लेखक परिचय

मनोहर पुरी

मनोहर पुरी

करीब चालीस वर्षों से पत्रकारिता में व्यस्त। विशेष संवाददाता, सह संपादक, संपादक के पद पर रह चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। दो सौ से अधिक वार्ताओं, संसद समीक्षाओं और समसामयिक टिप्पणियों का प्रसारण। पांच सौ से अधिक कहानियाँ, कविताएँ, व्यंग्य एवं समसामयिक लेख देश विदेश की ख्याति लब्ध पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। समालोचनात्मक, सृजनात्मक, विवरणात्मक लेखन में रुचि।

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अंततः प्रधान मंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का सारा सच सामने आ ही गया। सारी दुनिया कई दिनों से मोदी मोदी कर रही थी। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद जिस प्रकार पूरा देश ढोल बजाता है वैसे ही जनता भारतीय सेना की पीठ थपथपा रही थी। देश का मूड़ वैसा ही बन गया था जैसा एशियाड़ के बाद श्रीमती शीला और कलमांड़ी के साथियों का बना था।। सर्वदलीय बैठकें हो रहीं थीं। सीमा पार से लगते हुए गांव खाली करवाये जा रहे थे। बी. जी. पी. वाले छप्पन की बजाय साठ ईंच का सीना फुलाये घूम रहे थे। बधाइयों का तांता लगा था। होली और दिवाली एक साथ मनाई जा रही थी। सभी समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ और टी.वी.चैनलों के मुख्य समाचारों में मोदी,सेना और सर्जिकल आपरेशन की धूम मची थी। पूरा विश्व सकते में था कि न जाने आगे क्या होने वाला है। भारत में कुछ नेताओं की नींद हराम हो रही थी और कुछ को डरावने सपने दिखाई दे रहे थे।
पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने अपनी संजय रूपी आंख से देखा कि उनके हमसाये अरविन्द केजरी भैया बहुत ही मायूस एक कोने में पड़े हैं। हमेशा अखबारों में छाये रहने वाले उनके केजरी भैया मीडिया में सोलहवें पेज पर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनके दल के अन्य साथियों को तो जैसे अखबार वालों ने दूध में से मक्खी की तरह अपने पन्नों से बाहर ही धकेल दिया है। नवाज साहब को हैरानी हो रही थी आखिर ऐसा क्या हो गया कि केजरी भैया की जुबान को लकवा मार गया। उन्होंने सपने में केजरी को दर्शन देते हुये कहा ‘‘वत्स अभी तो लंबी लड़ाई है। अभी से हथियार फेंक दोगे तो भारत के टुकड़े टुकड़े करने में हमारा सहयोग कैसे कर पाओगे।’’उन्होंने केजरी के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा,‘‘चिन्ता न करें तुम्हारे भी अच्छे दिन आयेंगें। कांग्रेस में भी अपने कुछ सहयोगी हैं उनसे सम्पर्क करके मोदी की पोल खोल कर रख दो। वे भी तुम्हारा साथ देने के लिये आगे आ जायेंगे।’’
इतना सुनते ही केजरी टेनिस बाॅल की तरह बिस्तर से उछल कर खड़े हो गये। नवाज की तरफ से हरी झंड़ी मिलते ही उन्होंने मोदी के साथ साथ भारतीय सेना की भी पोल खोल कर रख दी। नवाज साहब ने केजरी भैया को समझा दिया कि भारतीय सेना में इतना दम होता तो अब तक क्या चुप बैठी रहती।’’ केजरी बोले,‘‘मैं सब समझ गया हूं हजूर। बार बार उनकी नाक के नीचे ही नहीं स्वयं उन पर हमले होते रहे परन्तु किसी ने चूं तक करने की हिम्मत ही नहीं दिखाई। इसीलिये तो तुम्हारे हौसले बुलंद रहे। हजूर यदि मोदी का 56’’का चैड़ा सीना होता तो वह विश्व भर के देशों के दरवाजे क्यों खटखटाते फिरते।’’
केजरी भैया ने कहा,‘‘ ऐसे ही भीख का कटोरा लेकर नेहरू युग के नेता अनाज के लिये दर दर भटकते थे। उनके अन्तिम समय में हथियारों के लिये घूमते रहे। इन बातों के प्रमाण देश को निरन्तर मिलते रहते थे। यदि ऐसा कोई सर्जिकल आपरेशन हुआ होता तो क्या हम अनजान रह जाते। यह तो अच्छा हुआ कि समय रहते आपने हमारी आंखें खोल दीं नहीं तो हम अन्धेरे में ही रह जाते और प्रधान मंत्री को स्लेयूट ही मारते रह जाते। जबकि वास्तव में उन्होंने केवल हवा में ही लट्ठ घुमाई थी। पूरी जानकारी के लिये धन्यवाद।’’
