वीरेंदर परिहार

वीरेंदर परिहार

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लेखक - वीरेंदर परिहार - के पोस्ट :

कला-संस्कृति विविधा

राम और रामराज्य

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गांधीजी कहते थे- ‘‘अपराधी से नहीं अपराध से घृणा होनी चाहिये।’’ कितना भी बड़ा अपराध क्यों न हो, उसे एहसास करनें वाला, लज्जित होने वाला अपराध का परिमार्जन कर देता है। निश्चित रूप से अपराधबोध से ग्रस्तव्यक्ति का व्यक्तित्व भी विभाजित होगा और ऐसे व्यक्ति एक आदर्श समाज बनाने मे सहायक नहीं हो सकते। श्री राम को यह बात अच्छी तरह पता है। यद्यपि सत्ता के लिये निकटतम सम्बंधियों की हत्याओं से इतिहास भरा पड़ा है। मुस्लिमों की परम्पराओं पर इस सम्बंध में अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वहीं सिंहासन की जगह वनवास दिलाने वाली कैकेयी को श्री राम लज्जित समझकर सबसे पहले उसी से मिलकर उसे अपराध बोध से मुक्त कराते हैं। इस तरह से श्रीराम जैसे उदात्त दृष्टि वाले शासक अथवा अग्रणी व्यक्ति होंगे, तभी इस धरती पर रामराज्य संभव है।

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राजनीति

डर काहे का

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वीरेन्द्र सिंह परिहार सी.बी.आई. ने 17 हजार करोड़ रू. के रोजवैली चिटफंड घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोपी सुदीप बंद्योपध्याय को गिरफ्तार क्या किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल काॅग्रेस ने सारी मर्यादाएॅ तोड़ दी। ज्ञातव्य है कि 30 दिसम्बर को सी.बी.आई. पांेजी योजना घोटाला में ऋणमूल के एक […]

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विधि-कानून विविधा

आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति

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उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के काॅलेजियम द्वारा भेजे गए 77 नामों में से 34 नामों की स्वीकृति केन्द्र सरकार द्वारा दिए जाने से ऐसा लगने लगा था कि न्यायपालिका और सरकार के बीच बर्फ गलने लगी है, और अंतोगत्वा दोनों के बीच जजों की नियुक्तियों को लेकर कोई आम सहमति बन जाएगी। लेकिन 43 नामों को केन्द्र सरकार द्वारा वापस कर दिए जाने और उन नामों को पुनः काॅलेजियम द्वारा केन्द्र सरकार के पास भेजे जाने से ऐसा लगता है कि न्यायपालिका और सरकार आमने-सामने आ गए हैं।

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