बंगाल में हिन्दुओं के ह्रदय पर चोट कर रही है : ममता सरकार 

बीबीसी और केबीसी के अनुसार दुनिया का सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पीछें ममता सरकार इस कद्र पड़ी हुई है, जैसे दुनिया के सबसे बड़े अपराधियों की सूचि में “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” शामिल हो । दुनिया का सबसे बड़ा संगठन जो केवल और केवल सेवा भाव के लिए जाना जाता है, उसके कार्यक्रमों को रद्द कराने के पीछे ममता सरकार की क्या मंशा हो सकती है ? कहीं ममता को आगे अपनी कुर्सी खिसकने का डर तो नही सता रहा, या फिर ममता को भी हुर्रियत नेताओं की तर्ज पर कोई बाहरी फंडिंग तो नही आ रही ? अगर बाहरी फंडिंग नही आती है, तो सेवाव्रती समाज पर ही इतने प्रतिबंध क्यों?
जब हरियाणा के फरीदाबाद में 1998 रेल दुर्घटना हो जाती है, तब समाज के कुछ लोग रेल दुर्घटना में घायल लोगों की सहायता के लिए उस स्थान पर कुछ लोग एकत्र होकर आगे जाने की कोशिश करते हैं। लेकिन उन लोगो को हरियाणा पुलिस के अधिकारी आगे जाने की अनुमति नही देते, लेकिन तभी कुछ नवयुवक उस स्थान पर दौड़कर आते है, जिन्होंने खाकी निक्कर पहनी हुई थी । जिनकों देखकर हरियाणा पुलिस के अधिकारी और स्टाफ उनके लिए रस्ता देतें है और अपने स्टाफ से कहते हैं ये सेवा करेंगें यानि जिनकी सेवा भाव पर पुलिस जैसे लोग भी शक नही करते और उसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा निर्माण राष्ट्रीय सेवा भारती दिल्ली की ईकाई को दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित उनकी सेवा भावना को देखकर वर्षों तक सम्मानित करती रही. जिस पर दिल्ली की मुख्यमंत्री के इस कदम का कई कांग्रेसी विरोध भी कर चुके थे, लेकिन शीला सरकार को मालूम था कि दिल्ली के अंदर सबसे ज्यादा कोई संगठन सेवा कार्य करता है तो वो है “सेवा भारती” लेकिन दुनिया भर में हिन्दुओं की शक्ति जिस तेजी के साथ बढ़ रही है, और जब बंगाल के अंदर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता तेजी के साथ काम करने लगें जिसके कारण हिंदुत्व की शक्ति बढ़ने लगी तो ममता बनर्जी सरकार को अपनी कुर्सी हिलने का खतरा लगने लगा. जिसके कारण बंगाल सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के होने वाले कार्यक्रमों को रद्द करने की कोशिशों में लग गई. ममता बनर्जी सरकार की कोशिश के पीछे असली मकसद एक खास समुदाय (मुस्लिम) को रिझाकर उसकें वोटो को पक्का करना सत्ता हासिल करना और साथ ही ममता बनर्जी देश के बहुसंख्यक समाज को दरकिनार कर अपनी हिन्दू विरोधी छवि को प्रदर्शित कर रही है. जिससे मौजूदा सरकार की तुष्टीकरण नीतियों से समाज को अवगत होना बहुत जरूरी है.
इसी तुष्टीकरण की वजह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ मोहन जी भागवत का कोलकाता के महाजाति सदन ऑडिटोरियम में कार्यक्रम निर्धारित था, लेकिन हॉल की बुकिंग ममता बनर्जी के कहने पर रद्द कर दी गई.
आखिर हिन्दुओं से ममता को इतनी नफरत क्यों ?
तमाम घटनाओं को देखने के बाद सवाल उठना स्वभाविक है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की सोच किसी मुस्लिम राष्ट्र के शासक की सोच की तरह क्यों होती जा रही है? क्योंकि भारत का संविधान सबको अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा और उपासना की स्वतंत्रता देता है, फिर पश्चिम बंगाल की सरकार जानबूझकर सिर्फ हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ही क्यों आहत करती है ? ममता बनर्जी क्या देश विरोधी ताकतों के इशारे पर ऐसे देश तोड़ने वाले हथकंडे अपना रही हैं. राज्य में बेतहाशा बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या और टीएमसी सरकार की हिंदू विरोधी सोच के बीच कौन सी खिचड़ी पक रही है?

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