धर्म-अध्यात्म वेद ज्ञान का अप्रचार और लोगों की उसके प्रति अनभिज्ञता April 30, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मत-मतान्तरों की उत्पत्ति का प्रमुख कारण वेद ज्ञान का अप्रचार और लोगों की उसके प्रति अनभिज्ञता मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी देशों के लोग किसी न किसी मत, पन्थ व सम्प्रदाय को मानते हैं। अंग्रेजी में इन्हें religion कहते हैं। धर्म संस्कृत का शब्द है जो केवल वैदिक मान्यताओं व सिद्धान्तों तथा उसके पालन […] Read more » वेद ज्ञान वेद ज्ञान का अप्रचार और लोगों की उसके प्रति अनभिज्ञता
धर्म-अध्यात्म वेदालोचन (वेदों के अध्ययन) से रहित संस्कृत शिक्षा पूर्ण लाभ न देने वाली व हानिकारक April 29, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संस्कृत भाषा का अध्ययन, उसके द्वारा वेदालोचन और वेद विहित योगाभ्यास को करके ही बालक मूलशंकर ऋषि दयानन्द बने। आज भी ऋषि दयानन्द का यशोगान चहुं दिशाओं में हो रहा है। यदि वह ऐसा न करते तो अपने टंकारा गांव के अन्य लोगों की भांति आज उन्हें कोई जानता भी नहीं। अतः अपना परम कर्तव्य मानकर संस्कृत भाषा का अध्ययन करते हुए वेदों का स्वाध्याय वा वेदालोचन मनुष्य का आवश्यक कर्तव्य है। महर्षि दयानन्द के बाद उनके संस्कृताध्ययन व वेदालोचन के उद्देश्य से ही उनके अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द ने गुरुकुल कागड़ी खोला था। उनसे भी पूर्व पं. गुरुदत्त विद्यार्थी जी ने लाहौर में अष्टाध्यायी का अध्ययम कराने के लिए पाठशाला खोली थी जहां अधिक आयु के लोग पढ़ते थे। Read more » संस्कृत शिक्षा
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-10 April 29, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  छोड़ देवें छल-कपट को मानसिक बल दीजिए गतांक से आगे…. ओ३म्! येनेदम् भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतम मृतेन सर्वम्। येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मन: शिवसंकल्पमस्तु।। (यजु. 34-4) अर्थ-‘जिस अमर मन ने ये तीनों काल भूत, वर्तमान और भविष्यत अपने वश में किये हुए हैं, जिसके द्वारा सात होताओं (यज्ञकत्र्ताओं) वाला यज्ञ किया […] Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म जानिए घर की किस दिशा में दीपक लगाने से पूरी होती हैं आपकी मनोकामना/विश— April 28, 2017 / April 28, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment आखिर क्यों भारतीय संस्कृति की परम्पराओं में दीपक का इतना महत्व हैं ? किसी भी देश की संस्कृति उसकी आत्मा होती है। भारतीय संस्कृति की गरिमा अपार है। इस संस्कृति में आदिकाल से ऐसी परम्पराएँ चली आ रही हैं, जिनके पीछे तात्त्विक महत्त्व एवं वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ […] Read more » दीपक दीपक का महत्व
धर्म-अध्यात्म सर्वोपरि महान ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश April 26, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment विद्या अविद्या सहित मनुष्यों के यथार्थ धर्म का प्रकाशक सर्वोपरि महान ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश मनमोहन कुमार आर्य चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद सृष्टि की आदि में उत्पन्न ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है जो ईश्वर ने चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा की आत्माओं में प्रेरणा द्वारा प्रकट वा स्थापित किया था। इन चार ऋषियों ने […] Read more » सर्वोपरि महान ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म एक अनूठा त्यौहार है अक्षय तृतीया April 26, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment अक्षय तृतीया का पावन पवित्र त्यौहार निश्चित रूप से धर्माराधना, त्याग, तपस्या आदि से पोषित ऐसे अक्षय बीजों को बोने का दिन है जिनसे समयान्तर पर प्राप्त होने वाली फसल न सिर्फ सामाजिक उत्साह को शतगुणित करने वाली होगी वरन अध्यात्म की ऐसी अविरल धारा को गतिमान करने वाली भी होगी जिससे सम्पूर्ण मानवता सिर्फ कुछ वर्षों तक नहीं पीढ़ियों तक स्नात होती रहेगी। अक्षय तृतीया के पवित्र दिन पर हम सब संकल्पित बनें कि जो कुछ प्राप्त है उसे अक्षुण्ण रखते हुए इस अक्षय भंडार को शतगुणित करते रहें। यह त्यौहार हमारे लिए एक सीख बने, प्रेरणा बने और हम अपने आपको सर्वोतमुखी समृद्धि की दिशा में निरंतर गतिमान कर सकें। अच्छे संस्कारों का ग्रहण और गहरापन हमारे संस्कृति बने Read more » Featured अक्षय तृतीया अक्षय तृतीया 2017
