्दा राष्ट्रवादी अभियान से जुड़ जाएं और उस अभियान को अपना सकारात्मक योगदान दें| आवश्यकता पड़ने पर अपने समानांतर कार्यक्रम द्वारा छोटे बड़े सभी राष्ट्रवादी अभियान संगठित हो अनैतिकता और भ्रष्टाचार में लिप्त वर्तमान व्यवस्था को एक अच्छा विकल्प दे पायेंगे|

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  2. अरुण कान्त शुक्ला

    अरुण कान्त शुक्ला

    मेरे व्यंग लेख “रजनीकांत बर्खास्त:रजनीकांत का कार्यभार नरेंद्र को सौंपा गया” पर आये कमेंट्स का जबाब…”आपदा में मानव जीवन को मदद पहुंचाते समय भेदभाव मानवता के खिलाफ अपराध” शीर्षक में एक लेख के रूप में प्रवक्ता को भेज दिए हैं, जल्द ही आप सभी लोगों को उपलब्ध हो जाएगा|

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  3. Dr. Dhanakar Thakur

    “केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया,”- सही है तो ऐसा नही होना चाहिए था -बिना भेद भावके सेवा कार्य होना चाहिए -वैसे दुसरे मुख्यमंत्रीयों को भी ऐसा करना था . एक राज्य सर्कार सभी को रेस्क्यू नहीं कर सकती – हमारी सेना ने अंतिम तक को निकला – उन्हें बधाई –

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  4. Dr. Dhanakar Thakur

    “केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया,”- sahee hai to aisaa nahe ehona chahiue thaa -bina abhedbhavke sewakary hona chahiye

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  5. आर. सिंह

    आर.सिंह

    श्री विजय दास जी , आपके प्रोफाइल में लिखा है कि आप भागलपुर के टी. एन. बी. कालेज में एसोसियट प्रोफ़ेसर है. इसके साथ ही आप आर.एस. एस. के स्वयं सेवक भी हैं(शायद). मैं मानता हूँ कि शुक्ल जी के व्यंग से आप बहुत आहत हुए हैं,पर इसका मतलब यह तो नहीं कि आप अपना संस्कार भूल कर बाजारूपण पर उतर आएँ. आर. एस.एस के के साथ कुछ मित्रों की वजह से मेरा बहुत नज़दीकी संबंध रहा है. मैं उनके ग्यान और उनके तर्क का कायल .रहा हूँ. उनलोगों को अपने कट्टर विरोधियों को भी तर्क के बल पर परास्त करते देखा है. उस पर भी आप साधारण आदमी नहीं ,बल्कि एक शिक्षा विद हैं. क्या यही संस्कार आप अपने छात्रों को दे रहे हैं? आख़िर ऐसा क्यों है कि मोदी समर्थक अपनी सब मर्यादाएँ ताक पर रख आए हैं? क्या वे चाहते हैं कि मोदी के विरुद्ध कोई आवाज़ न उठाए? यह बहुत ख़तरनाकप्रवृत्ति है,और तानाशाही को जन्म देती है. हास्य और व्यंग का जिंदगी में अपना स्थान है उसको वह स्थान न देना जिंदगी को एक ख़तरनाक मोड़ पर ला देगा.

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  6. आर. सिंह

    आर.सिंह

    अरुण कान्त शुक्ला जी,आपका प्रिय कोट है:”र्नदी के बहाव के साथ तो शव भी दूर तक तेज़ी के साथ बह जाता है , इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि शव एक अच्छा तैराक है।”
    तो आप यह लिंक भी देखिए:http://www.pravakta.com/up-stream

