लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-गर्वित बंसल-

cartoonरात्रि को सोने से पहले फेसबुक अकाउंट की हलचल का जायजा लेते हुए अचनाक से दृष्टि एक कार्टून पर पड़ी ! लगा कि ये कार्टून कुछ बता रहा है, कुछ बोल रहा है! कार्टून का बारीकी से जायजा लेते हुए समझ आया कि यह तो आज़ाद हिंदुस्तान की उस तथाकथित महान परम्परा का बखान कर रहा है जिसमें केवल एक परिवार को ही  महान कहा जाता रहा है !

२००९ मुंबई में वर्ली सी लिंक का उद्घाटन करने इसी परिवार की सदस्या मैडम सोनिया गांधी पहुंचीं थीं ! शरद पंवार साहब ने इस सेतु का नाम राजीव गांधी के नाम पर रखा था ! तब बालासाहेब ठाकरे ने इसका विरोध करते हुए वीर सावरकर के नाम पर  इसका नामकरण करने को कहा था ! सामन्य दृष्टिकोण में तो ये सारी बाते राजनीती की प्रतीत होती है ! लेकिन ऐसा नहीं है ! ये सारी बातें सोचने पर मज़बूर करती है कि क्या नेहरू गांधी परिवार ही इस राष्ट्र की विरासत है ? क्या नेहरू गांधी ने ही इस देश को आज़ादी दिलाई ? इस राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि इस देश में आज़ादी के दीवानों की एक लम्बी सूची है, जो देश के लिए जीये हैं और देश के लिए मरे हैं ! फिर ये कैसा भ्रम इस देश में फैलाया गया ! क्या आज़ादी के दीवानों की याद केवल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल गा कर या चाचा नेहरू के जन्मदिन पर स्टॉल लगाकर ही ताजा की जा सकती है ? नहीं ! बिलकुल नहीं, ये यादें वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारियों के बिना अधूरी हैं जिन्होंने अपना सब कुछ माँ भारती के चरणों में समर्पित कर दिया ! १९ वर्ष की आयु में बैरिस्टर की पढ़ाई करने हेतु लन्दन जाने वाला यह युवक चाहता तो स्वर्णिम भविष्य बना सकता था, परन्तु नहीं मेरा देश गुलाम है मेरी माँ , भारत माँ कष्टों में है ! उसको मुक्ति दिलाना ही मेरे जीवन का धेय्य है ! इस दिवास्वप्न को लेकर अपना सबकुछ माँ भारती के चरणों में अर्पित कर दिया ! दुनिया के इतिहास का एक मात्र क्रान्तिकारी जिसको सब नियम कायदे कानून ताक पर रख कर विदेशी धरती पर गिरफ्तार किया गया ! दुनिया के इतिहास का एक मात्र क्रान्तिकारी जिसे दो आजन्मो का कारावास हुआ ! क्या हुआ उसके साथ कोल्हू के बैल की तरह अंदमान निकोबार की जेल में जोत दिया गया ! इतने कष्टों को भी उस दीवाने ने हँसते हँसते सह लिया ! इन दीवानो को हमने क्या सिला दिया ! भुला दिया ? ये कार्टून केवल दिखाता नहीं बोलता भी है !
हम तो इश्क़ – ए – आज़ादी में सब कुछ भुला बैठे

तुम हमको भुला बैठे , तुम हमको रुला बैठे

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