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Archive for the Category ‘धर्म-अध्यात्म’


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भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?

भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ? विनायक शर्मा संसद की प्रथम बैठक की 60 वीं वर्षगांठ पर सदन में बोलते हुए लालूप्रसाद यादव ने एक बार फिर सांसदों के आचरण पर बोलनेवालों को घेरते हुए संसद की मर्यादाओं और लोकतंत्र पर खतरे के नाम पर उन्हें लक्ष्मण रेखा में बांधने का प्रयत्न किया है. देश की जनता ...

May 16th, 2012 | लेखक : विनायक शर्मा | 48 views | 1 Comment »
Posted in Category: चिंतन | Tags: evil words used by parliamentarians, अभद्र भाषा

खुद को ऊँचा उठाने इतना भी नीचे न गिरे

खुद को ऊँचा उठाने इतना भी नीचे न गिरे  डॉ. दीपक आचार्य हर दिशा में लोगों की भीड़ बेतहाशा भाग रही है। सभी को अपने नम्बर बढ़ाने की पड़ी है। जो नम्बरी हैं उन्हें भी, और जो गैर नम्बरी हैं उन्हें भी। प्रतिभाओं और हुनर से बेखबर या कि शून्य लोगों की सबसे बड़ी समस्या ही यह है कि वे ...

May 15th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 38 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन, चुनाव विश्‍लेषण | Tags: dont try to be so great, खुद को ऊँचा उठाने इतना भी नीचे न गिरे

हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा

हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा वेदान्त का सर्वविदित सूत्र है - एकं सद विप्रा बहुधा वदन्ति - एक ही सत्य विद्वान अनेक तरह से कहते हैं। बाइबिल में भी सत्य है, कुरान में भी सत्य है, वेदों में भी सत्य है। ये सभी सत्य अन्त में जाकर परम सत्ता के परम सत्य में विलीन हो ...

May 14th, 2012 | लेखक : विपिन किशोर सिन्हा | 74 views | 2 Comments »
Posted in Category: जरूर पढ़ें, धर्म-अध्यात्म, महत्वपूर्ण लेख | Tags: हिंदुत्‍व

बद् दुआएँ न लें,ये ही करती हैं बरबाद

बद् दुआएँ न लें,ये ही करती हैं बरबाद  डॉ. दीपक आचार्य दुआओं का जितना असर होता है उससे कहीं ज्यादा असर होता है बद् दुआओं का। क्योंकि दुआएँ देते वक्त प्रसन्नता का भाव होता है और बद्दुआएं देते वक्त आक्रोष का। सामान्यतः किसी भी व्यक्ति के लिए चरम प्रसन्नता के क्षण जीवन में बहुत थोड़े आते हैं लेकिन चरम क्रोध ...

May 13th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 63 views | 1 Comment »
Posted in Category: चिंतन | Tags: बद् दुआएँ न लें

पशुता का लक्षण है जुगाली

पशुता का लक्षण है जुगाली अशुद्ध मुख से आती है दरिद्रता डॉ. दीपक आचार्य मनुष्य का शरीर धारण कर लेने से ही जीवन सफल नहीं हो जाता बल्कि मनुष्यता की पूर्णता और जीवन लक्ष्य पाने के लिए जिन सिद्धान्तों, आचार-विचारों और व्यवहारों की जरूरत होती है उनका पूरी तरह परिपालन करने से ही मनुष्य योनि की प्राप्ति ...

May 12th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 31 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: अशुद्ध मुख से आती है दरिद्रता, पशुता का लक्षण है जुगाली

तय सीमा में करें काम-काज

तय सीमा में करें काम-काज  डॉ. दीपक आचार्य संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के ...

May 12th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 34 views | 1 Comment »
Posted in Category: चिंतन | Tags: सीमा में करें काम-काज

दवा के नाम पर ज़हर बन चुकी थी हज सब्सिडी/इक़बाल हिंदुस्तानी

दवा के नाम पर ज़हर बन चुकी थी हज सब्सिडी/इक़बाल हिंदुस्तानी 0 मुसलमानों को नहीं सरकारी कारिंदों को फायदा पहुंच रहा था! सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह दस साल के भीतर मुसलमानों को हजयात्रा के दौरान दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म करे। यह संभवतया पहला मौका है कि किसी वर्ग की सब्सिडी ख़त्म होने का उसी वर्ग ...