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  7. इंसान

    प्रो: विजोय दास जी, ऐसा लगता है कि कांग्रेस नें इन्हें न केवल पैसे दिए हैं बल्कि इनका स्वरूप ही कांग्रेस की देन है| इनका कटाक्ष, “वे देश में घूम घूम कर मांग करने वाले हैं कि भारत पर शासन करने वाले अधर्मियों को हटाकर देश की बागडोर उन्हें सौंपी जाए ताकि वे देश में धर्म का शासन लागू कर सकें, जिससे ईश्वर कुपित होकर केदारनाथ जैसा तांडव पुनः न करे|” अवश्य ही सरलमति व संशयी लोंगो के मन में नरेंद्र मोदी के राष्ट्रवाद का उपहास करना है| इन्हीं पन्नों पर आर सिंह जैसे पढ़े लिखे लोग इस विकृत मानसिकता के शिकार हो चुके हैं| स्वयं व्यक्तिगत रूप से इस कुलेख में मैं एक हिंदी-भाषी राष्ट्रद्रोही देख रहा हूँ| आज ऐसा लगता है कि फिर से फिरंगी जीवन-शैली से प्रभावित किसी कृष्ण धन घोष नें औरोबिन्दो को भारतीयत्व व देशप्रेम से वंचित कर रखने का प्रयास किया है| अनैतिकता व भ्रष्टाचार का तांडव करते भारत पर शासन करने वाले अधर्मियों से कुपित हो स्वयं ईश्वर राष्ट्रवादी नरेंद्र मोदी को हमारे बीच लाये है| आओ, उनका स्वागत करें|

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  8. P.C. RATH

    मोदी जी के वर्तमान हालत पर बहोत अफसोस होता है, उन्होने कैसी हालत भाजपा की कर दी , अलग चाल – चेहरा – चरित्र वाली पार्ती का सपन तूतता नजर आ रहा है , ऐसे विनाशकाल मे ऐसी हरकतो की अनायास हो जाना स्वाभाविक है . बाबा केदार उन्हे माफ करे.

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    • इंसान

      “बाबा केदार” तो उन्हें अवश्य माफ कर देंगे लेकिन स्वयं समाज में रहते उसी समाज को दीमक की भांति खोखला करते आप एक दिन दीमक के टीले पर बैठे दिखाई देंगे| आने वाले समय में आपकी संताने यदि देश के बाहर सभ्य परदेश जा नहीं बसतीं तो वे आपको जन्म जन्मांतर तक कोसती रहेंगी| ऐसे में आप “बाबा केदार” को ही याद करेंगे लेकिन बहुत देर हो चुकी होगी|

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      • Rtyagi

        निचोड़ में …आपने बहुत सुन्दर लिखा है मेरे “इंसान” भाई …

        बहुत सुन्दर, बधाई

        आर त्यागी

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      बिनु जी ,इस लिंक से यह तो पता नहीं चलता क़ि नरेन्द्र मोदी द्वारा कितने गुजरातियों को बाहर निकाला गया.विवाद नरेंद्र मोदी द्वारा किये गए कार्य पर नहीं है.विवाद तो उनके मीडिया एजेंट द्वारा प्रस्तुत किये गए आंकड़े पर है,जिस को उनके समर्थकों ने भी नरेंद्र मोदी को बदनाम करने क़ी साजिस करार दिया है. और कहा है क़ि नरेन्द्र मोदी के तरफसे ऐसा कुछ नहीं कहा गया. मेरे लिंक वाले आलेख के अंतिम दो परिच्छेद भी विचारणीय हैं,जो मोदी के बडबोलेपन का पोल खोलते हैं.

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      • बीनू भटनागर

        मान लिया मोदी बड़ बोले हैं 1500 को नहीं 2-3 हज़ार को या और भी कम को निकाला होगा देहरादून से अहमदाबाद वाली उड़ान मे किसी और राज्य के लोगों कैसे ले जाते माना वो फेंकू है पर पप्पू ने क्या किया ट्रक ऋषिकेष मे सामान के साथ खड़े रहे ये पता नहीं आगे सामान कैसे कौन ले जायेगा। राज्य सरकार और केंद्र सरकार एकपार्टी की हैं, कोई तालमेल नहीं, महाकुप्रबंधन की महा मिसाल।

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        • आर. सिंह

          आर.सिंह

          बीनू जी,मोदी समर्थकों से मेरा एक अनुरोध है कि मोदी के बारे में विवाद के बीच पप्पू को मत लाइए. ऐसा करके आप लोग न केवल मोदी को छोटा कर देते हैं,बल्कि पप्पू के कद को बहुत ज़्यादा बढ़ा देते हैं. मेरे जैसे लोग मोदी के पूर्ण समर्थक या अंध भक्त भले ही न हो,पर नरेंद्र मोदी को इतना छोटा भी नही समझते कि पप्पू की तुलना में उनकी कद को बढ़ाना पड़े.

