विविधा ‘‘तेरा वैभव अमर रहे माँ’’ April 5, 2017 / April 5, 2017 | Leave a Comment यह भाजपा की ही विशेषता है कि वह एक पूर्णतः लोकतांत्रिक संगठन है। जिसमें कोई छोटा से छोटा कार्यकर्ता भी शिखर तक पहुंच सकता है। वह किसी व्यक्ति विशेष या परिवार की पार्टी नहीं है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी स्वतः एक शिक्षक के बेटे हैं, तो लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान से आएं शरणार्थी हैंे। भाजपा के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वतः कभी रेल्वे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। Read more » BJP foundation day Featured भाजपा स्थापना-दिवस
कला-संस्कृति विविधा राम और रामराज्य April 3, 2017 / April 3, 2017 | Leave a Comment गांधीजी कहते थे- ‘‘अपराधी से नहीं अपराध से घृणा होनी चाहिये।’’ कितना भी बड़ा अपराध क्यों न हो, उसे एहसास करनें वाला, लज्जित होने वाला अपराध का परिमार्जन कर देता है। निश्चित रूप से अपराधबोध से ग्रस्तव्यक्ति का व्यक्तित्व भी विभाजित होगा और ऐसे व्यक्ति एक आदर्श समाज बनाने मे सहायक नहीं हो सकते। श्री राम को यह बात अच्छी तरह पता है। यद्यपि सत्ता के लिये निकटतम सम्बंधियों की हत्याओं से इतिहास भरा पड़ा है। मुस्लिमों की परम्पराओं पर इस सम्बंध में अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वहीं सिंहासन की जगह वनवास दिलाने वाली कैकेयी को श्री राम लज्जित समझकर सबसे पहले उसी से मिलकर उसे अपराध बोध से मुक्त कराते हैं। इस तरह से श्रीराम जैसे उदात्त दृष्टि वाले शासक अथवा अग्रणी व्यक्ति होंगे, तभी इस धरती पर रामराज्य संभव है। Read more » राम राम और रामराज्य रामनवमी रामराज्य
राजनीति यह पब्लिक है: सब जानती है March 18, 2017 | 1 Comment on यह पब्लिक है: सब जानती है नरेन्द्र मोदी आज भारतीय राजनीति में ऐसे महानायक बन चुके हैं, जिनका रास्ता कोई नहीं रोक सकता। ऐसा माना जाना चाहिए कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और गरीबों के प्रति प्रतिबद्धता के चलते वह राष्ट्र को विकास की दिशा में तेज गति से ले जा सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह कि जो लोग मतदाताओं को नसमझ समझते हैं, अब उनकी आॅखें खुल जानी चाहिए। ‘‘यह पब्लिक है....सब जानती है। Read more » Featured
राजनीति सुशासन के आइने में मोदी सरकार March 9, 2017 | 3 Comments on सुशासन के आइने में मोदी सरकार वीरेन्द्र सिंह परिहार सुशासन यानी कि अच्छा शासन, #कुशासन का, #भ्रष्टाचार का, #भाई-भतीजेवाद का अभाव। सम्प्रदाय, जाति, अपने-पराये के आधार पर कार्य न होकर समता और न्यायपूर्ण दृष्टि से सरकार के कार्य हों। नागरिकों को वाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा प्राप्त हो, नागरिक लालफीताशाही, नौकरशाही के शिकार न हो। समाज में सबसे अंतिम छोर पर खड़े […] Read more » Featured Modi government मोदी सरकार सुशासन
विविधा अब तो इस तालाब का पानी बदल दो… March 6, 2017 / March 6, 2017 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार अभी गत दिनों कुछ ऐसी बातें देश के सामने आईं, जिसे लेकर पूरे देश को यह गहन चिंतन करने की जरूरत है कि आखिर इसका इलाज क्या है? यह प्रकरण है कि अरूणांचल के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल के आत्महत्या के पूर्व उनके द्वारा लिखित डायरी का। ऐसा माना जाता है कि […] Read more » Featured न्यायपालिका की स्वतंत्रता पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल के आत्महत्या के पूर्व उनके द्वारा लिखित डायरी भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार महामारी की तरह व्याप्त
विविधा लुटता-पिटता और पलायन करता हिंदू February 7, 2017 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार जिस तरह से बांग्लादेश छोड़कर हिंदू भारत में शरण लेने को बाध्य हैं, उसे देखते हुए अगले तीस वर्षों में बांग्लादेश हिंदू विहीन हो जाएगा। ढाका युनिवर्सिटी में जाने-माने प्रोफेसर डॉ. अब्दुल बरकत के अनुसार औसतन 623 हिंदू प्रतिदिन बांग्लादेश छोड़ रहे हैं। उनके अनुसार यदि इसी तरह पलायन होता रहा तो […] Read more » Featured hindu in Bangladesh पलायन करता हिंदू बांग्लादेश बांग्लादेशी हिंदु लुटता-पिटता हिंदू हिंदू