May 11th, 2012 | लेखक : इक़बाल हिंदुस्तानी | 51 views | 1 Comment »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म | Tags: हज सब्सिडी

इस्लाम और ज़िहाद

इस्लाम और ज़िहाद विपिन किशोर सिन्हा अपने आरंभिक दिनों में इस्लाम धर्म एक उदारवादी, सुधारवादी, मानवतावादी और प्रगतिशील धर्म के रूप में दुनिया के सामने आया। यही कारण था कि अत्यन्त अल्प समय में यह विश्वव्यापी हो गया। यह सत्य है कि इसके विस्तार के लिए सत्ता और तलवार का सहारा लिया गया लेकिन ...

May 10th, 2012 | लेखक : विपिन किशोर सिन्हा | 108 views | No Comments »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म | Tags: इस्‍लाम, जेहाद

अजब बाबाओं का गजब धर्मयुद्ध

अजब बाबाओं का गजब धर्मयुद्ध डॉ. शशि तिवारी भारत प्रारंभ से ही साधु-संत फकीर, ऋषि मुनियों की भूमि रहा है! अध्यात्म-ज्ञान के क्षेत्र में भारत का पूरे विश्व में एक अलग ही स्थान है, फिर बात चाहे भगवान राम, कृष्ण महावीर ही क्यो न हो, पूरे विश्व में हर एक शांति की खोज में लगा हुआ ...

April 30th, 2012 | लेखक : डॉ0 शशि तिवारी | 120 views | 1 Comment »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म | Tags: अंधविश्‍वास

पालतू होकर आका बदलते रहें

पालतू होकर आका बदलते रहें  डॉ. दीपक आचार्य मस्ती चाहें तो स्वाभिमान से रहें वरना पालतु होकर आका बदलते रहें जीवन का सबसे बड़ा दर्शन है आनंद से जीवनयापन और मानवीय लक्ष्यों की पूर्णता। इसके लिए विभिन्न मार्ग हैं जिन पर चलकर आनंदमय जीवन जीया जा सकता है। एक मार्ग परम्परा से चला आ रहा है और वह ...

April 29th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 37 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: पालतु होकर आका बदलते रहें, स्वाभिमान से रहें

परायेपन का अहसास

परायेपन का अहसास डॉ. दीपक आचार्य परायी सामग्री देती है परायेपन का अहसास जो अपना है वही दे सकता है अपनेपन का अहसास। जो पराया है उसे अपनाने पर जीवन के हर क्षण में परायेपन का अहसास होता है। यहाँ बात किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बल्कि सामग्री के बारे में की जा रही ...

April 26th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 33 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: परायेपन का अहसास

वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें

वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें डॉ. दीपक आचार्य वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें भविष्य की आशंकाओं से मुक्त रहे जो लोग आज को सामने रखकर प्रसन्नता का भाव रखते हैं वे जीवन में भविष्य की समस्याओं से मुक्त रहते हैं। जिसका वर्तमान अच्छा होता है उसका भविष्य अपने आप अच्छा होता चला जाता है। इसलिए वर्तमान की प्रत्येक घटना ...

April 26th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 43 views | 1 Comment »
Posted in Category: चिंतन | Tags: be happy in present, वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें

औरों पर न थोपें अपनी कार्यशैली दूसरों की मौलिकता को भी दें आदर

औरों पर न थोपें अपनी कार्यशैली दूसरों की मौलिकता को भी दें आदर - डॉ. दीपक आचार्य जब से आत्म मूल्यांकन, चिंतन और विश्लेषण की प्रवृत्तियाँ समाप्त हो चली हैं, हमारे यहाँ हर क्षेत्र में स्वयं को महानतम बुद्धिमान और योग्यतम समझने का शौक दूर-दूर तक अपने पाँव पसार चुका है। कहीं भी आदमी की योग्यता की कोई कसौटी नहीं रही। व्यक्तित्व की ऊँचाइयों को ...

April 24th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 40 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: conclusion, चिंतन, मूल्यांकन, विश्लेषण

दुर्भाग्य के साये में जीते हैं पेढ़ियों पर बैठने वाले

दुर्भाग्य के साये में जीते हैं पेढ़ियों पर बैठने वाले - डॉ. दीपक आचार्य हमारा बैठना-उठना भी हमारे व्यक्तित्व और भविष्य का संकेत देता है। आम तौर पर मनुष्य को निरन्तर कर्मशील रहना चाहिए और जो ऐसा नहीं कर पाते हैं और समय गुजारने के लिए अवसर और स्थान तलाशते रहते हैं वे अपने जीवन के अमूल्य क्षणों को खो देते ...