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          • इंसान

            है न बात सच कि आप जैसे लाखों करोड़ों लोग दो बिल्लियों की तरह छोटे छोटे भेद-भाव में उलझ कर रह जाते हैं जबकि शैतान बंदर रोटी उड़ा ले जाता है? पप्पू को उसका कद-काठ नहीं आप जैसे लोगों की भीड़ सर पर बिठा कर आगे ले जायेगी| पप्पू के तो पाँव भी धरती पर न लगने देंगे!

  9. अनिल सिंह

    अपने ब्यंग्य को बिना जानकारी के न छोड़े ! मोदी जी का आना ही लाखों लोगों की जिंदगी दे दी ! क्युकी मुझे अच्छी तरह याद है ! १९ तारीख तक सिर्फ १३ हेलिकोप्टर काम कर रहे थे और युव राज ,स्वीडन में ऐश कर रहे थे माता राजनीती की बिषाद राजस्थान में बिछा रही थे प्रधान मंत्री मौन ! बहुगुणा स्वेटजर लैंड भागने की पूरी तैयारी कर चुके थे ! तब मोदी जी ने पाशा फेका ! और कारगर साबित हुवा ! सबकी नींद हराम हो गयी ! तंत्र मंत्र सभी काम करने लगे आप धापी में हेलिकोप्टर की संख्या ५० पर कर गयी ! मोदी जी को उतरने तक की मनाही थी ! सिर्फ अपने रिलीफ टीम को वह रखकर लोगों का मनोबल बढाया और जितना हो सका आस पास के लोगों को वापस ले गए !
    पर हाय रे मीडिया इसे भी कांग्रेसी ताल पर ताल देना शुरू की और कांग्रेसी प्रवक्ता खुद कहना शुरू कर दिए मोदी १५००० लोगों को २ रात में ही ले गए वे सुपरमैन है आदि आदि !
    पर इतना तो ठीक हुवा की उनका जाना कांग्रेस के लिए महंगा जरूर साबित हुवा पर आपदा में फसे लोगों को जीवन मिल गया ! नमन है ऐसे योद्धा को !!

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      I think I have given enough comment on this and should not write more about it,,but I would like to clarify that this is not the first time that Modi is boasting like this and it won’t be perhaps last time.
      Also,generally those people who are against this boasting of Modi are being equated with flatters of Papu(Rahul),but it should be remembered that this is far from truth.Mostly people are in between.they are not admirer of Modi and they don’t even recognize Rahul and they simply pity on those who bring that Guda in between such discussions

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  10. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.मधुसूदन

    प्रश्नः
    क्या नरेन्द्र मोदी ने अन्य राज्यों के मुख्य मंत्रियों को उनके अपने (यात्रियों को) नागरिकों को वापस लाने से रोका था?

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    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ.मधुसूदन

      प्रश्नः
      क्या नरेन्द्र मोदी ने अन्य राज्यों के मुख्य मंत्रियों को उनके अपने (यात्रियों को) नागरिकों को वापस लाने से रोका था? उन्हें प्रधान मंत्री बनाकर देखिए। फिर उत्तराखण्ड के मार्ग ही चौडॆ और प्रशस्त बन जाएंगे। कभी गुजरात के महामार्ग, कैसे कुछ वर्षॊं में चौडॆ हो चुके है, देख कर आयिए। आप कहेंगे कहीं विकसित देश में तो नहीं आ पहुंचे?

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      डाक्टर मधुसूदन , प्रश्न यह नहीं है कि उन्होंने रोका था या नहीं. प्रश्न यह है कि क्या यह संभव था? क्या नरेन्द्र मोदी ने असंभव को संभव कर दिखाया था? कुछ मोदी प्रशंसकों का यह भी कहना है कि मोदी जी ने ऐसा कभी नहीं कहा.मैंने जिस आलेख का लिंक उद्द्ध्रित किया है उसके अनुसार भी मोदी जी ने ऐसा नहीं कहा था,पर उनके द्वारा पेड़ एजेंसी ने यह कहा है. आखिर उस एजेंसी ने जो मोदी का प्रचार करने के लिए पैसा खाता है,उसने ऐसा क्यों कहा?

