लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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-विपिन किशोर सिन्हा-

indian_newspaperमैं अरविन्द केजरीवाल का समर्थक नहीं हूं, बल्कि उनके घोर विरोधियों में से एक हूं। पाठकों को याद होगा – मैंने उनके खिलाफ कई लेख लिखे हैं। लेकिन मीडिया के खिलाफ़ उनके द्वारा जारी किए गए सर्कुलर का मैं समर्थन करता हूं। कारण यह है कि भारत की मीडिया, विशेष रूप से इलेक्ट्रोनिक मीडिया मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ चुकी है। लोकतंत्र में विरोध का अपना एक विशेष स्थान होता है लेकिन अंध और पूर्वाग्रहयुक्त विरोध का प्रतिकार होना ही चाहिए। न्यूज चैनलों को भारत और भारतीयता से गहरी नफ़रत है। अपनी इस मानसिकता के कारण वे हिन्दी, हिन्दुत्व, आर.एस.एस, शिवसेना, अकाली दल, बाबा रामदेव, हिन्दू धर्मगुरु, भारतीय परंपरायें और देसी नेताओं को नित्य ही अपने निशाने पर लेती हैं। बंगाल में एक नन के साथ दुर्भाग्यपूर्ण बलात्कार हुआ, मीडिया ने प्रमुखता से समाचार दिया, खुद ही मुकदमा चलाया और खुद ही फ़ैसला भी दे दिया। घटना के लिए मोदी सरकार और कट्टरवादी हिन्दू संगठनों को दोषी करार दिया। सरकार ने जांच की। पता लगा कि रेप करने वाले बांग्लादेशी मुसलमान थे। दिल्ली के एक चर्च में एक मामूली चोरी की घटना हुई। मीडिया ने इसके लिए मोदी एवं आर.एस.एस. को कटघरे में न सिर्फ़ खड़ा किया बल्कि मुज़रिम भी करार दिया। आगरा में बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। बाल एक चर्च की खिड़की के शीशे से टकरा गई। शीशा टूट गया। मीडिया ने इसे क्रिश्चनिटी पर हमला बताया। जब से नरेन्द्र मोदी प्रधान मंत्री बने हैं, मीडिया ने एक वातावरण बनाया है कि भारत में धर्मनिरपेक्षता खतरे में है। नरेन्द्र मोदी का एक ही अपराध है कि वे आज़ाद भारत के पहले पूर्ण स्वदेशी प्रधान मंत्री हैं – चिन्तन में भी, व्यवहार में भी।

मीडिया की चिन्ता का दूसरा केन्द्र अरविन्द केजरीवाल बन रहे हैं। दिल्ली में उनकी अप्रत्याशित सफलता से वही मीडिया जो उन्हें सिर-आंखों पर बैठाती थी, अब बौखलाई-सी दिखती है। कारण स्पष्ट है – अरविन्द केजरीवाल में ही मोदी का विकल्प बनने की क्षमता है। धीरे-धीरे क्षेत्रीय दल किनारे हो रहे हैं और कांग्रेस की राजमाता एवं शहज़ादे अपनी चमक खोते जा रहे हैं। केजरीवाल भी मीडिया को भा नहीं रहे हैं क्योंकि मोदी की तरह वे भी एक देसी नेता हैं जो अपने सीमित शक्तियों और साधनों के बावजूद आम जनता की भलाई सोचते हैं। मैंने बहुत सोचा कि आखिर मीडिया भारतीयता के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ी रहती है? मेरे प्रश्नों के उत्तर दिए मेरे एक मित्र श्री विन्देश्वरी सिंह ने जो जियोलोजिकल सर्वे आफ़ इन्डिया के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। उनसे प्राप्त सूचना का सार निम्नवत है –

