लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन किशोर सिन्हा

अपुष्ट प्रमाणों के आधार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर किसी का भी चरित्र-हनन करना अरविन्द केजरीवाल का स्वभाव बन चुका है। वे अपने उद्देश्य से भटक गए हैं। अन्ना हजारे को लगभग दो वर्षों तक उन्होंने भुलावे में रखा। जन लोकपाल बिल के लिए अन्ना के आन्दोलन से ही अरविन्द केजरीवाल अचानक नायक की भांति उभरे। अन्ना के गिरते स्वास्थ्य की चिन्ता किए बिना उन्होंने अन्नाजी को मुंबई और दिल्ली में अनिश्चित काल के लिए अनशन पर बैठा दिया। अन्नाजी को अरविन्द केजरीवाल की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा को पहचानने में दो वर्ष लग गए। एक कहावत है – साधु, चोर और लंपट ज्ञानी, जस अपने तस अनका जानी। साधु अन्ना अपनी तरह ही अपने सलाहकारों को साधु समझते रहे। उन्हें पहला झटका स्वामी अग्निवेश ने दिया, दूसरा झटका केजरीवाल ने। जब आन्दोलन के पीछे केजरीवाल की राजनीतिक मंशा से पर्दा हटा, तो उन्होंने न केवल इसका विरोध किया, अपितु केजरीवाल से अपना संबन्ध विच्छेद भी कर लिया। किरण बेदी ने भी यही किया। अन्नाजी ने सार्वजनिक रूप से अपने नाम का उपयोग करने से केजरीवाल को स्पष्ट मनाही कर दी। आज दोनों के रास्ते अलग-अलग हैं। एक व्यवस्था परिवर्तन चाहता है, तो एक अन्ना के आन्दोलन का लाभ उठाकर सत्ता। प्रश्न यह है कि अगर अरविन्द केजरीवाल के सपनों का जन लोकपाल कानून बिना किसी काट-छांट के पास भी कर दिया जाय, तो क्या गारन्टी है कि यह भारत की न्याय-व्यवस्था की तरह भ्रष्टाचार का केन्द्र बनने से बच पाएगा? हमारी सारी समस्याओं की जड़ हमारा उधारी संविधान, इसके द्वारा संचालित व्यवस्था और इसके द्वारा उत्पन्न चारित्रिक गिरावट है। एक नहीं, सौ लोकपाल बिल पास आ जाएं, फिर भी भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आएगी, वरन बढ़ेगा। अवैध धन कमाने का एक और काउंटर खुल जाएगा। अन्नाजी ने देर से इस तथ्य को समझा। इसीलिए वे बाबा रामदेव, किरण बेदी और जनरल वी.के.सिंह के साथ व्यवस्था परिवर्तन के लिए कार्य कर रहे हैं।

अरविन्द केजरीवाल अब दिग्विजय सिंह की राह पर चल पड़े हैं। सलमान खुर्शीद, वाड्रा, मुकेश अंबानी और गडकरी पर उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, वे मात्र सनसनी फैलाने के लिए हैं। २-जी, कामनवेल्थ और कोलगेट के मुकाबले ये घोटाले कही ठहरते नहीं हैं। उन्हें डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी की तरह पूरे प्रमाणों के साथ कोर्ट में जाना चाहिए ताकि राष्ट्र का कल्याण हो सके। २-जी स्कैम के लिए अगर स्वामी सुप्रीम कोर्ट में नहीं गए होते, तो इसे कभी का दबा दिया गया होता। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने देश पर एक बड़ा उपकार किया है। सरकार की अनैतिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ़ उनका संघर्ष सही दिशा में है। केजरीवाल या तो दिग्भ्रान्त हैं या अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए कटिबद्ध हैं। वे अपने रहस्योद्घाटनों से यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि सभी राजनीतिज्ञ भ्रष्ट हैं। ऐसा करके परोक्ष रूप से वे भ्रष्टाचार की जननी कांग्रेस की ही मदद कर रहे हैं। वे यह धारणा बनवा रहे हैं कि पूरे भारत में उनके अतिरिक्त कोई भी ईमानदार नहीं है। यदि उन्हें बेहतर राजनीतिक विकल्प देने की चिन्ता होती, तो वे राजनीतिक पार्टी बनाने की दिशा में ठोस पहल करते, जो कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बनने की क्षमता रखती। राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाना कोई हंसी ठठ्ठा नहीं है। उनके पास हिमाचल और गुजरात के चुनावों से आरंभ करने का एक सुनहरा अवसर था, जिसे उन्होंने खो दिया। यदि उनकी पार्टी २०१४ के लोकसभा के चुनाव से कार्य आरंभ करना चाहती है, तो भी सदस्य बनाने, संगठन बनाने, चुनाव कोष एकत्रित करने और ५४२ योग्य उम्मीदवारों का चयन कोई छोटी प्रक्रिया नहीं है। वर्तमान व्यवस्था में बड़ी जटिल प्रक्रिया है यह। इसके अतिरिक्त श्री केजरीवाल को राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों, यथा अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, आतंकवाद, कश्मीर, बांग्लादेशी आव्रजन, सर्वधर्म समभाव, पूंजीवाद, समाजवाद, स्वदेशी, रक्षानीति, व्यवस्था परिवर्तन, जनलोकपाल में मीडिया, एन.जी.ओ. और कारपोरेट घरानों को सम्मिलित करने के विषय में, राष्ट्रीयकरण, निजीकरण, निवेश, ऊर्जा नीति, आणविक नीति, शिक्षा, चिकित्सा, न्याय पद्धति, कृषि, उद्योग, ब्यूरोक्रेसी और आरक्षण पर अपने सुस्पष्ट विचारों से भारत की जनता को अवगत कराना चाहिए।

