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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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नई दिल्ली- शुक्रवार 07 दिसम्बर को ग्रामीण पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाली गैर सरकारी संस्था ‘चरखा‘ का 18वां संस्थापक दिवस धूम-धाम से मनाया। समारोह नई दिल्ली स्थित सिरी फोर्ट सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सीएनएन आईबीएन के एडिटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई के अलावा कई गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं। समारोह की अध्यक्षता चरखा अध्यक्ष श्री शंकर घोष ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत दीप जलाकर किया गया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री घोष ने कहा कि नीति निर्धारकों तक आम आदमी की आवाज़ को पहुंचाने का एकमात्र स्रोत मीडिया है। जो अपनी सशक्त भूमिका अदा करता रहा है परंतु 24 घंटे चैनल को चलाए रखने और टीआरपी में बने रहने की होड़ के कारण आम आदमी की आवाज दबने लगी है। लेकिन दूसरी ओर प्रिंट मीडिया जो आजादी के पहले भी अपनी प्रमुख भूमिका अदा कर रहा था, संचार क्रांति बाद भी बदस्तूर जारी है। यही कारण है कि चरखा प्रिंट मीडिया के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और नीति निर्धारकों तक आम आदमी की अनसुनी आवाज़ को पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजदीप सरदेसाई ने चरखा द्वारा देश के सुदूर इलाकों में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और जम्मू कश्‍मीर के जिन सुदूर क्षेत्रों में मीडिया पहुंच नहीं पाती है चरखा वहां के सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत करती है। राजदीप ने इन क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं की चर्चा करते हुए कहा कि यहां रोटी, पानी और बिजली का खस्ताहाल है इसके बावजूद मीडिया को इसमें कोई मसाला नहीं दिखता है जबकि दिल्ली में एक घंटे के लिए भी बिजली चली जाए तो ब्रैकिंग न्यूज बन जाता है। इसी मिथ्या को चरखा तोड़ता है। उन्होंने चरखा को न्यूज चैनल के साथ मिलकर सामाजिक समस्याओं को इंगित करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि चरखा चाहे तो उनका चैनल इस दिशा में उनका पूर्ण सहयोग करेगा। चरखा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से देश का पिछड़ा व्यक्ति भी सीटिजन जनर्लिस्ट के रूप में तैयार हो रहा है।

इस अवसर पर भारत सरकार में पत्र सूचना कार्यालय में वरिष्‍ठ अधिकारी रहे श्री राम मोहन राव और छत्तीसगढ़ की वरिष्‍ठ पत्रकार सुश्री आशा शुक्ला को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। चरखा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री अंशु मेश्‍क ने इस अवसर पर संस्था के कार्यों पर चर्चा की तथा भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। चरखा के हिंदी संपादक शम्स तमन्ना, उर्दू संपादक मो. अनीसुर्रहमान खान और अंग्रेजी की सहायक संपादक सुश्री चेतना वर्मा के अलावा विभिन्न राज्यों से आए चरखा लेखक मौजूद थे।

ज्ञात हो कि जमीनी स्तर से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने वाले श्री संजय घोष ने 1994 में चरखा की स्थापना की। इसका मूल उद्देश्य समाज के गरीब और वंचित वर्गों तक विकास का समुचित लाभ पहुँचाना है। वहीं उनकी आवाज को नीति निर्धारकों तक पहुँचाने का कार्य शामिल है। वर्तमान समय में चरखा लेखकों के आलेख हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले देश के तकरीबन सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित किये जा रहे हैं।

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