धर्म-अध्यात्म वेद स्वतः प्रमाण धर्म ग्रन्थ और अन्य सभी ग्रन्थ वेदानुकूल होने पर ही परतः प्रमाण April 20, 2017 / April 28, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जन्म वाद-विवाद के लिए नहीं अपितु सत्य व असत्य का निर्णय कर सत्य का ग्रहण व उसका पालन करने क लिए हुआ है। सत्य का निर्णय करने का साधन व कसौटी क्या है? इसका उत्तर धर्म व सत्य की जिज्ञासा होने पर ईश्वरीय ज्ञान चार वेद की मन्त्र संहिताओं के […] Read more » प्राचीन भाषा वेद वेद वेद अर्वाचीन ग्रन्थों में सबसे उन्नत वेद का ज्ञान
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-8 April 20, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य छोड़ देवें छल-कपट को मानसिक बल दीजिए गतांक से आगे…. इसी अवस्था के आनंद की चर्चा करते हुए वेदांत स्पष्ट करता है:- भिद्यंते हृदय ग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्व संशया:। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन्दृष्टे पराह्यवरे।। मु. 2 खण्ड 2 मं. 18 (स.प्र. समु. 9 पृष्ठ 371) अर्थात ‘जब इस जीव के हृदय की अविद्या अंधकार […] Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
धर्म-अध्यात्म आचार्य वसन्त सूरिजी : कठोर तप की पूर्णता के पचास वर्ष April 19, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment आचार्य वसंत सूरीश्वरजी के पास लोककल्याणकारी कार्यों की एक लंबी सूची है। चाहे हस्तिनापुर में अष्टापद का निर्माण हो या जीर्ण-शीर्ण ऐतिहासिक जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार, प्रसिद्ध जैन तीर्थ पालीताना में कमल मंदिर की कल्पना हो या देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना, दिल्ली में भव्य वल्लभ स्मारक हो या सेवा के विविध आयाम- अस्पताल, गौशाला, कन्या छात्रावास- उनकी प्रेरणा के ये आयाम जन-जन के कल्याण के लिए, संस्कार निर्माण के लिए, शिक्षा, सेवा और परोपकार के लिए संचालित हैं। उन्होंने गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में संचालित सुखी परिवार अभियान के आदिवासी उन्नयन एवं उत्थान के साथ-साथ परिवार संस्था मजबूती देने के संकल्प में भी निरंतर सहयोग एवं आशीर्वाद प्रदत्त किया है। Read more » Featured आचार्य वसन्त सूरिजी
धर्म-अध्यात्म प्रमुख वैश्विक संस्था आर्यसमाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य व इसके उपयोगी राष्ट्रहितकारी कार्य April 18, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आर्यसमाज की स्थापना वेद प्रचार अर्थात् सत्य ज्ञान के प्रचार के लिए की गई थी जिससे देश व संसार के सभी मानवों का कल्याण हो। ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज के दस नियम सूत्र बद्ध किये हैं। इनका उल्लेख कर देना उचित प्रतीत होता है। पहला नियम है ‘सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उनका आदि मूल परिमेश्वर है।’ दूसरा नियम: ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकत्र्ता है। Read more » आर्यसमाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-7 April 17, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment जब जिह्वा पर परमेश्वर की गुणों की चर्चा होने लगे और रसना उसी के मधुर गीत गाने लगे, जब हमारे श्वांसों की सरगम में परमेश्वर के गीत भासने लगें तब समझना चाहिए कि हमारे दुर्भाग्य के दुर्दिन हमसे दूर हो रहे हैं और हमारे सौभाग्य का उदय हो रहा है। हमारे भीतर सर्वांशत: व्यापक स्तर पर परिवत्र्तन हो रहा है। हमारे भीतर और बाहर सर्वत्र क्रांति व्याप रही है। Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म शिव :पूर्वोत्तर भारत के सर्वमान्य ईश्वर April 15, 2017 by वीरेन्द्र परमार | Leave a Comment प्रकृतिपूजक समुदाय पर भी हिंदू धर्म और संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है I प्रकारांतर से भगवान शिव की सर्वोच्चता में पूर्वोत्तर के सभी समुदायों की आस्था है I असमिया साहित्यभ, संस्कृमति, समाज व आध्याआत्मि क जीवन में युगांतरकारी महापुरुष श्रीमंत शंकर देव का अवदान अविस्मोरणीय है । उन्होंभने पूर्वोत्तार क्षेत्र में एक मौन अहिंसक क्रांति का सूत्रपात किया । उनके महान कार्यों ने इस क्षेत्र में सामाजिक- सांस्कृंतिक एकता की भावना को सुदृढ़ किया । उन्हों ने रामायण और भगवद्गीता का असमिया भाषा में अनुवाद किया । Read more » पूर्वोत्तर भारत शिव शिव सर्वमान्य ईश्वर
