अंध-आस्था से लेस सांप्रदायिकता ही कट्टरवाद की जननी है…..

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श्रीराम तिवारी ईश्वर का नाम लेने में न तो कोई बुराई है और न ही किसी का अनिष्ट होने कि कोई संभावना है.मानव सभ्यता के विभिन्न दौर में प्राकृतिक आपदाओं और वैयक्तिक कष्टों से निज़ात पाने या संघर्ष क्षमता हासिल करने कि चेष्टा में प्रबुद्ध मानवों ने वैज्ञानिक आविष्कारों कि तरह ही मानसिक ,चारित्रिक ,सामाजिक… Read more »

अज्ञेय जन्म शताब्दी वर्ष पर विशेष- बलाओं की मां है साम्प्रदायिकता

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी स.ही.वा.अज्ञेय हिन्दी के बड़े साहित्यकार हैं। उनकी प्रतिष्ठा उनमें भी है जो उनके विचारों से सहमत नहीं हैं। अज्ञेय के बारे में प्रमुख समस्या है कि उन्हें किस रूप में याद करें ? क्या उन्हें धिक्कार और अस्वीकार के साथ देखें ? क्या वे सचमुच में ऐसा कुछ लिख गए हैं जिसके कारण… Read more »