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      • डॉ. मधुसूदन

        डॉ.मधुसूदन

        मोदी को वहाँ जाने(?) शासन नें अनुमति ही नहीं दी, ऐसा समाचार है। इस समाचार की सच्चाई (?) अभी तो कमसे कम, सत्त्यापित नहीं मानी जाएगी।
        कुछ समय जाने दीजिए, छवि आप ही आप स्पष्ट हो जाएगी। जिस तथ्यों पर अभी कुछ भी स्पष्टता नहीं है, उसके विषय में बाट देखना ही उचित है।

        पर एक बात मुझे विश्वसनीय लगती है, कि, जिस मोदी ने “गुजरात समाचार” को भी रिश्वत नहीं दी थी, जब उनकी अपनी चुनावी स्थिति बिलकुल समस्या ग्रस्त थी, वह मोदी आज किस कारण भ्रष्ट हो जाएगा? {आप ऐसा मानने के लिए बाध्य नहीं है।}
        पर, सुश्री. लेखिका बीना जी भटनागर ने, मधु किश्वार का लिखा, और इकॉनोमिक टाईम्स का समाचार चिह्नित किया है, उसे देख सकते हैं।बहुत कुछ पारदर्शी है।
        मैं ने देखा है।मुझे विश्वसनीय लगता है।
        पर, आप के पैंतरे की दिशासे बाट देखना ही उचित लगता है।
        सच्चाई आप ही सामने आने पर आप भी देख सकते हैं।
        कुछ बाट ही देख लीजिए।
        वैसे गुजरात के सेवकों ने सभी को सहायता दी थी ऐसा समाचार भी है। पर हवाई मार्ग से गुजरात के ही लोगों को वापस लाये गए ऐसा मैं ने पढा।

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  11. बीनू भटनागर

    मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री होने के नाते जो किया उसमे क्या ग़लत है! दूसरे राज्य मे जहाँ कांग्रेस सरकार है वो क्या कर सकते थे ? बाढ़ के इलाकों का दौरा उन्होने नहीं किया, जो लोग निकाल लिये गये थे उन्हे देहरादून से गुजरात पंहुचा दिया। हाँ मन्दिर पुनर्निमाण की बात समयोचित नहीं है।

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  12. ​शिवेंद्र मोहन सिंह

    नकारे लोग सिर्फ मातम ही करते हैं, खुद कुछ करते बनता नहीं है और दूसरा करके दिखा दिया तो छाती में दर्द उठ गया. बहुत सुंदर स्यापा किया है शुक्ला जी.

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      आपलोग कृपया यह लिंक भी देखिए. ख़ासकर लिंक द्वारा प्रदर्शित आलेख का अंतिम दो परिच्च्छेद. मोदी के प्रशंसकों के लिए आई ओपेनर होना चाहिए.http://timesofindia.indiatimes.com/home/opinion/edit-page/Modis-Himalayan-miracle/articleshow/20765218.cms#write

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      • शिवेंद्र मोहन सिंह

        सिंह साहब आर्टिकल के साथ के कमेंट भी पढ़ लेते। एक भोजपुरी की कहावत है “आन्हर कुकुर बतासे भूंके” अर्थात अँधा कुत्ता हवा के झोंके की आहट को सुन कर भी भूँकने लगता है।

        कमोबेश यही हालत सबकी हो गई है, नमो ने किया या नहीं आप लोग हुवां हुवां शुरू कर देते हैं। अगले को मुफ्त का प्रचार मिल जाता है। फिर सबको मरोड़ उठने लगती है, मीन मेख निकलना शुरू। आर्टिकल के अनुसार APCO को प्रचार के जिम्मा दिया गया है, तो गलत क्या है? क्या नरेन्द्र मोदी ने जमीनी हकीकत में काम नहीं किया है? ३ बार हवाई बातों से ही सत्ता में जीत कर आया है। और जिन कामरेडों के पक्ष में आप बोल रहे हैं उन राज्यों की हालात भी आप देख रहे होंगे।

        आई ओपनर हमें नहीं सिंह साहब आप को चाहिए। कुछ ऐसे लोगों को सामने लाया जाए जिससे देश आगे बढे। आजादी के ६३ बाद भी देश की हालत क्या है आपको समझ में नहीं आ रहा है। राजा ख़राब है जिस कारण प्रजा भी ख़राब हो रही है (यथा राजा तथा प्रजा) ये सूक्ति १०० फ़ीसदी सच है। शास्त्री जी के उपवास का उदहारण सामने है।

