समाज वैदिक धर्म की रक्षक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली January 31, 2019 / January 31, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक धर्म सनातन धर्म है। इसका आरम्भ ईश्वर प्रदत्त ज्ञान से हुआ है जिसे वेद कहते हैं। वेद संख्या में चार हैं जिनके नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं। इन चार वेदों में ईश्वर ने मनुष्यों को उनके ज्ञान, कर्म व उपासना सहित कर्तव्यों की शिक्षा दी है। इसके […] Read more » gurukul shiksha pranali गुरुकुल शिक्षा प्रणाली
धर्म-अध्यात्म पिछले पांच हजार वर्षों में दयानन्द के समान ऋषि नहीं हुआ” January 31, 2019 / January 31, 2019 | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य महाभारत का युद्ध पांच हजार वर्ष से कुछ वर्ष पहले हुआ था। महाभारत युद्ध के बाद भारत ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र सहित देश की अखण्डता व स्थिरताकी दृष्टि से पतन को प्राप्त होता रहा। महाभारत काल के कुछ ही समय बाद देश से ऋषि परम्परा समाप्त हो गई। ऋषि परम्परा का […] Read more » Maharshi Dayanand swami dayanand दयानन्द
धर्म-अध्यात्म देश की एकता व अखण्डता के लिए अविरुद्ध व समान धार्मिक एवं राजनैतिक विचारधारा का होना आवश्यक January 27, 2019 / January 27, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋग्वेद 10/191 में संगठन सूक्त के चार मंत्रों में कहा गया है कि हमारे मन, हृदय, दिल, विचार, भावनायें, सोच, चिन्तन, संकल्प आदि सब एक समान हों। ऐसा होने पर ही हम एकता व अखण्डता के सूत्र में बन्ध सकते हैं। यह एक सामान्य बात है कि यदि मनुष्यों की भिन्न-भिन्न […] Read more »
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द की देन ज्ञान-विज्ञान का एक प्रमुख सिद्धान्त January 24, 2019 / January 24, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वर्तमान युग आधुनिक युग है जिसमें ज्ञान व विज्ञान ने प्रशंसनीय उन्नति की है। इस उन्नति में मनुष्य के जीवन को सुखी, सुविधापूर्ण व सम्पन्न बनाया है। मनुष्य जीवन का उद्देश्य भी दुःखों की निवृत्ति करना ही है। मनुष्य की आत्मा अनादि, अविनाशी, नित्य व अमर है। इसकी न कभी उन्नति […] Read more »
समाज “मांसाहार मनुष्य के स्वभाव व प्रकृति के अनुरूप नहीं है” January 22, 2019 | Leave a Comment ओ –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। परमात्मा ने इस सृष्टि व ब्रह्माण्ड को बनाया है और इसमें अनेक प्रकार के प्राणियों व वनस्पति जगत को भी बनाया है। जितने भी प्राणी हैं वह सब जीवधारी अर्थात् जीवात्मा को अपने शरीर में धारण किये हुए हैं। शरीर में विद्यमान जीवात्मा एक अनादि, नित्य, अमर, अविनाशी, एकदेशी, […] Read more »
धर्म-अध्यात्म हमें पता नहीं इस जन्म में हम कहां से आये और इसके बाद कहां जाना है ? January 21, 2019 / January 22, 2019 | 2 Comments on हमें पता नहीं इस जन्म में हम कहां से आये और इसके बाद कहां जाना है ? –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। हम मनुष्यों ने वर्तमान आधुनिक ज्ञान विज्ञान के युग में जो जानना चाहा वह जान लिया और विज्ञान विषयक जिस खोज को आरम्भ किया उसमें से अधिकांश व प्रायः सभी ल क्ष्यों को प्राप्त भी कर लिया है। अनेक प्रश्न आज भी ऐसे हैं जिसका उत्तर हमें ज्ञान विज्ञान के […] Read more »
धर्म-अध्यात्म यह बृहद् ब्रह्माण्ड किसने बनाया है?” January 21, 2019 / January 21, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। हम अर्थात् हमारी आत्मा हमारे शरीर में रहती है और हम व हमारा शरीर दोनों इस संसार में रहते हैं। हम इस संसार के बड़े पदार्थों को तोड़ते हैं तो वह छोटे छोटे टुकड़ों व कणों में परिवर्तित हो जाते हैं। इससे यह ज्ञात होता है कि यह संसार छोटे-छोटे […] Read more »
विविधा उपासना किसकी, क्यों व कैसे करें? January 17, 2019 / January 17, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य अध्यात्म विज्ञान में उपासना का महत्व सर्वोपरि हैं। उपासना पास बैठने को कहते हैं। किसके पास बैठना है, इसका उत्तर हम विचार करके प्राप्त कर सकते हैं। माता-पिता के पास बैठने से उनसे अनेक सांसारिक, पारिवारिक व धर्म विषयक बातों को ज्ञान होता है। आचार्य के पास बैठने से अपने अध्ययन […] Read more » whom to worship why to worship god उपासना
प्रवक्ता न्यूज़ आर्यसमाज की स्थापना क्यों की गई थी?” January 14, 2019 / January 14, 2019 | 1 Comment on आर्यसमाज की स्थापना क्यों की गई थी?” -मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज समाज देश का धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रीयता का पोषक, अविद्या को दूर कर विद्या वृद्धि करने वाला अनेक गुणों से सम्पन्न एक वैश्विक संगठन है। आर्यसमाज की स्थापना इसके संस्थापक वेदों के महान विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में की थी। इसका उद्देश्य वैदिक सिद्धान्तों व […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन में स्वाध्याय करना उन्नति के लिए आवश्यक है January 14, 2019 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जन्म अपनी आत्मा व संसार के रचयिता परमेश्वर को जानने, ईश्वर की उपासना करने, सद्कर्म अर्थात् धर्म करने सहित ईश्वर का साक्षात्कार करने के लिये हुआ है। मनुष्य को अपने कर्तव्यों का बोध अपने माता-पिता व आचार्यों सहित ईश्वरीय ज्ञान वेद व ऋषियों के ग्रन्थों से होता है। सृष्टि के […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मनुष्य का धर्म मनुष्यता के पर्याय श्रेष्ठ गुणों को धारण करना है January 14, 2019 / January 14, 2019 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक प्राणी योनियां हैं जिनमें एक मनुष्य है। मनुष्य योनि को सबसे श्रेष्ठ योनि कहा जाता है। इसका कारण है कि इसके पास विचार करने के लिए बुद्धि और बोलने के लिए वाणी हैं। इतना ही नहीं, यह सीधा सिर उठाकर अपने दो पैरों के बल पर चल सकता […] Read more » श्रेष्ठ गुणों को धारण
धर्म-अध्यात्म जीवन की सफलता का आधार ज्ञान व पुरुषार्थ January 9, 2019 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जीवन हमें परमात्मा से पूर्वजन्म के प्रारब्ध को भोगने व नये कर्म कर दुःखों से मुक्ति प्राप्त करने के लिये मिला है। प्रारब्ध वह कर्म संचय है जो हमने पूर्वजन्मों में किये हैं परन्तु जिसका सुख व दुःख रूपी भोग अभी करना शेष होता है। योगदर्शन के एक सूत्र में […] Read more »