वीरेन्द्र परमार

एम.ए. (हिंदी),बी.एड.,नेट(यूजीसी),पीएच.डी., पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक,सांस्कृतिक, भाषिक,साहित्यिक पक्षों,राजभाषा,राष्ट्रभाषा,लोकसाहित्य आदि विषयों पर गंभीर लेखन I प्रकाशित पुस्तकें :- 1. अरुणाचल का लोकजीवन(2003) 2.अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य(2009) 3.हिंदी सेवी संस्था कोश(2009) 4.राजभाषा विमर्श(2009) 5.कथाकार आचार्य शिवपूजन सहाय (2010) 6.डॉ मुचकुंद शर्मा:शेषकथा (संपादन-2010) 7.हिंदी:राजभाषा,जनभाषा, विश्वभाषा (संपादन- 2013) प्रकाशनाधीन पुस्तकें • पूर्वोत्तर के आदिवासी, लोकसाहित्य और संस्कृति • मैं जब भ्रष्ट हुआ (व्यंग्य संग्रह) • हिंदी कार्यशाला: स्वरूप और मानक पाठ • अरुणाचल प्रदेश : अतीत से वर्तमान तक (संपादन ) सम्प्रति:- उपनिदेशक(राजभाषा),केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, जल संसाधन,नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय(भारत सरकार),भूजल भवन, फरीदाबाद- 121001, संपर्क न.: 9868200085

पूर्वोत्तर भारत की स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिन्ल्यू

वीरेन्द्र परमार जेलियांगरोंग तीन नागा जनजातियों की सामूहिक संज्ञा है I इन जनजातियों के लोग पूर्वोत्तर के तीन राज्यों असम,...

अजातशत्रु संपादक आचार्य शिवपूजन सहाय

-वीरेन्द्र परमारबहुआयामी प्रतिभा के धनी साहित्य मनीषी आचार्य शिवपूजन सहाय सरस्वती के ऐसे वरद पुत्र थे जिन्होंने लगभग आधी शताब्दी...

 पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी समुदाय का खान – पान

वीरेन्द्र परमार भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार और तिब्बत – पाँच देशों की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अवस्थित...

शिव :पूर्वोत्तर भारत के सर्वमान्य ईश्वर

धर्म की दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत को निम्नलिखित वर्गों में विभक्त किया जा सकता है : 1. प्रकृतिवादी अथवा ब्रहमवादी...

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