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म ख़ालसा पंथ का उदय तथा श्री गुरु गोबिन्द सिंघ जी के दिशा-निर्देश April 26, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment 30 मार्च सन् 1699 को वैषाखी के दिन श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी ने आन्नदुपर (पंजाब) में, सभी सिक्खों को एकत्र कर एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया। प्रातः भजन-कीर्तन के पश्चात् उस ऐतिहासिक दिवस पर, श्रद्धालुओं के अपार जन-समूह के सम्मुख हाथ में नग्न तलवार लिए श्री गुरू गोबिन्द सिंघ जी ने उच्च स्वर […] Read more » ख़ालसा पंथ का उदय श्री गुरु गोबिन्द सिंघ जी के दिशा-निर्देश
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-9 April 24, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment पर संसार के लोगों में और विद्वान लोगों में एक बात सांझा होती है कि संसार के साधारण लोग भी जिस सुख-समृद्घि की प्राप्ति करना चाहते हैं उनके लिए वह भी यज्ञयागादि और ज्ञान चर्चाएं करते हैं और विद्वान लोग भी अपने स्तर पर ऐसी ही कार्य प्रणाली को अपनाते हैं। इन सबका उद्देश्य होता है-अपने-अपने उद्देश्यों की प्राप्ति, अपनी-अपनी आकांक्षाओं की प्राप्ति। Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
धर्म-अध्यात्म शख्सियत वेदभाष्यकार एवं वैदिक विद्वान पं. हरिश्चन्द्र विद्यालंकार का संक्षिप्त परिचय April 24, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment पं. हरिश्चन्द्र विद्यालंकार जी के जिन ग्रन्थों का उल्लेख उपर्युक्त सूची में है, आज उनमें से कोई एक ग्रन्थ भी कहीं से उपलब्ध नहीं होता। आर्यसमाज की सभाओं को लेखक के ग्रन्थों के संरक्षण की ओर ध्यान देना चाहिये। यदि इन सबकी पीडीएफ बनाकर किसी साइट पर डाल दी जाये तो पाठकों को सुविधा होने के साथ ग्रन्थों का संरक्षण स्वतः ही हो जायेगा। आशा है कि हमारे नेतागण इस पर ध्यान देंगे। Read more » पं. हरिश्चन्द्र विद्यालंकार
धर्म-अध्यात्म हमारी रक्षा के लिए उसका धन्यवाद करना हम सबका परम कर्तव्य April 24, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment प्रतिदिन प्रातः एवं सायं ईश्वर का सम्यक् ध्यान वा सन्ध्या करना सभी मनुष्यों का परम कर्तव्य है। जो नहीं करता वह अपराध करता है। ऋषियों का विधान है कि सन्ध्या न करने वाले के सभी अधिकार छीन लेने चाहिये और उसे श्रमिक कोटि का मनुष्य बना देना चाहिये। सन्ध्या पर अनेक विद्वानों ने टीकायें लिखी हैं। पं. विश्वनाथ वेदोपाध्याय, पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय, पं. चमूपति, स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी आदि की टिकायें उपलब्ध हो जाती हैं। अभ्युदय व निःश्रेयस की प्राप्ति के इच्छुक सभी मनुष्यों को प्रतिदिन दोनों समय सन्ध्या अवश्य करनी चाहिये Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म अक्षय तृतीया(आखा तीज) 2017 पर बना वर्षों बाद अमृतसिद्घि योग के महासंयोग— April 22, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment अक्षय तृतीया के दिन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। मान्यता है कि इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस दिन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी नियमित पूजा करें। क्योंकि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है। आज के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखे इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। इनका प्रयोग तंत्र मंत्र में भी होता है। इसका कारण यह है कि देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। नियमित केसर और हल्दी से इसकी पूजा देवी लक्ष्मी के साथ करने से आर्थिक परेशानियों में लाभ मिलता है Read more » अक्षय तृतीया आखा तीज
धर्म-अध्यात्म यज्ञ व संस्कार कराने वाले पुरोहित तथा उसकी दक्षिणा April 20, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य पुरोहित उस व्यक्ति को कहते हैं जो देश व समाज के प्रत्येक व्यक्ति के हित की भावना से कार्य करता हे। इसके लिए पुरोहित को अपने उद्देश्य का पता होना चाहिये और उसके साधनों का ज्ञान भी होना चाहिये। वह विद्वान एवं पुरुषार्थी होना चाहिये और चारित्रिक बल का धनी हो। विद्वान […] Read more » यज्ञ