लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

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धन्य हो कबीर जी …. बड़ी सहजता से समाजिक पाखंड धो डाले …. कहीं से उफ़ तक न हुई।
…… ता चढ़ मुल्ला बांग दे , बैहरा हुआ खुदाय ….. यही कुछ हमारे सोनू निगम जी ने अपने शब्दों में क्या कह दिया। …. सारे टी वी चैनल बेचारे के हाथ पैर धो कर पीछे पड़ गए। कबीर जी के वक्त तो लाऊड स्पीकर भी नहीं था ! सोनू जी ने तो आजान की ऊंची आवाज से सुबह की नींद टूट जाने की बात कही ….. ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजाना कानूनन जुर्म है जिसे सोनू जी ने ‘गुंडागर्दी ‘ का नाम दे दिया …. अब कोई कानून को तोड़े उसे ‘गुंडागर्दी ‘ही कहा जाएगा न ! बात तो महज़ कानून को ठेंगा दिखाने वालों पर कोई कार्रवाही न होना है।
मेरी व्यथा सोनू जी से भी विकराल है ….. ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित हूँ ,स्लीपिंग पिल्ज़ ले कर ‘सोने ‘ की महज़ कोशिश ही करता हूँ …हर रात ….. सारी रात नगर पालिका के पाले बीसीओं कुत्ते पंचम सुर में भौंकते हैं …. सारी रात करवटें ले ले कर मैडम मेनका जी को ( ब) -दुआए देते हुए ग़ालिब याद आ जाते हैं ….. मौत का एक दिन मुययंन है , नींद क्यों रात भर नहीं आती ……
खूब भौंकने के बाद अपने रात्रि कर्म से निवृत हो कर लगभग सुबह ४ बजे श्वान परिवार थक हार कर चुप हो जाते हैं ….. और हम भी राहत की सांस लेते हुए कान पर से तकिये हटा कर सोने का जश्न मनाने की तयारी में मशगूल हो जाते हैं !
बामुश्किल आधा-पौना घंटा कमलनयनी निद्रा रानी के बंद आँखों से दीदार होते हैं ….. यका यक
पड़ोस में नई नई उसारी गई मस्जिदों से लाउड स्पीकरों से ‘आज़ान ‘ अल्लाहो अकबर के कर्कश आगाज़ से जगा देती है ….. पी जी आई के सबसे बड़े ख्याति प्राप्त न्यूरो डाक्टर हैरान हैं …..
कि यह शख्स सोता क्यों नहीं ….. इस बार तो डाक्टर साहेब ने दुखी हो कर मेरा केस ‘पागलों ‘के
एक्सपर्ट को रैफर कर दिया है …. मैं सोचता हूँ ‘वह ‘ भी क्या करेगा ….. फिर से ग़ालिब की याद ! …… मौत का एक दिन मय्यन है …नींद क्यों रात भर नहीं आती।

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