सन २००५ में एक फ्रान्सिसी पत्रकार फ़्रैन्कोईस भारत के दौरे पर आया। उसने भारत में हिन्दुत्व पर हो रहे अत्याचारों का अध्ययन किया और बहुत हद तक इसके लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया। उसने काफी शोध किए और पाया कि भारत में चलने वाले अधिकांश न्यूज चैनल और अखबार भारत के हैं ही नहीं। उसने पाया कि —

१. दि हिन्दू … जोशुआ सोसायटी, बर्न स्विट्जरलैंड द्वारा संचालित है।

२. एनडीटीवी – गोस्पेल आफ़ चैरिटी, स्पेन, यूरोप द्वारा संचालित।

३. सीएनएन, आईबीएन-७, सीएनबीसी – साउदर्न बेप्टिस्ट चर्च यूरोप द्वारा संचालित

४. टाइम्स आफ़ इन्डिया ग्रूप – बेनेट एन्ड कोलमैन यूरोप द्वारा संचालित। इसके लिए ८०% फ़न्डिंग क्रिश्चियन कौन्सिल द्वारा तथा २०% फ़न्डिंग इटली के राबर्ट माइन्दो द्वारा की जाती है। राबर्ट माइन्दो कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के निकट संबंधी हैं।

५. हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रूप – पहले यह बिरला ग्रूप का था। अब इसका भी स्वामित्व टाइम्स आफ़ इन्डिया के पास है।

६. दैनिक जागरण ग्रूप – इसके एक प्रबंधक समाजवादी पार्टी से राज्य सभा के सांसद हैं। सभी को ज्ञात है कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम परस्त है।

७. दैनिक सहारा – जेल में बंद सुब्रतो राय इसके सर्वेसर्वा हैं जो मुलायम और दाउद के करीबी रहे हैं।

८. आन्ध्र ज्योति – हैदराबाद की घोर सांप्रदायिक पार्टी MIM ने इसे खरीद लिया है।

९. स्टार टीवी ग्रूप – सेन्ट पीटर पोंटिफ़िसियल चर्च, यूरोप द्वारा संचालित

१०. दि स्टेट्समैन – कम्युनिस्ट पार्टी आफ़ इन्डिया द्वारा संचालित।

…. यह लिस्ट बहुत लंबी है। किस-किस का उल्लेख करें?

जिस मीडिया की फ़न्डिंग विदेश से होती है वह भारत के बारे में कैसे सोच सकती है? यही कारण है कि यह मीडिया शुरु से ही इस धरती और धरती-पुत्रों को अपनी आलोचना के निशाने पर रखती है। देर-सबेर केन्द्र सरकार को भी इनपर लगाम लगानी ही पड़ेगी।

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7 Comments on "मीडिया की हकीकत"