राजनीति डर काहे का January 14, 2017 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार सी.बी.आई. ने 17 हजार करोड़ रू. के रोजवैली चिटफंड घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोपी सुदीप बंद्योपध्याय को गिरफ्तार क्या किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल काॅग्रेस ने सारी मर्यादाएॅ तोड़ दी। ज्ञातव्य है कि 30 दिसम्बर को सी.बी.आई. पांेजी योजना घोटाला में ऋणमूल के एक […] Read more » Featured तृणमूल काॅग्रेस पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी पश्चिम बंगाल में मुस्लिम-बाहुल्य क्षेत्रों में हिन्दुओं का जीना दूभर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुस्लिम-प्रेम रोजवैली चिटफंड घोटाले सुदीप बद्योपध्याय
आर्थिकी राजनीति नोटबन्दी : क्या खोया-क्या पाया? January 8, 2017 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार मोदी सरकार द्वारा 8 नवम्बर से 1,000 एवं 500 रू. पर लागू #नोटबंदी की अवधि 30 दिसम्बर को समाप्त हो चुकी है। नोटबंदी के विरोध में जब विरोधी दलों ने तमाम तरह की कटु आलोचना करना शुरू कर दिया और सड़को पर उतरने लगे। तब प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से कहा कि […] Read more » notebandi क्या खोया-क्या पाया नोटबन्दी फर्जी विकास बेनामी हस्तान्तरण कानून समानान्तर अर्थव्यवस्था
राजनीति कश्मीरियत बनाम भारतीयता January 2, 2017 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार देश विभाजन के वक्त पाकिस्तान से जम्मु कश्मीर में आए 7 लाख हिन्दू शरणार्थी जो अब 50 लाख से ऊपर हो चुके है, सन् 1947 से लेकर अभी तक अमानवीय परिस्थितियों में जीने को बाध्य हैं। उन्हें देश की नागरिकता तो प्राप्त है लेकिन जम्मू कश्मीर की नागरिकता प्राप्त नहीं है। स्थिति […] Read more » Featured refugee hindus from Pakistan refugees कश्मीरियत कश्मीरियत बनाम भारतीयता भारतीयता मुस्लिम शरणथियो को नागरिकता रोहिग्या मुस्लिमान हिंदू शरणार्थी
विधि-कानून विविधा आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति December 7, 2016 | 2 Comments on आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के काॅलेजियम द्वारा भेजे गए 77 नामों में से 34 नामों की स्वीकृति केन्द्र सरकार द्वारा दिए जाने से ऐसा लगने लगा था कि न्यायपालिका और सरकार के बीच बर्फ गलने लगी है, और अंतोगत्वा दोनों के बीच जजों की नियुक्तियों को लेकर कोई आम सहमति बन जाएगी। लेकिन 43 नामों को केन्द्र सरकार द्वारा वापस कर दिए जाने और उन नामों को पुनः काॅलेजियम द्वारा केन्द्र सरकार के पास भेजे जाने से ऐसा लगता है कि न्यायपालिका और सरकार आमने-सामने आ गए हैं। Read more » Collegium System of judges Featured काॅलेजियम काॅलेजियम व्यवस्था न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रधान न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर सर्वोच्च न्यायालय सशक्त एवं निष्पक्ष लोकपाल गठन
राजनीति नागरिकता कानून में संशोधन को लेकर हायतौबा… November 1, 2016 | Leave a Comment निस्संदेह यदि हिंदुओं के अलावा कोई मुसलमान या ईसाई भी सच्चे अर्थों में अत्याचार और अन्याय के चलते देश में आता है, तो उसे भी यहां रहने का हक है। लेकिन प्रख्यात बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन जब भारत में शरण लेती हैं, तो इन्हीं तथाकथित धर्मनिरपेक्ष तत्वों को यह भी बर्दाश्त नहीं हुआ था। Read more » Featured uniform civil code नागरिकता कानून में संशोधन
विधि-कानून विविधा क्या न्यायपालिका सर्वशक्तिमान है? October 31, 2016 | Leave a Comment लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह कि पारदर्शिता के इस दौर में और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पारदर्शिता की पक्षधर न्यायपालिका अपने लिए पारदर्शिता की पक्षधर नहीं है। वह रंच-मात्र भी जवाबदेह नहीं होना चाहती। वह सबके मामले में हस्तक्षेप कर सकती है, यहां तक कि कानून भी बना सकती है जो संसद का काम है, पर अपने मामले में वह कोई नियंत्रण स्वीकार करने को तैयार नहीं है। Read more » appointment of judges Featured इलाहाबाद हाईकोर्ट काॅलेजियम न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट