वीरेंदर परिहार

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

आमने-सामने : न्यायाधीशों की नियुक्ति

उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के काॅलेजियम द्वारा भेजे गए 77 नामों में से 34 नामों की स्वीकृति केन्द्र सरकार द्वारा दिए जाने से ऐसा लगने लगा था कि न्यायपालिका और सरकार के बीच बर्फ गलने लगी है, और अंतोगत्वा दोनों के बीच जजों की नियुक्तियों को लेकर कोई आम सहमति बन जाएगी। लेकिन 43 नामों को केन्द्र सरकार द्वारा वापस कर दिए जाने और उन नामों को पुनः काॅलेजियम द्वारा केन्द्र सरकार के पास भेजे जाने से ऐसा लगता है कि न्यायपालिका और सरकार आमने-सामने आ गए हैं।

नागरिकता कानून में संशोधन को लेकर हायतौबा…

निस्संदेह यदि हिंदुओं के अलावा कोई मुसलमान या ईसाई भी सच्चे अर्थों में अत्याचार और अन्याय के चलते देश में आता है, तो उसे भी यहां रहने का हक है। लेकिन प्रख्यात बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन जब भारत में शरण लेती हैं, तो इन्हीं तथाकथित धर्मनिरपेक्ष तत्वों को यह भी बर्दाश्त नहीं हुआ था।

क्या न्यायपालिका सर्वशक्तिमान है?

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह कि पारदर्शिता के इस दौर में और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पारदर्शिता की पक्षधर न्यायपालिका अपने लिए पारदर्शिता की पक्षधर नहीं है। वह रंच-मात्र भी जवाबदेह नहीं होना चाहती। वह सबके मामले में हस्तक्षेप कर सकती है, यहां तक कि कानून भी बना सकती है जो संसद का काम है, पर अपने मामले में वह कोई नियंत्रण स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

धर्म बनाम राष्ट्रधर्म

दुर्भाग्य का विषय यह कि स्वतंत्र भारत में मुस्लिम लाॅ में व्यक्ति की गरिमा और मानव अधिकारों के हित में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। शहबानों प्रकरण में देश की शीर्ष अदालत यह कह चुकी है कि मुस्लिम समुदाय में निजी कानूनों में सुधार होना चाहिए।

सर्जिकल स्ट्राइक, सरकार और सेना

अब जैसा कि सभी को पता है कि सेना स्वतः इस सर्जिकल स्ट्राइक की सी.डी. सरकार को सौंप चुकी है, पर वह स्वतः इसे प्रगट किए जाने के पक्ष मंे नहीं है, क्यांेकि इससे क्षत्रु को हमारी रणनीति और विषेषताओं का पता चल जाएगा। वेसे भी जहाॅ तक राष्ट्र की सुरक्शा का प्रष्न है, वहाॅ बहुत चीजें प्रगट नहीं की जाती है। जहाॅ तक सियासी फायदे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करने का सवाल है तो संजय निरूपम से यह पूछा जा सकता है कि क्या 1971 में बांग्ला देश का मुक्ति संग्राम उस समय की इंदिरा सरकार द्वारा सियासी फायदे के लिए किया गया था?