Category: धर्म-अध्यात्म

धर्म-अध्यात्म

वेदालोचन (वेदों के अध्ययन) से रहित संस्कृत शिक्षा पूर्ण लाभ न देने वाली व हानिकारक

| Leave a Comment

संस्कृत भाषा का अध्ययन, उसके द्वारा वेदालोचन और वेद विहित योगाभ्यास को करके ही बालक मूलशंकर ऋषि दयानन्द बने। आज भी ऋषि दयानन्द का यशोगान चहुं दिशाओं में हो रहा है। यदि वह ऐसा न करते तो अपने टंकारा गांव के अन्य लोगों की भांति आज उन्हें कोई जानता भी नहीं। अतः अपना परम कर्तव्य मानकर संस्कृत भाषा का अध्ययन करते हुए वेदों का स्वाध्याय वा वेदालोचन मनुष्य का आवश्यक कर्तव्य है। महर्षि दयानन्द के बाद उनके संस्कृताध्ययन व वेदालोचन के उद्देश्य से ही उनके अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द ने गुरुकुल कागड़ी खोला था। उनसे भी पूर्व पं. गुरुदत्त विद्यार्थी जी ने लाहौर में अष्टाध्यायी का अध्ययम कराने के लिए पाठशाला खोली थी जहां अधिक आयु के लोग पढ़ते थे।

Read more »

कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म

एक अनूठा त्यौहार है अक्षय तृतीया

| Leave a Comment

अक्षय तृतीया का पावन पवित्र त्यौहार निश्चित रूप से धर्माराधना, त्याग, तपस्या आदि से पोषित ऐसे अक्षय बीजों को बोने का दिन है जिनसे समयान्तर पर प्राप्त होने वाली फसल न सिर्फ सामाजिक उत्साह को शतगुणित करने वाली होगी वरन अध्यात्म की ऐसी अविरल धारा को गतिमान करने वाली भी होगी जिससे सम्पूर्ण मानवता सिर्फ कुछ वर्षों तक नहीं पीढ़ियों तक स्नात होती रहेगी। अक्षय तृतीया के पवित्र दिन पर हम सब संकल्पित बनें कि जो कुछ प्राप्त है उसे अक्षुण्ण रखते हुए इस अक्षय भंडार को शतगुणित करते रहें। यह त्यौहार हमारे लिए एक सीख बने, प्रेरणा बने और हम अपने आपको सर्वोतमुखी समृद्धि की दिशा में निरंतर गतिमान कर सकें। अच्छे संस्कारों का ग्रहण और गहरापन हमारे संस्कृति बने

Read more »

धर्म-अध्यात्म

हमारी रक्षा के लिए उसका धन्यवाद करना हम सबका परम कर्तव्य

| Leave a Comment

प्रतिदिन प्रातः एवं सायं ईश्वर का सम्यक् ध्यान वा सन्ध्या करना सभी मनुष्यों का परम कर्तव्य है। जो नहीं करता वह अपराध करता है। ऋषियों का विधान है कि सन्ध्या न करने वाले के सभी अधिकार छीन लेने चाहिये और उसे श्रमिक कोटि का मनुष्य बना देना चाहिये। सन्ध्या पर अनेक विद्वानों ने टीकायें लिखी हैं। पं. विश्वनाथ वेदोपाध्याय, पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय, पं. चमूपति, स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी आदि की टिकायें उपलब्ध हो जाती हैं। अभ्युदय व निःश्रेयस की प्राप्ति के इच्छुक सभी मनुष्यों को प्रतिदिन दोनों समय सन्ध्या अवश्य करनी चाहिये

Read more »

धर्म-अध्यात्म

अक्षय तृतीया(आखा तीज) 2017 पर बना वर्षों बाद अमृतसिद्घि योग के महासंयोग—

| Leave a Comment

अक्षय तृतीया के द‌िन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। मान्यता है क‌ि इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस द‌िन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी न‌ियम‌ित पूजा करें। क्योंक‌ि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है। आज के दिन 11 कौड़‌ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखे इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्ष‌ित करने की क्षमता होती है। इनका प्रयोग तंत्र मंत्र में भी होता है। इसका कारण यह है क‌ि देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़‌ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। न‌ियम‌ित केसर और हल्‍दी से इसकी पूजा देवी लक्ष्मी के साथ करने से आर्थ‌िक परेशान‌ियों में लाभ म‌िलता है

Read more »