April 24th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 54 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: badluck, दुर्भाग्य

समस्याओं के वक्त स्नेह का सम्बल दें, उपेक्षा और प्रताड़ना का भाव त्यागें

समस्याओं के वक्त स्नेह का सम्बल दें, उपेक्षा और प्रताड़ना का भाव त्यागें - डॉ. दीपक आचार्य समस्याएँ हर किसी के जीवन में सामने आती हैं। मनुष्य के जीवन में समस्याओं और इच्छाओं का कोई अंत नहीं है ये सागर की तरह गहरी और आसमान की तरह विराट व्यापक हैं। कई पीड़ाएं और समस्याएं पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम होती हैं तो कुछ ...

April 24th, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 34 views | 1 Comment »
Posted in Category: चिंतन | Tags: problems, wishes, इच्छाओं, समस्याओं

वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता

वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता राजीव गुप्ता विश्व गुरु बनने का सपना संजोने वाली अधिकांश भारतीय संततियों का ध्येय जब अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए राष्ट्र हितों के मानक मूल्यों से समझौता करने तक की तरफ अग्रसर होने लगे तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हमने अब अपने पुरखों की दी हुए विरासत को ...

April 23rd, 2012 | लेखक : राजीव गुप्ता | 64 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म | Tags: importance of ram in present scenario, राम की प्रासांगिकता

कट्टरपंथी अपने ही संप्रदाय के दुश्मन !

कट्टरपंथी अपने ही संप्रदाय के दुश्मन ! तनवीर जाफरी पूरी दुनिया में इन दिनों उदारवाद बनाम कट्टरपंथ रूपी एक विश्वव्यापी बहस छिड़ी हुई है। तमाम कट्टरपंथी व रूढ़ीवादी अपने अपने स प्रदायों (धर्मों)को सर्वोच्च या सर्वोपरि बताने की होड़ में लगे हैं। वैसे तो इस बात में कोई हर्ज भी नहीं है यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म, विश्वास ...

April 22nd, 2012 | लेखक : तनवीर जाफरी | 59 views | 1 Comment »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म | Tags: कट्टरपंथी

शांत चित्त ही दे सकता है सुकून

शांत चित्त ही दे सकता है सुकून डॉ. दीपक आचार्य शोरगुल में रमना पागलपन से कम नहीं, आज का सफर कई जोखिमों से भरा हो चला है। जोखिम बाहर के भी हैं और भीतर के भी। कई जोखिम दुर्भाग्यजनित हैं तो कई मानवजनित। अनायास आ टपकने वाले जोखिमों के बारे में कोई कुछ नहीं कर सकता मगर मानवजनित हरकतें ...

April 22nd, 2012 | लेखक : डॉ. दीपक आचार्य | 31 views | No Comments »
Posted in Category: चिंतन | Tags: be quiet and peaceful

निर्मल बाबा की कृपा का कारोबारी चमत्कार

निर्मल बाबा की कृपा का कारोबारी चमत्कार दिव्य आंख का अवतरण बनाम पेड न्यूज प्रमोद भार्गव टीवी समाचार चैनलों पर ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ नाम से विज्ञापन दिखाकर भक्तों पर दिव्य कृपा बरसाने का दावा करने वाले निर्मल बाबा अब खुद कठघरे में हैं। बाबा को मुश्किल में वही भक्त डाल रहे हैं, जिनका कष्ट वे तीसरी आंख ...

April 20th, 2012 | लेखक : प्रमोद भार्गव | 94 views | No Comments »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म | Tags: निर्मल बाबा.

हिन्दू संस्थाओं पर राजनीतिक भेद-भाव : शंकर शरण

हिन्दू संस्थाओं पर राजनीतिक भेद-भाव : शंकर शरण डॉ. भीमराव अंबेदकर ने कहा था कि हमारा संविधान सेक्यूलर नहीं क्योंकि “यह विभिन्न समुदायों के बीच भेद-भाव करता है।” यह तब की बात है, जब संविधान की प्रस्तावना में छेड़-छाड़ नहीं हुई थी। आज इस बिन्दु पर, धार्मिक भेद-भाव और सेक्यूलरिज्म पर, एक दोहरी विडंबना पैदा हो चुकी है। ...

April 20th, 2012 | लेखक : शंकर शरण | 145 views | 1 Comment »
Posted in Category: धर्म-अध्यात्म, महत्वपूर्ण लेख, राजनीति | Tags: धर्मनिरपेक्षता, हिंदू संस्‍था

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