लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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भारत के शत्रु नम्बर वन पाकिस्तान में बड़े उलटफेर के बाद अब पनामा मामले में नवाज शरीफ को दोषी करार दिया गया है । इसके बाद उनका जेल जाना लगभग तय है। इससे भी सनसनी खेज खबर यह है कि नवाज की जगह पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह वही शक्स हैं जो समय समय पर भारत को युद्ध की धमकी देते रहे हैं। इस दृष्टि से अगर विचार किया जाए तो भारत पाकिस्तान के बीच जो माहौल चल रहा है ख़्वाजा का प्रधानमंत्री बनना कश्मीर को और अशांत करेगा ,घुसपैठ और बढ़ेगी कुल मिलाकर भारत के लिए खतरा बढ़ गया है।
इस घटनाक्रम के बाद यह तय पूरी तरह तय हो गया है कि अब पाकिस्तान में सेना का दखल खुलकर बढेगा और जब जब पाकिस्तान में सेना का दखल बढ़ता है भारत पर आतंकवाद का युद्ध का खतरा बढ़ जाता है। यूँ तो नवाज हों या ख्वाजा अथवा अन्य कोई भारत के खिलाफ दुर्भावना उनके डीएनए में रहा है, बावजूद इसके लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आये नवाज शरीफ के प्रति वहां की सेना का रुख बहुत अच्छा नहीं था। इस दृष्टि से ख्वाजा को सेना का नजदीकी माना जाता रहा है स्पष्ट है कि सेना अब ज्यादा वर्चस्व के साथ काम करेगी। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जब पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व बढ़ता है तो आतंकवादी गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं जो भारत के लिहाज से कतई ठीक नहीं कहा जा सकता है। वह पाकिस्तान की सेना ही है जो वहां हाफिज ,मसूद और दाऊद जैसे आतंकियों को सरंक्षण देती है,वह सेना ही है जो पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकवादियोंआतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाती है,उनकी भारत में घुसपैठ कराती है।
नवाज के हटने के बाद पाकिस्तान यह प्रचारित करने की कोशिश करेगा कि वहां कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों न हो कानून से बाहर नहीं है साथ ही यह भी कहा जायेगा कि वहां भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दास्त नहीं किया जाता,लेकिन वास्तविकता इससे कितनी कोसों दूर है यह भी किसी से छुपा नहीं है।
पाकिस्तान में हुए इस परिवर्तन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका और चीन को लेकर उसके रूख में कोई परिवर्तन आता है या फिर वह अपनी पुरानी नीतियों पर कायम रहता है। अमेरिका ने जिस प्रकार पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकी है साथ ही उसे आतंकवादियों की पनाहगाह बताया है,उसे देख अब पाक में कट्टरवादी सेना के दखल बढ़ने से अमेरिका और आक्रोशित होगा जो भारत के लिए अच्छा संकेत कहा जा सकता है।
जहां तक चीन का सवाल है अब पाकिस्तान में उसका दखल और बढ़ने की सम्भावना है यह भी हो सकता है कि पाकिस्तान  कश्मीर में चीन की सक्रियता को और बढ़ाये जाने को मंजूरी देकर भारत को घेरने की कोशिश करे इतना ही नहीँ पूर्वोत्तर में चीन के साथ भारत के बढ़ते तनाव को पाकिस्तान बांग्लादेश के रास्ते फायदा उठाने की कोशिश करे जैसा कि हाल ही में पाकिस्तान में हुई जेश व अन्य आतंकवादी गुटों की रैली में धमकी दी गई थी। कुल मिलाकर पाकिस्तान में नवाज के हटने और एक कट्टरवादी शाशक के कुर्सी सम्भालने के तमामं दूरगामी परिवर्तन देखने को ममिलेंगे और भारत को इसपर पैनी निगाह रखने की जरुरत होगी।

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