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-5 April 12, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य पूजनीय प्रभो! हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए गतांक से आगे…. ऐसा साधक या भक्त कहीं जड़ को चेतन मान लेता है तो कहीं चेतन को जड़ मान लेने की भूल कर बैठता है। जड़मूर्ति में चेतन परमेश्वर की भावना करना ऐसी ही भावुकता का परिणाम होता है। यह भावना नही अभावना है। जो […] Read more » Featured पूजनीय प्रभो हमारे
ज्योतिष धर्म-अध्यात्म जानिए मोती का प्रभाव और मोती क्यों पहने ??? April 10, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | 7 Comments on जानिए मोती का प्रभाव और मोती क्यों पहने ??? पुरातन काल से ही रत्नों का प्रचलन रहा है | मानिक मोती मूंगा पुखराज पन्ना हीरा और नीलम ये सब मुख्य रत्न हैं | इनके अतिरिक्त और भी रत्न हैं जो भाग्यशाली रत्नों की तरह पहने जाते हैं | इनमे गोमेद, लहसुनिया, फिरोजा, लाजवर्त आदि का भी प्रचलन है | रत्नों में ७ रत्नों को […] Read more » असली मोती की पहचान जानिए मोती का प्रभाव मोती के दोष मोती क्यों पहने
धर्म-अध्यात्म पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-4 April 10, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कितना दयालु है मेरा दाता, कि अपने पास कुछ नही रखता। सवाया करके हमें ही लौटा देता है। इसीलिए वह यज्ञरूप है। जैसे यज्ञ में हम जो कुछ भी समर्पित करते हैं, उसे यज्ञ अपना बनाकर अपने पास नही रखता, अपितु उसे हमारी ओर से संसार के कल्याण हेतु सवाया ही नही हजारों गुना अधिक करके लोक-कल्याण के लिए लौटा देता है। Read more » पूजनीय प्रभो हमारे
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म जानिए क्यों हैं हनुमान मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता…?? April 9, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment तंत्र शास्त्र के आदि देवता और प्रवर्तक भगवान शिव हैं। इस प्रकार से हनुमानजी स्वयं भी तंत्र शास्त्र के महान पंडित हैं। समस्त देवताओं में वे शाश्वत देव हैं। परम विद्वान एवं अजर-अमर देवता हैं। वे अपने भक्तों का सदैव ध्यान रखते हैं। उनकी तंत्र-साधना, वीर-साधना है। वे रुद्रावतार और बल-वीरता एवं अखंड ब्रह्मचर्य के प्रतीक हैं। अतः उनकी उपासना के लिए साधक को सदाचारी होना अनिवार्य है। उसे मिताहारी, जितेन्द्रिय होना चाहिए। हनुमान साधना करने के लिए हर व्यक्ति उसका पालन नहीं कर सकता, इसलिए इस चेतावनी का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि हनुमानजी को सिद्ध करने का प्रयास भौतिक सुखों की प्राप्ति या चमत्कार प्रदर्शन के लिए कभी नहीं करना चाहिए। Read more » hanuman jayanti हनुमान हनुमान जन्मोत्सव हनुमान मंगलकर्ता हनुमान विघ्नहर्ता
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता हैं हनुमान April 9, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment हनुमान जयन्ती- 11 अप्रैल 2017 पर विशेष – ललित गर्ग – भगवान हनुमानजी को हिन्दू देवताआंे में सबसे शक्तिशाली माना गया है, वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे। वे भगवान शिव के ग्यारवंे रूद्र अवतार थे जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे। उनको बजरंग […] Read more » हनुमान जयन्ती
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म मनोवांछित फल प्रदाता और समस्त कामना पूर्ण करने वाली कामदा एकादशी April 8, 2017 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment मान्यतानुसार मनोवांछित फल प्रदाता और समस्त कामना पूर्ण करने वाली कामदा एकादशी व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन किया जाता है। पौराणिक कथानुसार धर्मावतार महाराज युधिष्ठिर के द्वारा पूछे जाने पर वसुदेव-देवकी नंदन भगवान श्री कृष्ण ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में स्थित कामदा एकादशी का विधान व माहात्म्य बतलाते हुए कहा कि एक समय यही प्रश्न राजा दिलीप ने अपने गुरुदेव वशिष्ठ जी से किया था। तब उन्होंने जो उत्तर दिया था वही मैं आपकी जिज्ञासा शांत करने हेतु श्रवण कराता हूं, आप एकाग्रचित्त से श्रवण करें। र Read more » कामदा एकादशी