कांग्रेस के साथ भाजपा की विश्वसनीयता को संदिग्ध बनाकर कुछ भी हासिल नहीं होनेवाला। कल्पना कीजिए – अगर केजरीवाल के प्रयासों के कारण भाजपा की विश्वसनीयता समाप्त हो जाती है, तो देश की जनता के पास क्या विकल्प रहेगा? केजरीवाल विकल्प नहीं दे सकते। क्या भारत की जनता सन २०१४ के बाद भी अगले पांच सालों तक कांग्रेस को झेलने के लिए पुनः अभिशप्त होगी? अन्ना के आभामंडल का भरपूर दोहन कर केजरीवाल जनता में भ्रम की स्थिति का निर्माण कर रहे हैं। वे पूर्ण रूप से दिग्विजय सिंह की राह पर चल चुके हैं, परिणाम की परवाह किए बिना। हिन्दी न्यूज चैनलों के समाचार वाचकों की तरह चिल्ला-चिल्ला कर बोलने से न तो समस्याएं कम होती हैं और न समाधान निकल पाते हैं। सनसनी समाधान नहीं बन सकती।

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35 Comments on "दिग्विजय की राह पर केजरीवाल"

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आर. सिंह
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राम नारायण सुथर जी आपको शक क्यों है कि भ्रष्टाचार के अतिरिक्त भी अन्य मुद्दे भारत में हैं ?हो सकता है कि हों,पर अधिकतर मुद्दे भ्रष्टाचार की देन हैं।यह भी सही है कि केवल जन लोकपाल से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा .जन लोकपाल भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में एक सशक्त कदम मात्र है।जब तक हमारे रवैये में फर्क नहीं आयेगा तब तक भ्रष्टाचार ख़त्म हो ही नहीं सकता,पर यह भी सही है कि कारगर और शख्त क़ानून उस पर अंकुश अवश्य लगा सकता है।ऐसे भ्रष्टाचार पर मैं पहले भी बहुत लिख चुका हूँ और हर बार मैंने यही समझाने का… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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डा.राजेश कपूर
केजरिवाल के बारे में दिये लिन्क को मैने देखा, पढा है https://www.dropbox.com/s/37jow5959vs2270/DI-November-Issue-2012-in-Hindi.zip आखें खोलने वाला है. इस पत्रिका में और भी अनेक लेख ऐसे हैं कि एक बार शुरु कर के पूरा पढे बिना नहीं रह सकते. इस स्तर की पत्रिकायें अब दुर्लभ हैं. जहां तक बात केजरिवाल की है तो जरा इन स्वालों का जवाब ढूंढिये ; १. केजरिवाल केवल भारत की कम्पनियों के घोटालों की ही बात क्यूं करते हैं ? उनसे कहीं बडे घोटाले करने वाली विदेशि कम्पनियों का नाम भूल कर भी नहीं लेते. क्या इस लिये कि वे असल में इन विदेशी कम्पनियों की कठपुतली… Read more »
आर. सिंह
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डायलाग इंडिया का नवम्बर अंक देखा जैसा मैंने सोचा था वैसा ही कुछ देखने को मिला। पहले तो मुझे इसी बात से विरोध है कि उसके एक लेख में कहा गया है कि केवल भ्रष्टाचार ही मुद्दा नहीं है,जबकि मेरे विचार से भारत में आज केवल एक ही मुद्दा है,वह है भ्रष्टाचार।अन्य सब मुद्दे भ्रष्टाचार की देन हैं।दूसरा अहम् प्रश्न यह है कि क्या केजरीवाल केवल कांग्रेस और सोनिया के मोहरे हैं (जैसा कि डायलग इंडिया के इस अंक में समझाने का प्रयत्न किया गया है ) या उनका कोई अपना व्यक्तित्व भी है?इस प्रश्न का उत्तर तो मेरे विचार… Read more »
इंसान
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यहाँ प्रस्तुत लेख को लेकर अब तक कुछ तेरी कुछ मेरी में केवल डा: मधुसूदन उवाच जी के विचार “बाट देखता हूँ। परिस्थिति आप ही आप स्पष्ट होगी।” पर विश्वाश बनते दिखाई देता है|

