notebandi

कश्मीर घाटी में आतंकियों से लेकर फारुक अब्दुल्ला की राजनीति तक नोटबन्दी का क़हर

डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री नोटबन्दी के चलते किसको लाभ हुआ और किसको हानि , राजनीति

‘मेरा भारत महान’, जहाँका ‘जनजन बेईमान’

इस देश के रग-रग में भ्रष्टता है, चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे। मुझे बस एक ही ईमानदार दिखाई दे रहा है। इस कुरुक्षेत्र में वो प्रधान सेवक है, वो बर्बरीक है, जिसने अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर (भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर) खूब तमाशा देख व दिखा रहा है। उस बर्बरीक ने सबको नंगा करके रख दिया है । अपनों को,गैरों को, मुझको, आपको और सबको।हम यदि उसको सहयोग ना कर सके तो कमसे कम हो-हल्ला करने वालों को रोकने-टोकने वा जनता में उसके सही मैसेज को पहुंचाने का काम तो कर ही सकते हैं।

नीचे के भ्रष्टाचार पर भी कार्यवाही हो

भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक प्रकार से आयुर्वेद जैसी उपचार पद्धति अपनाई है। आयुर्वेद उपचार की विशेषता है कि धीरे धीरे ही सही समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी। किसी भी प्रकार की समस्या को इस पद्धति से समाप्त करने के लिए धीरज रखने की आवश्यकता है। देश की जनता जितना धीरज से काम लेगी, उतना ही अ‘छा होगा। इससे देश को तो बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला ही है, लेकिन आम जनता भी आने वाले समय में प्रसन्नता का अनुभव करेगी।

#नोटबंदी के एक माह बाद देश के हालात

500 व एक हजार का #नोटबंद होने के बाद एक महीना बीत चुका है। पीएम मोदी ने देशवासियों के सहयोग से #कालेधन और #भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की ऐतिहासिक शुरूआत कर दी है। पीएम मोदी जनसभाओं व कार्यक्रमों में #नोटबंदी को अब तक का सबसे ऐतिहासक कदम बता रहे हैं और विपक्ष नोटबंदी को लेकर लगातार आक्रामक बना हुआ है।

नीति और नियमों का सरलीकरण जरूरी

#कालेधन एवं #भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिये नीति एवं नियमों का सरलीकरण जरूरी है। नीति आयोग के अध्यक्ष अरविंद पानगड़िया ने इसी बात की आवश्यकता व्यक्त करते हुए कहा कि जटिल टैक्स नियमों को सरल बनाने और टैक्स दरों को कम करने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए, नोटबंदी का उद्देश्य तभी सफल होेगा।