        — सादर,

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        • आर. सिंह

          आर.सिंह

          शिवेंद्र मोहन सिंह जी, टिप्पणी और आलेख का अंतर आप भी समझते हैं. मैं भी उस आलेख के टिप्पणीकारों में हूँ. अभी भी ई बुड्ढ़ा एतना खराब हालत में नैइखे कि एकरा खातिर आन्हर कुककुर वाला उपमा के ज़रूरत पड़े. अब बात आपकीं समझ में आ जानी चाहिए. प्रवक्ता के इन पृष्ठों पर मेरे बारे में बहुत कुछ कहा गया है,पर मैं बायस्ड (पक्षपात पूर्ण ) विचारों से कभी विचलित नहीं होता. लेखक ने आपने आलेख में जिन आँकड़ों को सम्मिलित किया है,उसको किसी टिप्पणी कार ने नहीं खंडन किया है. ज़्यादा टिप्पणियाँ उसके जन्म कुंडली यानी उसके संबंधो को उजागर करने के लिए लिखी गयी है,पर उससे क्या अंतर पड़ता है.? उससे क्या नरेंद्र मोदी का बड़बोलापन प्रभावित होता है?

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          • शिवेंद्र मोहन सिंह

            सिंह साहब क्या व्यक्तिगत रूप से प्रेस कांफ्रेंस १५००० लोगों को निकालने का दावा किया गया था? तथाकथित मिडिया मुग़ल, कामरेड, और कांग्रेसियों से ये हल्ला मचाया था। और आपको मैंने ब्रूटस की संज्ञा दी थी न की कुकुर की, लेकिन ये भाड़ों की जमात के लिए मैंने भोजपुरी वाली कहावत जरूर कही थी। और जिन आंकड़ों को ख़ारिज करने की बात आपने कही है वो शुक्ला जी के अपने दिमाग की उपज हैं न की अधिकारिक डाटा।

            और क्या आप बीनू बहन के लिंक को ख़ारिज कर सकते हैं? अनिल सिंह जी की टिप्पणी क्या हकीकत बयानी नहीं करती है की केंद्र सरकार, राज्य सरकार का कैसा रवैया था। और मोदी के आगमन के बाद स्थितियां क्या हो गईं। जिन तथ्यों को को समझना चाहिए था वो छोड़ आपने भी १५००० …. १५००० की रट पकड़ ली। आपने शुक्ला जी से १५००० के बारे में पूछा एक बार भी ? जबकि आपकी एक्स्पेक्टेसन थी की कोई टिप्पणी कार १५००० के डाटा को सर्टिफाई करे। वाह जी वाह।

            और भोजपूरी में “बुड्ढ़ा” शब्द का इस्तेमाल नहीं होता है उसकी जगह “बुढवा” शब्द का इस्तेमाल होता है।

      • शिवेंद्र मोहन सिंह

        सिंह साहब बीनू बहन का लिंक भी देख लीजियेगा, इन कामरेडों से हमें कोई लेना देना नहीं है क्योंकि ये तो हैं ही द्रोही। लेकिन जब आप जैसे लोग इनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं ब्रूटस की तरह तो दिक्कत होती है।

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        • इंसान

          शिवेंद्र जी, आप व्यर्थ में कांग्रेस रचित वाद-विवाद के चक्रव्यूह में फंसे चले जा रहे है| इन महोदय नें बीनू बहन द्वारा दिए लिंक पर भी प्रश्न दाग दिया है| यह समय की विडंबना है कि तथाकथित “आजादी के ६३ वर्षों बाद भी देश की हालत” को देखते समझते हुए यह अदूरदर्शी महोदय व और लाखों करोड़ों भारतीय इस सत्य को अनदेखा करने की हठधर्मी कर रहे हैं| अपनी “अमरीका प्रवास” के संस्मरण के अनुसार इन्हें दिल्ली व डैलस में कोई अंतर नहीं दिखाई दिया| अपने बेटे द्वारा तत्काल पूछने पर कि “क्या वहां भी उतनी ही गंदगी और उतना ही प्रदुषण है?” इन्हें तुरंत महसूस हुआ कि वह अंतर तो है ही| मुझे कदापि कोई अचरज नहीं होता यदि दिल्ली स्थित अपने “महल” में सुरक्षित बैठे यह महोदय अपने बेटे से कह देते कि उन्हें देश में गंदगी और प्रदूषण से क्या लेना देना?