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इक़बाल हिंदुस्तानी
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मीडिया को केजरीवाल या मोदी जब तक चुनाव में अपने पक्ष में इस्तेमाल होता देखते हैं तब तक कोई परेशानी नहीं होती लेकिन जब सत्ता में आने के बाद यही मीडिया इनकी मनमानी या वादों से मुकरने पर सवाल खड़े करता है तो इनको मीडिया विदेशी हाथों में खेलता और भारत विरोधी नज़र आने लगता है…. दरअसल जिसको हिंदुत्व भारतीयता राष्ट्रीयता का चौला पहनाकर सत्ता हथियाने का औज़ार बनाया जाता रहा है वो नक़ाब एक ही साल में दावों की पोल खुलने से तार तार हो चुका है। कांग्रेस इतनी भृष्ट अहंकारी और मुस्लिम कट्टर पन्थ की तरफ न झुकती… Read more »
इंसान
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मीडिया को लेकर मैं आपके मनोभाव का आदर करता हूँ लेकिन भावना में बह असंतुष्ट होने के बदले हमें ऐसी स्थिति का समाधान सोचना होगा| प्राचीन काल से भारतीय क्षेत्र में प्रांतीय सामंतवाद, सांस्कृतिक प्रथाओं, भाषाओं, रीति-रिवाज़ों आदि में विविधता का प्रभाव आज भी विद्यमान है और राष्ट्र को एक डोर में पिरोती सामान्य राष्ट्रभाषा के अभाव के कारण इस अनेकता में राष्ट्रीय एकता भी भारतीय नागरिकों में राष्ट्रवाद को पूर्णतया जगा नहीं पाई है| मेरा विश्वास है कि तथाकथित स्वतंत्रता के बहुत पहले से ही फिरंगी की बांटो और राज करो नीति का अनुसरण कर नागरिक प्रशासन के लिए… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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मिडीया का स्वामित्व परदेशी और हमारी राष्ट्रीयता का शत्रु है। इनके प्रभाव के बाहर, ओबामा भी नहीं होगा। उसे भी अपना पद रखना है। ===>इनका तंत्र है, “control the opinion makers”–Control the Indian nation. किसी समाचार को पढें, शीर्षक और आशय में अंतर देखेंगे। पण्डितों की, (तिवारी, शर्मा) की चलती है। रेडियोपर उनके हिन्दी उच्चारण से उनका नकलीपन खुल जाता है। लेखकों को टटोलने, Feelers दलालों कॊ भेजा जाता है। चर्च को सबसे बडा डर हिन्दुत्व से है। मित्रों के अनुभवों से अवश्य लगता है। एक त्रिनिदाद के पण्डित के,अनुभव सुने, तो, सारा स्पष्ट हुआ। बताऊँ, तो,पूरा आलेख बन जाए।… Read more »
डॉ.अशोक कुमार तिवारी
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डॉ.अशोक कुमार तिवारी
मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ ! जहाँ तक मेरी जानकारी है 60% समझदार लोगों ने टीवी चैनल्स देखना बंद कर दिया है वे सोशल साइट्स पर अधिक भरोसा करते हैं !! इन परिस्थितियों के लिए रिलायंस पूरी तरह जिम्मेदार है – 18 चैनल्स को खरीदकर रिलायंस ने पत्रकारिता की अंतिमक्रिया कर दी है !!! न्याय-इंसाफ के लिए खतरा हैं ये रिलायंस वाले —- ये धार्मिक थे ही कब ? इनके मॉडल राज्य गुजरात में तो सभी धर्माचार्य किसी न किसी कॉरपोरेट घराने के प्रचारक बने हुए हैं – धन इकट्ठा करने के अलावा समाज की भलाई-न्याय-इंसाफ से दूर-दूर का… Read more »
इंसान
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सदियों से लुटेरों और आक्रमणकारियों के अधिपत्य व संरक्षण में जीवन यापन करते भारतीयों में व्यक्तिगत सांस्कृतिक व भूगोलिक विभिन्नता के कारण राष्ट्रवाद की भावना न जाग पाई है। कल तक राजनीतिक जागरूकता विहीन सामान्य भारतीय जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं, खाना पीना और हगना, से जूझता आज अकस्मात् वैश्विक तथा उपभोक्तावाद के वातावरण में धकेले जाने पर बौखला सा गया है। इस बौखलाहट में हम अच्छे बुरे की पहचान नहीं कर पा रहे हैं। मेरी समझ में इस अभाग्यपूर्ण स्थिति का समाधान केवल राष्ट्रवाद में है। मोदी जी १२५-करोड़ सशक्त भारतीयों में राष्ट्रवाद फूंक उन्हें संगठित सुढ़ृड एवं समृद्ध भारत… Read more »
इंसान
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डॉ.अशोक कुमार तिवारी जी से उनकी टिप्पणी के प्रतिउत्तर में अपनी उपरोक्त टिप्पणी और अन्यत्र श्रीराम तिवारी जी के निबंध, ‘एक साल में ही सुशासन, विकास की लहर जनाक्रोश की सुनामी में बदलने को बेताब’ पर प्रस्तुत मेरी टिप्पणी को लेकर मैं उनके विचार जानने का आग्रह करूँगा|

D C Yadav kullu hp
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Bhai विपिन किशोर सिन्हा ji aapne kafi had tk sahi likha h

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