राजीव रंजन प्रसाद

लेखक मूल रूप से बस्तर (छतीसगढ) के निवासी हैं तथा वर्तमान में एक सरकारी उपक्रम एन.एच.पी.सी में प्रबंधक है। आप साहित्यिक ई-पत्रिका "साहित्य शिल्पी" (www.sahityashilpi.in) के सम्पादक भी हैं। आपके आलेख व रचनायें प्रमुखता से पत्र, पत्रिकाओं तथा ई-पत्रिकाओं में प्रकशित होती रहती है।

नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के साथी “क्रांतिकारी मोहन लहरी” नहीं रहे – विनम्र श्रद्धांजलि

राजीव रंजन प्रसाद अभी-अभी यह दु:खद सूचना मिली है कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस

अब न बुद्ध हैं, न आम्रपाली, न ही वह वैशाली रही; क्या गणतंत्र है?

 [वैशाली, बिहार से यात्रा संस्मरण] राजीव रंजन प्रसाद भगवान महावीर की जन्मस्थली –वैशाली तीन बार

हे बुद्ध आपने तो रास्ता दिखाया था हम ठौर पर ही मंदिर बना कर बैठ गये

[राजगीर से यात्रावृतांत] राजीव रंजन प्रसाद  राजगीर (राजगृह) को निहारता हुआ मैं उस बुद्धकालीन भारत

“हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद

माओवादियों ने बस्‍तर को आग के हवाले कर दिया है, जिसकी तपिश में भोले-भाले आदिवासी