लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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mertoवसुधा कैसे मुस्कुराये !

एक सौ बाईस करोड़ का बोझ,

कैसे उठा पाये !

बाग़ बग़ीचे खेत खलिहान सिमटे,

फसल कोई कैसे सींचे ।

सबको खाना कैसे खिलाये !

वसुधा कैसे मुस्कुराये !

 

सूखते जल-स्त्रोत जायें,

प्रदूषण ना रोक पायें,

धरा के नीचे का पानी,

और नीचे होता जाये,

प्यास सबकी कैसे बुझाये!

वसुधा कैसे मुस्कुराये !

 

बहुत सी सड़कें बनाईं,

करोड़ों गाड़ियाँ चलाईं,

नीचे भी मैट्रो बनाई,

कितनी गहरी करी खुदाई,

सबको कहाँ कैसे पंहुचाये !

वसुधा कैसे मु्स्कुराये !

 

जंगल कम होते ही जायें,

पवन प्रदूषण बढ़ता ही जाये,

पृथ्वी हरी भरी न हो तो,

वायु कैसे शुद्ध होगी ,

सांस कैसे ली जाये !

वसुधा कैसे मुस्कुराये !

 

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1 Comment on "वसुधा कैसे मुस्कुराये !"

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PRAN SHARMA
Guest

सच्चाई को दर्शाती बीनू जी की कविता ने मन मोह लिया है .

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