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    मोदी युग की ओर …

    वीरेन्द्र सिंह परिहार-

    modi in japan इसमें कोई दो मत नहीं कि देश में मोदी युग की सिर्फ शुरूआत ही नहीं हो चली है, बल्कि देश एक तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रंग में रंगता भी जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री देश का नेता होता है। यद्यपि व्यावहारिक रूप से सभी प्रधानमंत्रियों पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता, खास तौर पर मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों पर-जो देश को नेतृत्व देने के बजाय स्वतः किसी के निर्देशों के पालन करने को ऑँखें मूंदकर तत्पर रहते थे। यद्यपि ऐसा कहा जा सकता है कि जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री होते हुए देश के नेता भी थे। उनकी दिशा सही थी या गलत-यह बात अपनी जगह पर है। यद्यपि 1998 से 2004 के मध्य प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी को भी देश का नेता कहा जा सकता है। पर बहुत मामलों में वह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं थे, क्योकि वह गठबंधन के प्रधानमंत्री थे। पर इन प्रधानमंत्रियों की तुलना में नरेन्द्र मोदी इतने अल्प कार्यकाल में यह साबित कर चुके है कि वह सचमुच देश के नेता है। वह ऐसे नेता हैं जो राष्ट्र को स्पदिंत, आन्दोलित भर ही नहीं कर सकते, उसे दिशा भी दे सकते हैं। उनकी निगाहें सम्पूर्ण राष्ट्र पर, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर है। पर उनकी एक और बड़ी विशेषता है, वह अपने धुनों पर या मात्र इच्छा पर फैसलें नहीं करते। वह सबकी सुनते हैं, मंत्रिमण्डल की बैठक में सहयोगी मंत्रियों का दृष्टिकोण जानने का प्रयास करते हैं, तो अधिकारियों को भी निर्भीक होकर अपनी बातें रखने को कह ही चुके हैं। आम जनतेा के विचारों का भी वह बेबसाइट और दूसरे माध्यमों से भरपूर जानने, समझने की कोशिश करते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि उनके प्रत्येक कृत्य के पीछे उनका कोई व्यक्तिगत एजेण्डा न होकर मात्र देश-हित ही होता है।

    देश को सही दिशा में ले जाने के लिए इन्होने सर्वप्रथम अपनी पार्टी भाजपा में नई परंपराएं डालने की दिशा में कार्य किया। पहले संसदीय बोर्ड के किसी भी सदस्य को कहीं आने-जाने के लिए चार्टर प्लेन की सुविधा पाने का हक था। मोदी के नेतृत्व में अमित शाह के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर यह परंपरा समाप्त कर दी गई। यहां तक कि राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अब चार्टर प्लेन में यात्रा न कर नियमित उडान से यात्रा करते हैं। ऐसा कुछ नहीं कि भाजपा इस दिशा में सक्षम नहीं थी। पर इसका एक बडा मायने है, सर्वप्रथम पार्टी के अंदर से ही सुधार और मितव्ययिता का दौर शुरू हो। फिजूलखर्ची और अनावश्यक प्रदर्शन खत्म हो। भाजपा के लोगों में सादगी एवं शुचिता का प्राबल्य हो। ऐसे कदमों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भाजपा में भी आने वाले दिनों में नया रूपांतरण देखने को मिल सकता है।

    नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता संभालते ही विदेशी बैंको में जमा काले धन को लाने के लिए उच्च स्तरीय एस0आई0टी0 बना दी। जो सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद तीन साल से नहीं बन पाई थी। दागी और आरोपी सांसदों-विधायकों के आपराधिक प्रकरण, साल भर में निपटाने की घोंषणा भर नहीं कर दी, बल्कि इस दिशा में तेजी से प्रयास भी चल रहा है। निःसन्देह राजनीति के क्षेत्र में व्याप्त गंदगी को हटाया जा सका तो देश के राजनीतिक माहौल में ही नहीं, पूरे समाज जीवन में एक गुणात्मक परिर्वतन देखने को मिल सकेगा। लोकसभा चुनावों के दौरान वंशवाद या परिवारवाद को नरेन्द्र मोदी ने एक बड़ी चुनौती बताया था। इस चुनौती के निर्मूलन के लिए उन्होनें मंत्रियों को साफ कह दिया कि उनके विभाग में उनके परिवार के लोगों एवं संबंधियों के व्यावसायिक हित नहीं होने चाहिए। सांसदों को कह दिया गया कि वह परिवार वालों या संबंधियों को अपना निजी सचिव या सहायक नहीं बनाएंगें। भ्रष्टाचार पर प्रहार के लिए अधिकारियों को छः माह में अपने और अपने परिवार की संपत्ति घोषित करने भर को नहीं, कह दिया गया, बल्कि उसे बेबसाइट पर लोड करने को भी निर्देशित कर दिया। ताकि आम लोगों को भी उनक सम्पत्ति के बारे में जानकारी हो सके।

    नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय हितों की दृष्टि से जहां सबसे पहले भूटान और नेपाल से संबंध प्रगाढ़ किए। वहीं जापान की यात्रा कर वहां से संबंधों को लेकर एक नया अध्याय लिख दिया। अब जापान आने वाले दिनों में हमारे देश में खरबों को विनिवेश ही नहीं करेगा, बल्कि हमें आधुनिकतम टेक्नालाजी भी देगा, जिससे हम दुनिया के साथ दौड़ सकें। सबसे बड़ी बात यह कि भूटान, नेपाल और जापान जैसे देशों को अपने साथ खड़ा कर मोदी ने चीन के दबाव एवं दादागिरी को समाप्त करने के लिए एक सशक्त सुरक्षा-घेरा बना दिया है। मोदी की विदेश नीति की सफलता का आलम यह है कि दुनिया के सभी प्रमुख देश भारत से सम्बन्ध प्रगाढ़ करना चाहते है, जिनमें चीन को भी कहा जा सकता है। इसका आशय एक यह भी है कि दुनिया के देशों को अब पता चल गया है कि भारत एक ताकतवर राष्ट्र बनने की राह पर है।

    मोदी के सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के बाद महंगाई को लेकर बडा हो-हला मचा। विरोधी तो ठीक है, कई दूसरे लोग भी तज कसने लगे कि लो अच्छे दिन आ गए। लेकिन मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते उस पर शीघ्र ही काबू पा लिया और टमाटर तथा प्याज जैसी वस्तओं के रेट नियंत्रित कर दिए। इतना ही नहीं, पेट्रोल की कीमतें कम होने से लोगो को काफी राहत मिली।

    नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद एक जो बड़ा ऐतिहासिक काम किया, वह राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बनाना था। जबकि यह बिल विगत कई वर्षो से लटका पड़ा था। अब उम्मीद  की जानी चाहिए कि इस कानून के बनने से न्यायपालिका में स्वेच्छाचारिता की प्रवृति पर रोक लगेगी और उसमें खदबदा रहे भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लग सकेगा। जो लोग यह कहते है कि न्यायिक आयोग के बनने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और उसमें कार्यपालिका का दखल बढ़ेगा, वह वस्तुतः एक दुष्प्रचार मात्र है। क्योकि छः सदस्यीय न्यायिक आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस समेत 2 वरिष्ठ न्यायाधीश भी होंगे। इसके अलावा इसमें विपक्ष के नेता भी होंगे। कोई भी फैसला पंाच सदस्यों की सहमति के बाद ही किया जाएंगा और यदि राष्ट्रपति किसी प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते है, तो सभी छः सदस्यों के सहमत होने पर ही उपरोक्त निर्णय लागू हो सकेगा। इस तरह से अब सच्चे अर्थो में संविधान की भावना के तहत शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत लागू होगा, क्योकि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्तियां, स्थानान्तरण और उनकी शिकायते सुनने का काम न्यायिक आयेाग करेगा। अभी तक यह काम सर्वोच्च न्यायालय का एक कालेजियम ही करता था। रहा सवाल उनके कदाचरणका तो, इसकी सुनाई का कुल मिलाकर कोई प्रावधान ही नहीं था।

