प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी

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प्रदेश संयोजक भाजपा किसान मोर्चा, शोध मप्र
सलाहकार, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, राज भाषा

लेखक - प्रवीण गुगनानी - के पोस्ट :

समाज

शाहबानो से शायरा बानो तक

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यह बड़ा ही शर्मनाक तथ्य है कि जो तीन तलाक पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक देश में 1961 में प्रतिबंधित हो गया  और पच्चीसों अन्य अरब-इस्लामिक देशों में दशकों से प्रतिबंधित है वही तीन तलाक भारत में आज भी शाहबानों से लेकर शायरा बानों तक कछुआ चाल से ही पहुँच पाया है. शायरा बानो वह मुस्लिम […]

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राजनीति

भाजपाई सोशल इंजीनियरिंग के शिल्प: कोविंद

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भारत में राष्ट्रपति चुनावों में प्रत्याशियों के चयन का बेहद उजला व प्रतिष्ठाजनक इतिहास रहा है तो वहीँ दूसरी ओर ग्यानी जैलसिंह व प्रतिभा पाटिल जैसे नाम भी रहें हैं जिन्होनें राष्ट्रपति भवन की गरिमा को दीर्घकालीन चोटिल किया है. ज्ञानी जैलसिंह सिंह ने तो सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि मैं सार्वजनिक रूप से इंदिरा गांधी की चप्पलें भी उठा सकता हूँ. ठीक इसी भातिं प्रतिभा ताई पाटिल की सबसे बड़ी योग्यता “गांधी परिवार की वफादारी” मात्र ही थी.

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विविधा

व्यग्र न हों – मोदी पर विश्वास रखें

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जैसा कि इस आलेख के प्रथम पक्ष में ही मैंने चाणक्य का उद्धरण देकर बताया कि हमें स्वयं को साधकर सटीक समय पर अपना सर्वोत्तम करना होगा. आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है. और आज के समय की सबसे दुखद परिस्थिति यही है कि हमारी पीढ़ी कुछ अधिक व्यग्र है, वह कुछ अधिक ही हावी होनें के प्रयास में भी रहती है किंतु इस क्रम में आगे बढ़ते हुए वह स्वनियंत्रण को ही खो बैठती है जो इस समय की मूल ही नहीं अपितु परम आवश्यक आवश्यता रहती है. हम देख रहें हैं कि पाकिस्तान द्वारा हमारें सैनिकों के साथ पाशविक आचरण के बाद मीडिया पर और विशेषतः सोशल मीडिया द्वारा नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जिस तरह का बदला लेनें का मानसिक दबाव बना दिया गया है. लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित किसी भी सरकार के लिए ऐसा जनदबाव खतरनाक साबित हो सकता है, वो तो अच्छा है कि मोदी सरकार और उसके विभिन्न भाग व अंग इस जनदबाव के समक्ष भी अपनें विवेक व दायित्वबोध को यथा स्थान, यथा समय व यथा संतुलन समायोजित किये हुए है.

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समाज

विश्व भर के मुस्लिमों को राह दिखाएगा भारतीय मुस्लिम

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हाल ही में जब कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक के विषय में कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करनें के लिए कहा तब नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस मुद्दें पर कन्नी काटने व चुप बैठे रहनें के स्थान पर संविधान की धारा 44 के मर्म को समझ कर अपनी जिम्मेदारी निभाई व तीन तलाक के मुद्दे पर स्पष्ट असहमति व्यक्त कर दी है. 1840 में यह विवाद प्रथम बार उभरा था और 1985 में राजीव गांधी सरकार के समय तो शाह बानो प्रकरण से यूनिफार्म सिविल कोड अतीव सुर्ख़ियों में आया था.

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राजनीति

विपक्षी दल बताएं: पत्थरबाजों के साथ हैं या सेना के साथ

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कश्मीर में पत्थरबाजी और सेना की जीप पर बंधे युवक विषय पर जहां दिग्विजय ने एक भड़काऊ बयान देकर सेना की पवित्रता को ललकारा है वहीँ दूसरी ओर कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार के सदस्य व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी अगली पिछली खुजली को एक ट्वीट के माध्यम से व्यक्त किया है व भारतीय सेना के विपरीत वातावरण बनाने का दुष्प्रयास किया है. दिग्विजय व उमर अब्दुल्ला सेना द्वारा जीप पर बांधकर घुमाए जा रहे जिस युवक का वितंडा खड़ा किया जा रहा है; उसके पीछे की परिस्थितियां भी देश के समक्ष स्पष्ट हो जानी चाहिए.

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विधि-कानून विविधा शख्सियत

बाबासाहेब – एक अनुकरणीय व्यक्तित्व

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पूना पैक्ट की पीठ तक की यात्रा तक में बाबा साहेब भारत की एक बड़े दलित राजनैतिक केंद्र और संस्था के रूप में स्थापित हो चुके थे. ब्रिटिशर्स और गांधी दोनों के ही प्रति जातिगत व्यवस्थाओं में परिवर्तन को लेकर उदासीनता को लेकर वे खिन्नता प्रकट करते थे. दलितों और अछूतों की स्वतंत्र राजनैतिक परिभाषा और पहचान को लेकर वे संघर्ष को तीक्ष्ण कर रहे थे उस दौर में बाबा साहेब ने गांधी के प्रति यह नाराजगी भी प्रकट किया था कि वे दलितों को हरिजन कहनें के पीछे जिस प्रकार का भाव प्रकट करते हैं उसमें दलित देश में एक करुणा मात्र की वस्तु बन कर रह गएँ हैं.

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