santanu arya
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परिस्त्थिया स्पष्ट होने के बाद भी बाट देखते रहना किस बात का धोतक है

इंसान
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डा: मधुसूदन उवाच जी तो दूर प्रदेश में बैठ परिस्थिति के आप ही आप स्पष्ट होने की बाट जोहते हैं| यहां तात्पर्य यह है कि अमानवीय, व्यापारी शक्तियों के विरोध और कार्पोरेशनों के इशारों पर नाच रही कठपुतली सरकार के राजनीतिक दाव पेच और उस पर संशयी लोगों के अविश्वाश के होते अरविंद केजरीवाल और उनके आन्दोलन का क्या होगा? भय्या, जब हाथ पे हाथ धरे बैठे हो तो यह सब सपष्ट होने की बाट ही तो देखोगे! नहीं तो कह दो आप देश में वर्तमान स्थति से संतुष्ट हैं| यह किसी अज्ञात पुस्तक को पढ़ कर नहीं केवल आप… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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डा.राजेश कपूर
सिन्हासाहेब अब तो लगता है कि केजरिवाल की दाल में काला नहीं, सारी दाल ही काली है. जब तक विश्व परिद्रिश्य की पूरी कल्पना न हो, तब तक घटनाओं के सही अर्थ निकालना सम्भव नहीं हो पाता. सरलचित भारतीय तो सोच भी नहीं सकते कि विश्व की अमानवीय, व्यापारी शक्तियां किस सीमा तक जाकर क्या-क्या कर रही हैं. इसे जानने के लिये एक विशेष पुस्तक है ”जागतिक षडयन्त्र” ( मूल पुस्तक है The Word Conspiracy) , प्राप्ति स्थान; स्वराज विद्या पीठ परिसर, २१-बी, मोतीलाल नेहरू रोड, इल्हाबाद-२११००२, फोन- ०९२३५४०६०४३ . पाठक मित्रों से आग्रह है कि इसे मंगवा कर एक… Read more »
इंसान
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अरविंद केजरीवाल को बाहर कर हम कैसे मिल-जुल कर अपने समाधान तलाशें?