    नरेन्द्र मोदी ने कोई समाजवाद लाने या गरीबी हटाने का नारा नहीं दिया, पर वह गरीबी उन्मूलन कटिबद्ध दिखते है, तभी तो जिनके बैंक खाते नहीं है, ऐसे 15 करोड़ परिवारों के बैंक खाते खोलने का काम व्यापक स्तर पर शुरू हो गया है। इसमें एक लाख रूपयें का दुर्घटना बीमा के साथ छः माह बाद पांच हजार रूपयें की राशि भी निकाली जा सकेगी।

    मोदी भारत को संपन्न और शक्तिशाही ही नहीं, वह साफ-सुथरा और स्वस्थ देश बनाना चाहते है। इसलिए घर-घर में शौचालय सुविधा और प्रत्येक नागरिक को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयासरत है। गंगा और सभी प्रमुख नदियों को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। भ्रष्टाचार के निमूर्लन के लिए लोकपाल सर्च कमेटी को व्यापक अधिकार दिए गए हैं ताकि भ्रष्टाचार को जड़-मूल से मिटाने के लिए एक सशक्त लोकपाल संस्था बन सके।

    15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से उन्होने जब मेरे को क्या, मुझे क्या, जैसी व्यक्तिवादी, निहित स्वार्थ वाली अवधारणा पर चोट किया, तो उन्होने बता दिया कि सबके हित के लिए स्वार्थ के दायरे से बाहर निकलना होगा। साथ ही सब चलता है, पर प्रहार कर यह बता दिया कि अब जंगल-राज नहीं, कानून का राज चलेगा।

    05 सितम्बर को शिक्षक-दिवस पर उन्होंने जिस ढ़ंग से देश के भविष्य बच्चों के साथ संवाद किया और उन्हे किताबी कीड़ा न बनकर खेलने-कूदने और उत्कृष्ट पुस्तकें पढ़ने को प्रेरित किया, इससे यह पता चलता है कि वह आने वाली पीढ़ी को किस तरह से संस्कारवान और नैतिक चरित्र से भरपूर बनाना चाहते हैं। क्योकि उन्हे अरस्तु की इस बात का पता है कि -‘राष्ट्र निर्माण का कार्य शासन पद्धति के आधार पर नहीं, वहां के नागरिकों के चरित्र के आधार पर होता है।’ कुल मिलाकर देश ने मोदी को जैसा माना था, उससे कहीं ज्यादा ही पाया है। तभी तो उनके समर्थन का कारवां दिनों-दिनों बढ़ता जा रहा है। ताजा जनमत सर्वे के अनुसार यदि आज चुनाव हो तो भाजपा एवं एनडीए की सीटें और बढ़ेंगी।वर्तमान परिवेश में यही कहा जा सकता है कि ‘जहां ही देखों, मोदी-मोदी।’ कुल मिलाकर देश में तेजी से मोदी युग की शुरूआत हो चली है।

    वीरेंदर परिहार
    वीरेंदर परिहार
    स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

    2 COMMENTS

    1. अब तक का सही विश्लेषण, जिस से सहमत हुआ जा सकता है ,बाकी इतिहास स्वयं ही लिखा जाता रहता है,और समय उसका मूल्यांकन करता है,

    2. आलेख में प्रस्तुत विषय पर आपके राष्ट्रवादी व सकारात्मक विचारों के लिए आपको मेरा साधुवाद। मैं निष्ठापूर्वक इच्छा करता हूँ कि श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शीघ्र ही चारों ओर प्रगति होने पर देश में रहते सभी नागरिकों में राष्ट्र के प्रति गर्व व स्वयं उनमे आत्मसम्मान जाग जाए।

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