‘‘अरे यही तो मैं कह रहा था। यदि मोदी जी में दम होता तो हमारे केजरी भैया को वीडियो बनाने के लिये सेना की टुकड़ी के साथ भेजते और वह फटाफट सब काम निपटा कर सकुशल ईलाज के लिये बंगलौर पहुच जाते। ऐसी स्थिति में केजरी भैया सारी दुनिया को बता देते कि उनके नेतृत्व में भारत की लुज पुंज सेना भी सर्जिकल आपरेशन करने में सफल रही। आखिर जब तक अगुआ केजरी भैया जैसा न हो सर्जिकल आपरेशन जैसा मामूली आपरेशन हो ही कैसे सकता है। जब केजरी भैया विश्व को कहते कि हमने कर दिखाया है तो सारी दुनिया उस हरिश्चन्द्र जी की बात को कैसे झुठला पाती। कोई वीडियो तक की बात नहीं करता। पाक सेनाध्यक्ष भी तुरन्त आ कर उनके पैरों में गिर जाते कि भैया आप तो माफ करें मोदी से निपटने का जिगरा तो हमारा था अब आप से कैसे निपटेंगें। आपने तो बड़े बड़ों की एक ही हुंकार से छुट्टी कर दी है हमारी सेना की तो औकात ही क्या। आखिर हम अमेरिकी डालर खा खा कर कब तक आपके सामने ठहरते।’’संजय ने अपनी द्वापरी आंख को मटकाते हुये कहा।
‘‘हम कहां इस बात से इंकार करते हैं संजय मियां पर तुम्हारी निष्ठायें बदलती रहती हैं इसका हम क्या करें। शायद आप भूल गये है कि कभी आप पानी पी पी कर हमें गालियां निकाला करते थे। हमें  ही क्यों कांग्रेस को आपने कहां छोड़ा था। आज कांगे्रसी नेताओं के चरण चुम्बन की दौड़ में सबसे आगे हैं। हम जानते हैं कि द्वापर में भी तुम नौकरी तो कौरवों की करते थे परन्तु निष्ठा तो पांडवों के प्रति ही रखते थे। राजनीति में वैसे भी जब किसी नेता के निजी विचार उसके दल की नीति से अलग होने लगें तो समझ जाना चाहिये कि वह अपनी निष्ठा बदलने की भूमिका बना रहा है। इनकी निष्ठा का इतिहास भी किसी से छिपा हुआ नहीं है केजरी भैया इनसे थोड़ा बच कर चलने में ही भलाई है।‘‘ नवाज शरीफ बोले।
फिर कहा,‘‘हम तो इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि आप दिल्ली को कब एक स्वतंत्र देश बनाते हैं। जब आप नये राष्ट््र के रूप में संयुक्त राष्ट््र संघ का सदस्य बनाने में सफल हो जायेंगें। तभी कश्मीर को आजाद करवाने का रास्ता भी खुल पायेगा। वैसे भी हम जानते हैं कि आप पंजाब के आने वाले चुनावों में खालिस्तान का मुद्दा जोर शोर से उठायेंगंे और जल्दी से जल्दी हम पंजाब को खालिस्तान बनाने में कामयाब हो सकेंगें। हमें जानकारी मिली है कि इसके लिये आपको कनाडा और अमेरिका से अपार धन प्राप्त हो रहा है। दिल्ली फतह करने में यह धन कितना काम आया था आप जानते ही हो।  पहले भी हमने भिंडरावाला का साथ देने के लिये तैयारी कर ली थी परन्तु तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने ब्लू स्टार करके सारी योजना पर पानी फेर दिया। हमारा विचार है कि भिंडरावाला उतना शातिर नहीं था जितना आप हैं। इसलिये हम बहुत आशा भरी नजरों से आपकी ओर देख रहे हैं। जितनी जल्दी आप मोदी और सेना के हौसले पस्त करेंगेंे उतनी ही जल्दी हम सफल होंगें। भले ही आप संजय निरूपम,दिग्विजय सिह और पी.चिदम्बरम को साथ ले लें परन्तु जरा सावधानी से हमारे लिये ये लोग आप जितने विश्वसनीय नहीं हैं। फिर भी कुछ जयचंदों की जरूरत हमेशा से रही है।’’
‘‘जो हुक्म मेरे आका। मैं जल्दी ही वाया खालिस्तान आपके हजूर में आ रहा हूं।’’केजरी भैया बोले।

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1 Comment on "व्यंग्य : केजरी भैया बोले  "

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आर. सिंह
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Bullshit

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