कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार समाज जानकी नवमी May 12, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी सीताजी की जयंती वैशाख शुक्ल नवमी को मनायी जाती है, किंतु भारत के कुछ भाग में इसे फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को मनाते हैं। रामायण के अनुसार वह वैशाख में अवतरित हुईं थीं, किन्तु ‘निर्णयसिन्धु’ के ‘कल्पतरु’ ग्रंथानुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को। अत: दोनों ही तिथियाँ उनकी जयंती हेतु मान्य हैं। […] Read more » birthday of sita mata Featured sita jayanti जानकी नवमी
कला-संस्कृति वर्त-त्यौहार विविधा गंगोत्पत्ति दिवस है गंगा सप्तमी May 12, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” मानव जीवन ही नहीं, वरन मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करने वाली भारतवर्ष की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नदी राष्ट्र-नदी गंगा निरन्तर गतिशीला और श्रम का प्रतीक है और अनवरत श्रमशीला बनी रहकर सभी को अथक, अविरल श्रम करने का संदेश देती है। इसीलिए गंगा को जीवन तत्त्व और जीवन प्रदायिनी कहा गया है तथा […] Read more » Featured ganga saptmi गंगा सप्तमी गंगोत्पत्ति दिवस
कला-संस्कृति अक्षय तृतीया पर्व का धार्मिक महत्व May 10, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 9 मई पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित भारतीय संस्कृति एवं परम्परा मंे हर महीने व दिन कोई न कोइ्र्र महान पर्व अवश्य पड़ता है तथा उसक विशेष महत्व होता है। इसी कड़ी में वैशाख मास में शुक्लपक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है जिसका अपना विशेष महत्व हैं । अक्षय तृतीया […] Read more » akshay tritiya Featured अक्षय तृतीया
कला-संस्कृति शख्सियत समाज शस्त्र शास्त्र के पारंगत और कर्मवीर भगवान परशुराम May 7, 2016 / May 7, 2016 by हितेश शुक्ला | 2 Comments on शस्त्र शास्त्र के पारंगत और कर्मवीर भगवान परशुराम परशुराम जी ने कभी क्षत्रियों को संहार नहीं किया. उन्होंने हैहयवंशीय क्षत्रिय वंश में उग आई उस खर पतवार को साफ किया जिससे क्षत्रिय वंश की साख खत्म होती जा रही थी. जिस दिन भगवान परशुराम को योग्य क्षत्रियकुलभूषण प्राप्त हो गया उन्होंने स्वत दिव्य परशु सहित अस्त्र-शस्त्र राम के हाथ में सौंप दिए जन्म […] Read more » कर्मवीर भगवान परशुराम शस्त्र शास्त्र के पारंगत
कला-संस्कृति लेख साहित्य साहित्य और समाज May 7, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॊ. सौरभ मालवीय साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है. किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व […] Read more » Featured साहित्य और समाज
कला-संस्कृति जन-जागरण समाज आइये, कुंभ को जाने May 3, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment सिर्फ स्नान नहीं है कुंभ अरुण तिवारी दुनिया में पानी के बहुत से मेले लगते हैं, लेकिन कुंभ जैसा कोई कोई नहीं। स्वीडन की स्टॉकहोम, ऑस्ट्रेलिया की ब्रिसबेन, अमेरिका की हडसन, कनाडा की ओटावा…जाने कितने ही नदी उत्सव साल-दर-साल आयोजित होते ही हैं, लेकिन कुंभ!.. कुंभ की बात ही कुछ और है। जाति, धर्म, अमीरी, […] Read more » Featured Kumbh कुंभ
कला-संस्कृति वर्त-त्यौहार विविधा आदि तीर्थंकर ऋषभ के कठोर तप से जुड़ा है अक्षय तृतीया May 2, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment 9 मई 2016 अक्षय तृतीया अक्षय तृतीया का इन्द्रधनुषी त्यौहार फिर एक बार हमारे द्वार पर दस्तक दे रहा है। न केवल जैन परम्परा में बल्कि भारत की सांस्कृतिक परम्परा में यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, यह त्यौहार के साथ-साथ एक अबूझा मांगलिक एवं शुभ दिन भी है, जब बिना किसी मुहूर्त के विवाह एवं […] Read more » Featured अक्षय तृतीया
कला-संस्कृति समाज भारतीय संस्कृति की जीवन्तता का प्रतीक कुम्भ पर्व April 30, 2016 / April 30, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” पौराणिक मान्यतानुसार हिन्दुओं के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक कुम्भ पर्व में करोड़ों श्रद्धालुओं के कुम्भ पर्व स्थलों पर स्नान कर सामूहिक धर्मचर्चा करने की परिपाटी प्रचलित हैं । ये कुम्भ पर्व स्थल चार स्थानों – हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक, में अवस्थित हैं , जहाँ समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की बूंदें […] Read more » Featured singhast kumbh कुम्भ पर्व
कला-संस्कृति विविधा जल परम्परा और बाजार April 23, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार एक समय था जब आप सफर पर हैं तो पांच-दस गज की दूरी पर लाल कपड़े में लिपटा पानी का घड़ा आपकी खातिरदारी के लिए तैयार मिलेगा. पानी के घड़े के पास जाते हुए मन को वैसी ही शीतलता मिलती थी, जैसे उस घड़े का पानी लेकिन इस पाऊच की दुनिया में मन […] Read more » Featured Water Conservation जल परम्परा बाजार
कला-संस्कृति वर्त-त्यौहार चैत्र पूर्णिमा ही है हनुमान जयन्ती April 21, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment –अशोक “प्रवृद्ध” रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक वेद – वेदांग पारंगत, महावीर श्रीराम भक्त श्रीहनुमान के पिता सुमेरू पर्वत के वानरराज राजा केसरी थे तथा माता अंजना थी। हनुमान आञ्जनेय, मारुति, बजरंग बली, अंजनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, बालाजी महाराज आदि अनेक नामों से भी जाने जाते हैं। इन्हें बजरंगबली के […] Read more » Featured चैत्र पूर्णिमा हनुमान जयन्ती
कला-संस्कृति समाज भगवान महावीर की शिक्षायें मानव कल्याण के लिए! April 19, 2016 / April 21, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment महावीर जयन्ती पर जनहित में प्रकाशन हेतु विशेष लेख – डा.. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक, सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ (1) मानवता के लिए त्याग करने वाला महावीर है:- महावीर का जन्म वैशाली (बिहार) के एक राज परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशिला था। बचपन से […] Read more » Featured भगवान महावीर भगवान महावीर की शिक्षायें महावीर मानव कल्याण
कला-संस्कृति जन-जागरण लेख साहित्य विश्व का सबसे बड़ा कोहिनूर हीरा April 19, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा राधेश्याम द्विवेदी 1.परी कथाओं सा रोमांचक कहानी:- कोहिनूर फारसी का शब्द है, जिसका अर्थ है : आभा या रोशनी का पर्वत । कोहिनूर (फ़ारसी: कूह-ए-नूर) एक 105 कैरेट (21.6 ग्राम) का हीरा है जो किसी समय विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात हीरा रह चुका है। कोहिनूर दुनिया के सभी हीरों का राजा है । […] Read more » Featured history of kohinoor hira कोहिनूर हीरा