लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-   politics

दोहों के सारे नियमों को ताक पर रखकर ये 7 दोहे लिखे हैं, दोहे इसलिये हैं कि दो लाइन के हैं। छंदशास्त्र के विद्वानों की निगाह पड़ जाये तो कृपया आंख बन्द कर लें। कोई बॉलीवुड का प्राणी देख ले तो ध्यान दें, क्योंकि फिल्मों में जैसी तुकबन्दी होती है, वैसी हम भी कर लेते हैं। ‘साड़ी का फॉल’ और ‘गन्दी बात’ जैसे गीत लिखने के लिये कोई भी समझौता कर सकते हैं। अब फ़िल्मी गानों में कोई छायावादी छटा तो बिखेरनी नहीं है… थोड़ा स्तर नीचा कर लो और चोखा माल कमाओ, पर अब समझ में आने लगा है जितना ऊपर उठना मुश्किल है, नीचे गिरना उससे ज्यादा कठिन है, तो लो भैया पढ़ लो-

1  घुमा घुमा कर इतना फेंका, कोई पकड़ न पाय,
मोदी के मतवालों का हर दाव उल्टा पड़ जाय।

2.तेरे गाल के डिंपल पर सारी कन्यायें वारी जाय,
बुरी नज़र से ख़ुदा बचाये, दुल्हन प्यारी मिल जाय।

3 भांति-भांति के लोग इकठ्ठे हुए अब ‘झाड़ू’ लगाय,
देश का कूड़ा कचरा समेट, उसमें आग लगाय।

4.माया बहन जी ज़ोर ज़ोर से दलित दलित चिल्लांय,
धन सारा वो लूट-लूटकर अपनी मूर्ति सजांय।
5.राजकाज सब भूलकर राजा जश्न मनांय,
सलमान ख़ान व माधुरी को सैफ़ई में नचांय।

6.दीदी क्या बात करूं बहुत ही शोर मचायं,

राजनीति से अपराध को दूर न वो कर पांय।

7.तमिलनाडु की अम्मा ‘जया’ बस तमिल तमिल चिल्लांय,
तमिलनाडु की जनता को कभी अम्मा कभी करुणा बहकांय।

राजनीति से अपराध को दूर न वो कर पांय।

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11 Comments on "राजनैतिक दोहे"

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v.p.singh
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हीरो थे तुम दिल्ली मे क्यो जीरो बननें चले गये
दो महीने न लड़ सके लडाई क्यो मोदी से लड़ने चल गये

v.p.singh
Guest

केजरीवाल सुनो। …
आये थे छब्बे जी बनने चौबे बनकर चले गये
दिल्ली को न किया सफा और गन्दा करकें चले गये

v.p.singh
Guest

अब मुलायम हुए कठोर,कांग्रेस से कर सकते है ज़ंग
अपनी जान बचाने को ढ़ूँढ़ रहे कुछ बेईमानो का संग

v.p.singh
Guest

झाड़ू-झाड़ू के शोर से मेरे अब कान हो गये बन्द
केजरी पर रोज मार पड़े दुकान करीं क्यो बन्द
केजरी बोले भाई झाडू की उम्र होती है छोटी
मेरे ऊपर थे बड़े बाप मेरी नही चलीं कोईं गोटी

V.P.Singh

vp singh
Guest

माया-माया सभी करे क्यो माया से लगा रहे आस
मोदी सब को चाट गया छोङा नही कुछ पास

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