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          • आर. सिंह

            आर.सिंह

            इंसान जी, नाम तो आपने अपना अच्छा रख छोड़ा है,पर समझ में थोड़ीं कमी नज़र आ रही है. इन्ही कालमों में कुछ लोगों ने मुझे कम्युनिस्ट भी कहा है,जबकि कम्युनिस्टों से मेरा हमेशा ३६ का रिश्ता रहा. पर केवल विचारों के तौर पर,व्यक्तिगत रूप में कभी नहीं. आपने मेरी रचनाओं को पढ़ने का कष्ट किया है, तो मुखौतेवाला पढ़िए. आपको मेरे विचारों की कुछ झलक वहाँ से मिल जाएगी. प्रवक्ता पर मेरी प्रोफाइल भी है उस पर पहले नज़र डालिए,तब मेरे व्यक्तिगत जीवन के बारे में टिप्पणी किजिये. ऐसे महलों का तो मैने कभी ख्वाब भी नहीं देखा,उसमे रहने की कौन कहे?

        • आर. सिंह

          आर.सिंह

          शिवेंद्र मोहन सिंहजी,बीनू जी के लिंक पर मैं अपनी टिप्पणी दे चुका हूँ. रह गयी कामरेडों की बात तो इससे मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता कि कौन क्या है. मैं अपनी टिप्पणी विषय के आधार पर देता हूँ. इसके बहुत से उदाहरण इसी प्रवक्ता में हैं. मुझे संतोष इस बात का है कि इस मामले में मैं अकेला नहीं हूँ.

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          • इंसान

            भाई साहिब, आपको तो कम्युनिष्ट और न जाने क्या क्या कहा गया होगा लेकिन लोग तो मेरे नाम में ही उलझ कर रह जाते हैं| प्रवक्ता.कॉम के इन्हीं पन्नों पर एक “वरिष्ठ पत्रकार” ने मुझे इंसान नहीं जानवर, पापी, पापी साधु जैसे शब्दों से अलंकृत किया है| आपने भी हमारे नाम से नासमझी को तोल कर रख दिया| हमें कोई रंज नहीं| कोलों की दलाली करेंगे तो मूँह तो काला होगा ही! सार्वजनिक प्रक्षेत्र में अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किये स्वयं आपके विचारों पर मेरी टिप्पणी आपके “व्यक्तिगत जीवन” की ओर नहीं बल्कि आपकी अपरिपक्व व असंतुलित सोच की ओर संकेत करती है| नरेंद्र मोदी पर यहाँ सफेद झूठ पर आधारित भद्दे व क्रूर कटाक्ष को हिंदी साहित्यिक व्यंग की संज्ञा दे आप इस कुलेख को अनावश्यक तूल दिए जा रहे हैं| मुझे तो अचम्भा तब हुआ जब आपने दिल्ली और डैलस में कोई अंतर नहीं देखा और मैं अब डर रहा हूँ कि क्या आप जैसे पढ़े-लिखे महानुभाव नरेंद्र मोदी और यहाँ कटाक्ष से लाभार्थी कांग्रेस में अंतर देख पाएंगे? अवश्य ही समस्त भारत में चारों ओर फैली गंदगी और प्रदूषण से अनभिज्ञ अपने अपने “महलों” की सुरक्षा व उनमें प्राप्य सुख-साधनों से घिरे कांग्रेस का समर्थन करते लोग देश को भाड़ में धकेल रहे हैं|

  13. DR.S.H.Sharma

    This is obvious that you look at problems through the glasses of Communism. I would be a good thing if you see things for a change as an Indian.
    What is wrong in taking away the stranded people from Gujarat , please try to see good in something and learn to appreciate others who are doing good work and encourage them so they do more good . Are people from Gujarat not Indians?There were many from other parts of India but living in Gujarat . Well done Modi jee.
    Think that they were Indians, full stop.

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    • आर. सिंह

      आर.सिंह

      इसको व्यंग्य नहीं भी माना जा सकता था,अगर नरेन्द्र मोदी ने स्वयं यह घोषणा न की होती क़ि उन्होंने एक दिनमें १५००० गुजरातियों को बचाया. उन्होंने तो व्यंगकार को स्वयं मशाला मोह्या करा दिया रही बात केवल गुजरातियों को बचाने क़ि,तो उन्होंने यह सन्देश भी दिया क़ि गुजरात के मुख्य मंत्री के नाते उन्होंने गुजरातियों को बचाया .अगर उन्हें भारत का प्रधान मंत्री बनाया जाये ,तो वे अपनी इस अलौकिक शक्ति का प्रयोग भारत के अन्य तुच्छ प्राणियों के लिए भी कर सकते हैं.

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