लेखक परिचय

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान, आज़मगढ़ जिले में जन्म, आज़मगढ़ के शिबली नेशनल डीग्री कॉलेज से अँग्रेजी में स्नातकोत्तर, हिन्दी में नियमित लेखन, मुख्यरूप से स्त्री विमर्श, प्रेम व गुरु विषयों पर लेखन...

मैं भी तो आगे बढ़ नहीं पायी

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  जब गुजरती हूँ उन राहों से, मेरी तेज धड़कने आज भी तेरे होने का एहसास करा जाती है ।   जब गुज़रती हूँ उन गलियों से, मेरे खामोश कदमों से भी आहट तुम्हारी आती है ।   देखो… देखो …. उन सीढ़ियों पर बैठकर, तुम आज भी मेरा हाथ थाम लेते हो; देखो ……. Read more »

वो लड़की ,जो इतनी चुपचाप बैठी है

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वो लड़की ,जो इतनी चुपचाप बैठी है पर ना जानें कितनों में ,खुद को साथ लेकर बैठी है   उसके होने में एक अमिट छाप है पर उसके होठों की  हँसी और आंखों  की नमी की तरम्यता में कुछ हास् है जैसे  उसके लबों को आज भी हँसी की तलाश है   वो लड़की जो… Read more »



तुम याद आते हो

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मेरे गाँव,मेरे देश,तुम बहुत याद आते हो जब ढूँढना पड़ता है, एक छांव वो नल, जो बिन पैसे की ही प्यास बुझाती है तब मेरे गाँव, तुम बहुत याद आते हो निगाहें टिक गयी ,उन आते जाते लोगों देखकर पर हृदय में कोई रुदन करता है कि क्यूँ … मैं भी आज इसका किस्सा हूँ… Read more »

सौन्दर्या

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एक बहुत ही मीठी ,मधुर ध्वनि या स्वर सुनायी  दे रही है ।आज सुबह मैं  होटल  की बालकनी मे खड़े होकर मनाली की रहस्यात्मक खूबसूरती के राज का आनंद ले रहा था। पर ये ध्वनि कहाँ  से आ रही है –एकदम मन को मोह लेनी   वाली अब तो आवाज भी आने लगी थी वो आवाज… Read more »

कुछ कहानियाँ

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कुछ कहानियाँ ऐसी भी होती है। जो भूलती है ,पर भुलने नहीं देती है। दिल की छुअन में इस तरह से रहती है। क़ि गुमनाम का भी इशारा होती है। और एहसास में भी तरोताजा होती है। एक पहलू जब इस कहानी का हमसे भी मेल खाती है। तब न जाने क्यों एक छाप सी… Read more »

फुटपाथ पर सोया बालक और मेरा ममत्व

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मुझे ये लगता है कि माँ होना या माँ बनना, दोनो ही बातें, अपने में एक विशेषता लिए आती है । हमेशा ही मेरी आँखें माँ के नाम पर नम हो जाती है; और माँ बनने की अभिलाषाओं को त्वरित कर देती है । कहते है कि स्त्री तब तक माँ नहीं बनती जब तक… Read more »

ये अकेलापन

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बहुत ही दूर तक दिखता है मुझको ये अकेलापन तुम्हारे साथ होने पर भी नहीं हटता है ये अकेलापन कभी किया करती हूँ खुद से बातें मैं बेपर्दा कि _छुप के देखता है मुझको ये अकेलापन हृदय के एक कोने में जब याद उठती है तुम्हारी कि_छुप के साँस लेता है मुझमें ये अकेलापन कितनी… Read more »

मेरे हृदय का एक कोना

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मेरा नाम प्रियांशी है। मै एक एहसास हूँ अपनी माँ के सपनों का, भावनाओं का.और ये मेरा नाम भी मैंने अपनी माँ से ही लिया है.हर माँ अपनी बेटी को अपने तरीके से संजोना चाहती है पर मेरी माँ तो बस मुझे अपनी कल्पनाओं में ही सवारतीं रहती है। मै अपनी माँ के दिल का… Read more »

तुम्हारी आँखें

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—-अनुप्रिया अंशुमान मोहब्बत की दुनिया है तुम्हारी आँखें, चमकता हुआ सितारा है तुम्हारी आँखें । तुम्हारे ही दम से है मेरा ये नसीब, मेरी पहचान है ये तुम्हारी आँखें ॥ आँखें बोलती है तुम्हारे दिल की धड़कन, दिल की धडकनों की आवाज़ है तुम्हारी आँखें । आँखों से बरसता है जहाँ हल्का सा नशा ॥… Read more »