Bipin Kishore Sinha
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बहुत सटीक टिप्पणी के लिए राजेश कपूर जी को साधुवाद। सत्य बड़ा कड़वा होता है। केजरीवाल मंडली सबकी पोल खोलने में लगी है, परन्तु जब उनकी पोल खुलती है, तो वे और उनके समर्थक आक्रामक हो जाते हैं। आलोचना करने वाले को आलोचना सहने की की भी क्षमता रखनी चाहिए। काले धन के विषय में बि्के हुए मीडिया के सहयोग से केजरीवाल ने जो रहस्योद्घाटन किया, उसे हम खोदा पहाड़ और निकली चुहिया की संज्ञा दे सकते हैं। इससे ज्यादा कुछ भी नहीं।मुकेश अंबानी के सौ करोड़ रुपए विदेशी बैंक में जमा हैं। यह कौन सी नई बात है? अन्तर्राष्ट्रीय… Read more »
श्रीराम तिवारी
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श्री दिग्विजयसिंह जी ने १० साल तक मुख्यमंत्री [मध्यप्रदेश] का भार वहन किया है. वे कई बार विधायक रहे हैं. शायद कभी कोई चुनाव नहीं हारे. वे उस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं जो १८८५ बनाई गई थी और जिसका मेरे जैसे लोग आजीवन विरोध करते आ रहे हैं , वावजूद इसके उनकी पार्टी आज भी सत्ता में है और भले ही विगत १० सालों में दिग्विजयसिंह जी स्वघोषित राजनैतिक अपरिग्रह के वादे पर अटल रहे हों किन्तु राजनीतिक गलियारों में सर्वाधिक सक्रियता के साथ विवादास्पद इतने रहे की अब उनकी कार्यशेली को उस नजीर के रूप में पेश किया… Read more »
ramnarayan suthar
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आर . सिंह जी में बीकानेर राजस्थान से हु मेरे यहाँ अगर केजरीवाल आते है तो आप सही कह रहे है की भीड़ काफी इकठी हो जाएगी क्योंकि मीडिया में लगातार चर्चित रहने के कारन लोग एक बार उस व्यक्ति को देखने जरुर उमड़ पड़ते है पर ये बात ध्यान रखिये की वहा पर केजरीवाल का साथ देने वालो की संख्या आधी भी नहीं होगी वो सिर्फ और सिर्फ जैसे सर्कस देखने जाते है ऐसे ही आयेंगे कोई सहयोग या भ्रष्टाचार मिटाने के लिए नहीं अगर आपको विश्वास न हो तो केजरीवाल को कहिये की वो अब जंतर मंतर पर… Read more »
आर. सिंह
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यह लिंक तो अभी भी नहीं खुला,पर उससे ज्यादा अंतर नहीं पड़ता है।मैंने केजरीवाल को बहुत बार सुना और उसकी पुस्तक स्वराज को भी मैंने एक से अधिक बार पढ़ा है और उसको समझने का प्रयत्न किया है।मैंने विनोबा भावे का यह विचार किशोरावस्था में पढ़ा था कि जिसने नई चीज सीखने की आशा छोड़ दी वह बूढा है।मैं विचारों की दृष्टि से आज भी बूढा नहीं होना चाहता अतः आज भी अपनी ज्ञान वृद्धि में लगा रहता हूँ।रही बात केजरीवाल की तो मैंने बार बार लिखा है कि मेरे विचारानुसार अरविन्द केजरीवाल उसी कार्य को आगे बढ़ाना चाहते हैं,जो… Read more »
आर. सिंह
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शांतनु जी, आपकी योद्धा या मोहरा वाला लिंक तो खुला नहीं,पर खर्चे के व्योरों वाला लिंक पुराना है।खर्चों का विस्तृत विवरण जानने का अधिकार प्रत्येक आदमी को है,पर बिना उस विस्तृत जानकारी के उसके बारे में अंदाजा लगाना ठीक नहीं है।यह भी सही हैं कि केजरीवाल जिस रास्ते पर चल रहे हैं,वहां इस तरह केव्यव्धान पग पग पर आयेंगे।जो लोग सत्ता या उससे युक्त भ्रष्टाचार से लाभ उठा रहे हैं,वे तो कभी नहीं चाहेंगे कि आज की व्यवस्था में कोई क्रांतिकारी परिवर्तन आये।उनकी संख्या भी कम नहीं है,पर ऐसे लोग भी बहुत अधिक संख्या में हैं जो इसका लाभ भले… Read more »
इंसान
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मुझे आश्चर्य है कि आपको मेरी टिप्पणियों में व्यक्तिगत शत्रुता का आभास हो रहा है| मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसी कोई बात नहीं है| मुझे गर्व है कि जिस प्रकार स्वामी विवेकानंद जी ने सहज में “जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी हैं तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को गद्दार समझता हूँ जो उनके बल पर शिक्षित बना और अब उनकी ओर ध्यान तक नहीं देता|” कह दिया उसी सहजता में मैं कांग्रेस अथवा भाजपा पक्षपाती को देश के प्रति अधर्मी कहता हूँ| मैं ऐसे अधर्मी को राष्ट्र के प्रति उसके सोये हुए दायित्व को जगाने… Read more »
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