सुप्रिया सिंह

स्वतंत लेखिका

सही गलत की नौकरी !

राजनीति और चुनाव मे नेताओं की क्रियाकलाप की आलोचना करना गलत नही है या यूँ कहे कि बिल्कुल भी गलत नही है और तो और ये तो आपका अधिकार भी है लेकिन ये गलत तब गलत हो जाता है जब अधिकार – अधिकार चिल्लाकर अधिकार के शोर मे कृत्वयों को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है । घर के बाहर सही जगह पर कचरा न फेंकने वाले गन्दगी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते है , ट्रैफिक पर सिंग्लन तोड़ कर जाने वाले दुर्घटना का शिकार होने पर सड़को की आड़ लेकर सरकार को कोसते है ।

आखिर क्यों युवराज की करीबी दूरी में बदल रही है ?

कहते है कि युवराज को कोई चीज बिना मांगे ही मिल जाती है और जब तक युवराज उस चीज की मांग करता है तब तक वे चीज उसके सामने हाजिर हो जाती है पर यहाँ तो स्थिति उल्टी ही है युवराज बेचारा हर बार कहता है कि वे अब बड़ा हो गया है और जिम्मेदारी उठा सकता है पर महारानी का पद लोभ और युवराज का अपरिपवक्क व्यवहार महारानी को उनके पद से दूर नही जाने दे रहा है और युवराज को पद के करीब नही आने दे रहा है ।

यहाँ तो घर की मुर्गी दाल बराबर ही है !

स्थिति ऐसी लगती है जैसा कबड्डी के साथ घर की मुर्गी दाल बराबर जैसा व्यवहार हो रहा है । वर्ल्ड कप , वर्ल्ड कप होता है चाहे वे किसी भी खेल का क्यों न हो पर अपने यहाँ तो वर्ल्ड कप मतलब क्रिकेट वर्ल्ड कप और कुछ नही । ये बात समझी जा सकती है कि व्यक्ति की खेल भावना मे एकाएक बड़ा बदलाव सम्भव नही है और न ही कोई क्रिकेट प्रेमी एकाएक कबड्डी प्रेमी बनकर उसकी बारिकियों का विश्लेषण कर सकता है और एकाएक इतने बड़े बदलाव की उम्मीद न तो समाज हमसे करता और न ही उस खेल के खिलाड़ी , वे तो बम इस इतनी