अनसुलझे सवाल!

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-अश्वनी कुमार-    कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। पैरों से चढ़ती ठण्ड हाथों के कम्पन से होती हुई, दांतों की कड़कड़ाहट तक जा रही थी। घर से निकला तो देखा कोहरे की सफ़ेद चादर ने सारे आसमान पर अपना अस्तित्व जमा रखा है। कदम आगे की ओर बढ़ने से मना कर रहे थे, पर… Read more »

कल्याणी का कोप

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सुधीर मौर्य ‘सुधीर’ जसिरापुर और नसिरापुर दो गावं. इन दोनों गावं को विभाजित करके बहती हुई कल्याणी नदी. रात को जब इन गावों में बसे लोग दिन में खेत में किये गए हाड़तोड़ मेहनत की थकान खटिया पर लेट कर दूर कतरे उस समय कल्याणी की बहती धरा के कल-कल की ध्वनि उन थके-हारों किसानो… Read more »

लक्ष्य

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‘’भाभी मैने दाल सब्ज़ी बना दी है, खाना कितनी देर मे खांयेगी आप ?’’ लता ने अनिता से पूछा। ‘’बस, एक घन्टे मे, कुछ ज़रूरी काम निपटा लूँ, तब तक तू पढाई करले।‘’ अनिता ने जवाब दिया । ‘’अच्छा भाभी जब खांयेगी तभी गरम गरम रोटी सेक दूँगी।‘’ लता बोली। ‘’अभी तू इंगलिश का काम… Read more »

कौआ उड़ रहा है

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जन्म के समय उनका राशि का नाम ‘र’ से निकला था इसीलिये रुद्र नाम रखा गया है| वैसे तो भगवान रुद्रा के समान वे क्रोधी नहीं हैं परंतु दिमाग के बड़े तेज हैं स्मरण‌ शक्ति अद्भुत, कहानियाँ सुनने के शौकीन|कितनी भी सुनाओ, एक कहानी और की फरमाइश कभी पूरी नहीं होती है दादी परेशान दादा… Read more »

नियम

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पियूष द्विवेदी ‘भारत’ आज दो दिन हो गए थे उसको गाँव आए! करीब दस साल बाद वो गाँव आया था! इन दस सालों में उसके मम्मी-पापा तो कई बार गाँव आए, पर शैक्षिक-विवशताओं के कारण वो नही आ पाया! पर अब, जब वो गाँव पर था, तो घूम-घूमकर उन सब चीजों को देख रहा था,… Read more »

कहानी – शौक

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शाम का वक्त था, सूरज अपनी दिन भर की मेहनत करके घर वापसी की ओर लोट रहा था। ठीक उसी तरह जैसे कोई दिहाडी मजदूर शाम होते ही अपने घर की राह पकडने की ओर आतुर रहता है। कोई 70-72 साल का एक बुजुर्ग अपनी एक टूटी सी साईकिल पर अपने भविष्य की धरोहर, एक… Read more »

कहानी ; एक मुट्ठी खुशी

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– राजकुमार सोनी मिस्टर और मिसेज रायजादा बगीचे में बैठे हैं। जब से सरकारी नौकरी में आए थे लोग मिस्टर रायजादा के नाम से ही उनको पहचानते हैं। बगीचे में बहुत सारे बच्चे खेल रहे हैं और हम दोनों इन्हीं में अपने बच्चों का बचपन याद करके हंस रहेथे। ये हम दोनों की ही आदत… Read more »

कहानी ; मैं जिंदा हूं

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– राजकुमार सोनी बचपनसे शायद जब मैं 7-8 साल की रही हूंगी तब से ही अछूत थी। मुझे छूने सेलोगों में वायरस फैल जाता था। वायरस भी कोई साधारण नहीं बहुत भयानक था।इसलिए लोग मुझसे ज्यादा बात नहीं करते थे। वैसे तो हम दो बहनें और एक भाईथा। भाई हम दोनों बहनों के बीच में… Read more »

कहानी

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  आलोक कुमार सातपुते फ़र्क़ एक शेरनी अपने बच्चों को शिकार सीखा रही थी,तभी उसकी नज़र महुआ बीनती हुई एक औरत पर पड़ी और उसने उस पर हमला करके उसे गिरा दिया और कहा-मैं तुम्हें खा जाऊँगी । इस पर उस औरत ने हाथ जोड़कर कहा-बहन,तुम मुझे छोड़ दो। मेरे बच्चे भूख से बिलबिला रहे… Read more »

कहानी/ चकाचौंध से परे

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आर. सिंह  “चा ऽ चा ऽ”.यह आवाज कानों में पडते हीं मैं थोडा ठीठका.फिर सोचा यह आवाज यहाँ कहाँ से आ सकती है?यह तो मेरे गाँव,मेरे इलाके की आवाज थी और मैं तो गुजर रहा था,कोलकाता में चौरंगी से. आवाज फिर कानों में टकराई,”चा ऽ चा ऽ”. वही खींची हुई आवाज.”हम आप हीं को पुकार… Read more »